करीब दो दशक बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन, नंदन में हुआ भव्य स्वागत
बंगाल सरकार के मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा – तसलीमा की वापसी साहित्य, संस्कृति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सम्मान का प्रतीक

कोलकाता I क्षेत्रीय संवाददाता : लगभग दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका एवं सामाजिक चिंतक तसलीमा नसरीन एक बार फिर कोलकाता पहुंचीं। शहर के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र नंदन में आयोजित उनके कविता पाठ कार्यक्रम ने साहित्य, संस्कृति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई चर्चा छेड़ दी। यह आयोजन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि विचारों की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन का भी प्रतीक बन गया।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने तसलीमा नसरीन की वापसी का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर भावनात्मक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि लगभग दो दशक बाद बंगाल की धरती पर तसलीमा नसरीन का लौटना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक क्षण है।
अग्निमित्रा पॉल ने अपने संदेश में लिखा कि नंदन में आयोजित तसलीमा नसरीन के “फेरा” कविता पाठ कार्यक्रम को केवल एक साहित्यिक आयोजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह कार्यक्रम साहित्य, संस्कृति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति बंगाल की गहरी आस्था और सम्मान को भी दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि तसलीमा नसरीन का साहित्य समाज में व्याप्त रूढ़ियों, कट्टरता और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों को सामने लाता रहा है। उनके लेखन ने विश्वभर में बहस और विमर्श को जन्म दिया है। ऐसे में उनका कोलकाता लौटना साहित्यिक जगत के लिए विशेष महत्व रखता है।
‘फेरा’ कविता पाठ बना चर्चा का केंद्र
नंदन में आयोजित कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों, बुद्धिजीवियों, लेखकों और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान तसलीमा नसरीन ने अपनी चर्चित रचनाओं का पाठ किया और श्रोताओं से संवाद भी किया। उनकी कविताओं में मानवीय संवेदनाएं, सामाजिक समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे विषय प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने लंबे समय बाद तसलीमा नसरीन को कोलकाता में देखकर खुशी व्यक्त की। कई साहित्य प्रेमियों ने इसे बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा और खुले विचारों की पहचान बताया।

लगभग दो दशक पहले छोड़ना पड़ा था कोलकाता
तसलीमा नसरीन कई वर्षों तक कोलकाता में रहीं, लेकिन वर्ष 2007 में उनके खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था। उसके बाद से उनका कोलकाता आना लगभग बंद हो गया था।
करीब दो दशक बाद सार्वजनिक रूप से उनकी वापसी को साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर फिर हुई चर्चा
तसलीमा नसरीन की वापसी के साथ एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लेखकों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर बहस तेज हो गई है। कई साहित्यकारों का मानना है कि विचारों से असहमति लोकतंत्र का हिस्सा हो सकती है, लेकिन किसी लेखक को अपनी बात रखने का अवसर मिलना भी उतना ही आवश्यक है।
हालांकि इस विषय पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक विचार भी सामने आते रहे हैं। तसलीमा नसरीन के लेखन को लेकर अतीत में समर्थन और विरोध—दोनों प्रकार की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।
अग्निमित्रा पॉल ने दी शुभकामनाएं
अपने संदेश के अंत में अग्निमित्रा पॉल ने तसलीमा नसरीन का बंगाल में स्वागत करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं तथा ऐसे आयोजनों से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।
उन्होंने लिखा कि तसलीमा नसरीन की यह वापसी साहित्य, संस्कृति और विचारों की स्वतंत्रता के प्रति सम्मान का एक महत्वपूर्ण अवसर है और इसके लिए उन्हें हार्दिक स्वागत, शुभकामनाएं एवं बधाई।













