
देवघर/हंसडीहा: आज के दौर में जहां लोग अक्सर सड़क पर किसी मुसीबत में फंसे व्यक्ति को नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं, वहीं कुछ संवेदनशील लोग मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की ऐसी मिसाल पेश कर देते हैं जो समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है। ऐसा ही एक भावुक और मानवीय दृश्य हंसडीहा से देवघर जाने वाले मार्ग पर देखने को मिला, जहां एक दिव्यांग वृद्ध और उसका बेटा सड़क किनारे असहाय स्थिति में मदद की प्रतीक्षा कर रहे थे।
जानकारी के अनुसार, इनसाइट (Insight) संस्था के कार्यकारी निदेशक धर्मेंद्र सिंह अपने सहयोगियों के साथ देवघर मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर सड़क किनारे गिरी हुई एक वृद्ध व्यक्ति पर पड़ी। पास में उनका बेटा बेहद परेशान और लाचार अवस्था में खड़ा था तथा अपने पिता को उठाने का प्रयास कर रहा था, लेकिन सफल नहीं हो पा रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वृद्ध व्यक्ति अपने बेटे के साथ वाहन से कहीं जा रहे थे। रास्ते में अचानक उन्हें चक्कर आ गया, जिससे वे वाहन से नीचे गिर पड़े। वृद्ध व्यक्ति दिव्यांग होने के कारण स्वयं उठने में असमर्थ थे। बेटा लगातार प्रयास कर रहा था, लेकिन अकेले अपने पिता को संभाल नहीं पा रहा था।
सबसे दुखद पहलू यह रहा कि कई वाहन चालक और राहगीर इस दृश्य को देखकर वहां से गुजरते रहे, लेकिन किसी ने रुककर उनकी सहायता करने की जरूरत नहीं समझी। ऐसे समय में धर्मेंद्र सिंह और उनके साथियों ने मानवता का परिचय देते हुए तत्काल अपनी गाड़ी रोकी और दोनों की मदद के लिए आगे आए।
धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि जब उन्होंने वृद्ध और उसके बेटे से बातचीत की तो पता चला कि दोनों सुबह से भूखे थे और उनके पास खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी। लंबे समय तक कुछ न खाने के कारण ही वृद्ध व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें चक्कर आने लगे थे।
स्थिति को समझते हुए टीम ने सबसे पहले दोनों को पीने के लिए पानी उपलब्ध कराया। इसके बाद उन्हें नाश्ता कराया गया ताकि उनकी शारीरिक स्थिति में सुधार हो सके। भोजन और पानी मिलने के बाद वृद्ध व्यक्ति की तबीयत में कुछ राहत महसूस हुई।
बातचीत के दौरान यह भी पता चला कि वृद्ध व्यक्ति दिव्यांग हैं और उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उनके पास घर वापस जाने तक के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। यह जानकर धर्मेंद्र सिंह और उनकी टीम ने उनकी आगे की यात्रा की व्यवस्था करने का निर्णय लिया।
टीम ने तत्काल एक टोटो (ई-रिक्शा) बुक कराया और पिता-पुत्र दोनों को सुरक्षित उनके घर भेजने की व्यवस्था की। इतना ही नहीं, उनके पास यात्रा और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए धन नहीं होने के कारण कुछ आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई ताकि उन्हें आगे किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो मानवता और सेवा को सर्वोच्च मानते हैं। जहां अधिकांश लोग किसी अनजान व्यक्ति की परेशानी को देखकर भी अनदेखा कर देते हैं, वहीं कुछ संवेदनशील नागरिक बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते हैं।
स्थानीय लोगों ने भी इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं या अचानक बीमार होने जैसी घटनाओं में अक्सर लोग कानूनी झंझट या अन्य कारणों से मदद करने से बचते हैं। लेकिन यदि हर व्यक्ति थोड़ी संवेदनशीलता दिखाए, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है और उन्हें समय पर सहायता मिल सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मानवता की पहचान केवल बड़े-बड़े भाषणों या अभियानों से नहीं होती, बल्कि ऐसे छोटे-छोटे कार्यों से होती है जो किसी जरूरतमंद के जीवन में राहत और उम्मीद लेकर आते हैं। भूखे व्यक्ति को भोजन कराना, बीमार को सहायता देना और असहाय को उसके घर तक पहुंचाना ही वास्तविक सामाजिक सेवा है।
धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि समाज में हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आए। उन्होंने कहा कि किसी की मदद करने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि एक संवेदनशील सोच और मदद का भाव ही पर्याप्त होता है।
यह घटना न केवल मानवता की एक प्रेरक मिसाल है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि यदि हम अपने आसपास के लोगों के प्रति थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएं, तो अनेक लोगों का जीवन आसान बनाया जा सकता है। आज जब सामाजिक रिश्तों और मानवीय मूल्यों पर लगातार चर्चा हो रही है, ऐसे उदाहरण समाज में उम्मीद और विश्वास को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
मानवता, करुणा और सेवा की यह मिसाल निश्चित रूप से समाज के लिए प्रेरणादायक है तथा यह संदेश देती है कि किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान उसका मानवीय व्यवहार और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता होती है।













