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पश्चिम बंगाल

दुर्गापुर में बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा अभियान: होटल, लॉज और गेस्ट हाउस संचालकों को POCSO कानून की दी गई विस्तृत जानकारी

क्षेत्रीय संवाददाता

आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट ने आतिथ्य क्षेत्र को बनाया बाल सुरक्षा अभियान का भागीदार, संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना देने की अपील

दुर्गापुर:बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों की रक्षा और मानव तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक चुनौतियों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट ने एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। दुर्गापुर में आयोजित इस विशेष संवाद सत्र में कमिश्नरेट क्षेत्र के होटल, लॉज, गेस्ट हाउस, रिसॉर्ट तथा अन्य आतिथ्य सेवा संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य होटल एवं अतिथि सेवा क्षेत्र को “प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) अधिनियम, 2012” के प्रावधानों से अवगत कराना तथा बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराध, शोषण, मानव तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों की रोकथाम में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था।

बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों के विरुद्ध अपराध केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। होटल, लॉज और गेस्ट हाउस ऐसे स्थान हैं जहां कभी-कभी अपराधी अपनी पहचान छिपाकर ठहरने का प्रयास करते हैं। ऐसे में यदि होटल संचालक सतर्क रहें और समय रहते पुलिस को सूचना दें, तो अनेक गंभीर अपराधों को रोका जा सकता है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आतिथ्य क्षेत्र बच्चों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। किसी भी संदिग्ध परिस्थिति को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़े अपराध का कारण बन सकता है।

POCSO अधिनियम 2012 की दी गई विस्तृत जानकारी

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिनिधियों को POCSO Act, 2012 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई।

विशेष रूप से निम्न विषयों पर चर्चा की गई—

  • बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों की कानूनी परिभाषा
  • होटल संचालकों की कानूनी जिम्मेदारियां
  • संदिग्ध गतिविधियों की पहचान
  • पुलिस को सूचना देने की प्रक्रिया
  • सबूत एवं दस्तावेज सुरक्षित रखने का महत्व
  • बच्चों की पहचान एवं गोपनीयता बनाए रखने के नियम
  • मानव तस्करी से जुड़े संकेत

अधिकारियों ने बताया कि किसी भी होटल या गेस्ट हाउस में यदि कोई बच्चा संदिग्ध परिस्थितियों में पाया जाता है तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को देना कानूनन आवश्यक है।

होटल संचालकों को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान होटल उद्योग से जुड़े लोगों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।

इनमें प्रमुख रूप से कहा गया कि—

  • प्रत्येक अतिथि का वैध पहचान पत्र अवश्य लिया जाए।
  • बच्चों के साथ आने वाले व्यक्तियों की जानकारी सावधानीपूर्वक दर्ज की जाए।
  • संदिग्ध व्यवहार पर तुरंत ध्यान दिया जाए।
  • CCTV कैमरों को हमेशा कार्यशील रखा जाए।
  • होटल के रिकॉर्ड नियमित रूप से सुरक्षित रखे जाएं।
  • किसी भी असामान्य परिस्थिति में स्थानीय पुलिस को तुरंत सूचित किया जाए।

मानव तस्करी रोकने में होटल उद्योग की भूमिका

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि देशभर में कई बार मानव तस्करी के मामलों में होटल और लॉज का अस्थायी ठिकाने के रूप में उपयोग किया जाता है।

यदि होटल कर्मचारी सतर्क रहें तो—

  • बाल तस्करी
  • बाल यौन शोषण
  • जबरन मजदूरी
  • अवैध गतिविधियां

जैसे गंभीर अपराधों को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है।

इसी उद्देश्य से पुलिस ने होटल व्यवसायियों से सहयोग की अपील की।

संदिग्ध परिस्थितियों की पहचान कैसे करें

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे संकेत भी बताए जिन पर होटल कर्मचारियों को विशेष ध्यान देना चाहिए।

जैसे—

  • किसी बच्चे का भयभीत दिखाई देना।
  • बच्चे का अपनी इच्छा के विरुद्ध किसी के साथ होना।
  • बार-बार कमरा बदलने की मांग।
  • पहचान पत्र देने में अनिच्छा।
  • किसी व्यक्ति द्वारा बच्चे को बोलने से रोकना।
  • बच्चों के साथ संदिग्ध तरीके से यात्रा करना।

ऐसी किसी भी स्थिति में बिना देर किए पुलिस को सूचना देने की सलाह दी गई।

दस्तावेजों का सुरक्षित संरक्षण आवश्यक

पुलिस ने होटल संचालकों से कहा कि सभी आगंतुकों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखा जाए।

इसमें शामिल हैं—

  • पहचान पत्र
  • प्रवेश रजिस्टर
  • CCTV फुटेज
  • ऑनलाइन बुकिंग विवरण
  • भुगतान संबंधी रिकॉर्ड

ये दस्तावेज किसी भी आपराधिक जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।

पुलिस और होटल उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने की पहल

कमिश्नरेट ने कहा कि अपराध रोकने के लिए केवल पुलिस पर्याप्त नहीं है।

यदि होटल, गेस्ट हाउस और लॉज संचालक जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करें तो बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

इसी उद्देश्य से पुलिस भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।

बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने का आह्वान

कार्यक्रम के अंत में आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट ने सभी आतिथ्य सेवा संस्थानों से अपील की कि वे केवल व्यावसायिक संस्थान बनकर न रहें, बल्कि समाज के जिम्मेदार सहयोगी भी बनें।

समय पर सूचना देना, जिम्मेदार व्यवहार अपनाना और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

विशेष महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून पर्याप्त नहीं होते। उनकी प्रभावी सफलता समाज, प्रशासन, पुलिस और निजी संस्थानों के संयुक्त सहयोग पर निर्भर करती है।

POCSO Act बच्चों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन उसकी वास्तविक सफलता तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक संस्था अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझे।

दुर्गापुर में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम केवल एक औपचारिक बैठक नहीं था, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सामुदायिक भागीदारी को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी। होटल, लॉज और गेस्ट हाउस संचालकों को कानून की जानकारी देकर पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बाल सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

यदि प्रत्येक आतिथ्य सेवा संस्थान सतर्कता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करे तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की समय पर सूचना पुलिस को दे, तो बाल शोषण, मानव तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों की रोकथाम में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है। बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण का निर्माण तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस अभियान का सक्रिय सहभागी बने।

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