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झारखण्ड

नीति आयोग की बैठक में झारखंड की विकास दृष्टि को मिला राष्ट्रीय मंच

संपादकीय

नई दिल्ली-राँची: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में झारखंड सरकार ने राज्य की विकास संबंधी प्राथमिकताओं, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। “Inclusive Human Development for Viksit Bharat @2047” विषय पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने झारखंड की चार करोड़ से अधिक जनता की आकांक्षाओं को राष्ट्रीय मंच पर रखते हुए राज्य के दीर्घकालिक विकास का व्यापक खाका प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने देश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति में अपनी खनिज संपदा, श्रमशक्ति और प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि, केवल खनिज संसाधनों के दोहन से विकास की परिकल्पना अधूरी है। राज्य सरकार का उद्देश्य खनिज संपदा को मानव पूंजी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और कौशल विकास से जोड़कर समग्र विकास सुनिश्चित करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत 2047 और झारखंड विजन 2050 के अनुरूप राज्य को मैन्युफैक्चरिंग हब, ग्रीन इकोनॉमी और नॉलेज इकोनॉमी के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

आंगनबाड़ी और पोषण अभियान पर विशेष जोर

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड में वर्तमान समय में लगभग 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से करीब 15 हजार केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा पोषण अभियान और सामर (SAAMAR) कार्यक्रम के माध्यम से कुपोषण और बच्चों में स्टंटिंग की समस्या को कम करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन अंडा उपलब्ध कराने की योजना का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है। साथ ही अपने संसाधनों से पांच हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस कार्य में केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहयोग की अपेक्षा जताई ताकि योजनाओं को और अधिक गति मिल सके।

शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर बढ़ता झारखंड

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के छात्र देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों, आईआईटी, मेडिकल कॉलेजों तथा अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में लगातार सफलता प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से राज्य में लगभग 5000 उत्कृष्ट विद्यालयों के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि झारखंड में पीएम श्री विद्यालयों तथा केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही शिक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और वित्तीय सहायता को एकीकृत कर राज्यों को अधिक लचीलापन प्रदान किया जाए ताकि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव हो सके।

क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण की मांग

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की 32 जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाएं राज्य की सांस्कृतिक पहचान और धरोहर हैं। इन भाषाओं के संरक्षण एवं विकास के लिए उन्होंने झारखंड में एनसीईआरटी का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने कहा कि ऐसा केंद्र स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्य सामग्री, शोध और शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करने की पहल

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री सारथी योजना, गुरुकुल प्रशिक्षण मॉडल तथा बिरसा स्किल सेंटर के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल पारंपरिक रोजगार तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।

उन्होंने निर्माण श्रमिकों और प्रवासी मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए BOCW योजना में राज्यों को अधिक लचीलापन देने का भी अनुरोध किया।

उच्च शिक्षा और वैश्विक अवसरों की दिशा में पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीएम फेलोशिप स्कीम फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस तथा मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ओवरसीज स्कॉलरशिप जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रतिभाशाली युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अध्ययन के अवसर उपलब्ध करा रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य युवाओं को केवल छात्रवृत्ति देना नहीं, बल्कि उन्हें वैश्विक मंचों तक पहुंचाना है ताकि वे विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा में अपनी पहचान बना सकें।

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को जिला मुख्यालयों तक सीमित रखने के बजाय पंचायत स्तर तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर दवा दुकानों की स्थापना के माध्यम से दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी सीटों की संख्या बढ़ाने तथा नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से लंबित मेडिकल सीट स्वीकृतियों तथा पीपीपी मॉडल पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों को शीघ्र मंजूरी देने का आग्रह किया।

खेल क्षेत्र में झारखंड की बढ़ती पहचान

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आज हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स और तीरंदाजी जैसे खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बना चुका है।

उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हॉकी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की मांग की। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर प्रदान करने का भी आग्रह किया।

उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय एवं पूर्व उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में खेल अवसंरचना और प्रतिभा विकास के लिए विशेष पैकेज की आवश्यकता पर बल दिया।

डिजिटल गवर्नेंस और डेटा आधारित प्रशासन

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार AI-Driven Chief Minister Data Intelligence Platform (CM-DIP) तथा Integrated Command and Control Centre के माध्यम से डेटा आधारित सुशासन को मजबूत कर रही है।

उन्होंने केंद्र सरकार से समयबद्ध डेटा साझा करने और डीबीटी योजनाओं में डिजिटल धोखाधड़ी तथा लीकेज रोकने के लिए तकनीकी सहयोग की मांग की।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं, बिरसा हरित ग्राम योजना तथा मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही हैं।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है ताकि कृषि उत्पादन और ग्रामीण आय को सुरक्षित रखा जा सके।

खनिज राज्य से वैल्यू एडिशन आधारित अर्थव्यवस्था की ओर

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को केवल खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। राज्य की आकांक्षा है कि यहां वैल्यू एडिशन, मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, इनोवेशन और क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योगों का विकास हो।

उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण मांगें

बैठक में मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने जल जीवन मिशन की लंबित राशि शीघ्र जारी करने, कोयला कंपनियों एवं केंद्रीय उपक्रमों द्वारा राज्य के बकाया भुगतान का निपटारा करने तथा DMFT नियमों की समीक्षा कर राज्यों की भूमिका को मजबूत करने की मांग की।

इसके अतिरिक्त उन्होंने DVC, CCL, ECL और अन्य केंद्रीय उपक्रमों के कमांड क्षेत्रों में सामाजिक अवसंरचना विकास के लिए भूमि एवं स्वीकृति प्रक्रियाओं को सरल बनाने का भी आग्रह किया।

विकसित भारत में झारखंड की साझेदारी

बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो झारखंड जैसे राज्यों को केवल संसाधन आपूर्ति करने वाले प्रदेश के रूप में नहीं, बल्कि विकास के बराबरी के साझेदार के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा को मानव संपदा से, उद्योग को रोजगार से और विकास को सामाजिक न्याय से जोड़ना ही भविष्य का रास्ता है। झारखंड सरकार इसी सोच के साथ राज्य को विकास, समावेशिता और आत्मनिर्भरता के नए आयामों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से झारखंड आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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