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आंदोलन

निरसा–जामताड़ा रोड के फुटपाथ दुकानदारों ने पुनर्वास की उठाई मांग, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

1998 से विस्थापन का दर्द झेल रहे दुकानदारों ने कहा– पहले पुनर्वास, फिर हटाने की कार्रवाई; जिला प्रशासन से स्थायी समाधान की अपील

निरसा-धनबाद I रिपोर्ट-सरबजीत सिंह : निरसा–जामताड़ा रोड के किनारे वर्षों से व्यवसाय कर रहे फुटपाथ दुकानदारों ने अपने पुनर्वास की मांग को लेकर धनबाद उपायुक्त को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में दुकानदारों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि सड़क चौड़ीकरण अथवा अन्य विकास कार्यों के कारण यदि उन्हें हटाया जाता है तो पहले उनके लिए स्थायी एवं सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन के अनुसार, निरसा–जामताड़ा रोड के किनारे बसे सैकड़ों छोटे दुकानदार वर्षों से अपना रोजगार चला रहे हैं। समय-समय पर सड़क चौड़ीकरण एवं अन्य विकास परियोजनाओं के कारण उन्हें विस्थापन का सामना करना पड़ता रहा है। दुकानदारों का कहना है कि वे वर्ष 1998 से ही पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

दुकानदारों ने बताया कि वर्ष 2010 में जिला परिषद द्वारा लगभग 160 दुकानों के निर्माण की योजना स्वीकृत की गई थी, ताकि विस्थापित दुकानदारों को व्यवस्थित तरीके से बसाया जा सके। हालांकि, अंचल स्तर पर आपत्ति उत्पन्न होने के कारण यह योजना अधूरी रह गई और आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2010 में ही यह स्पष्ट हो गया था कि जिस भूमि पर दुकानों का निर्माण प्रस्तावित था, वह जिला परिषद की भूमि नहीं है। इसके बावजूद वर्षों बीत जाने के बाद भी पुनर्वास की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट लगातार बना हुआ है।

दुकानदारों ने प्रशासन के समक्ष रखे प्रमुख सुझाव

ज्ञापन में दुकानदारों ने प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए हैं—

पहला, यदि जिला प्रशासन सभी दुकानदारों का सर्वेक्षण कर उनकी दुकानों की मापी करते हुए एक नियोजित बाजार विकसित करता है, तो इससे सरकार को नियमित राजस्व प्राप्त होगा और अव्यवस्थित अतिक्रमण की समस्या भी समाप्त होगी।

दूसरा, सभी दुकानदारों का जीवन और उनके परिवार की आजीविका इन्हीं दुकानों पर निर्भर है। इसलिए पुनर्वास के बिना हटाने की कार्रवाई से अनेक परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। स्थायी पुनर्वास रोजगार सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

तीसरा, यदि सभी दुकानदारों को एक व्यवस्थित परिसर में स्थान दिया जाता है तो बाजार की सुंदरता बढ़ेगी, यातायात व्यवस्था बेहतर होगी तथा आम नागरिकों को भी सुविधाजनक खरीदारी का लाभ मिलेगा।

‘पहले पुनर्वास, फिर विस्थापन’ की मांग

दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। सड़क चौड़ीकरण, यातायात सुधार एवं शहर के विकास के लिए प्रशासन जो भी निर्णय ले, उसका वे सम्मान करते हैं। लेकिन उनकी मांग है कि किसी भी कार्रवाई से पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि उनका रोजगार प्रभावित न हो।

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानों को हटाया जाता है तो सैकड़ों परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा। ऐसे में प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पहले पुनर्वास सुनिश्चित करे।

प्रशासन से मानवीय पहल की अपील

दुकानदारों ने उपायुक्त से अनुरोध किया कि वे इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करें तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शीघ्र समाधान निकालें। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित इस समस्या का स्थायी समाधान होने से न केवल दुकानदारों को राहत मिलेगी, बल्कि शहर में सुव्यवस्थित बाजार व्यवस्था भी विकसित होगी।

ज्ञापन में यह भी आग्रह किया गया कि जिला प्रशासन, जिला परिषद, अंचल कार्यालय तथा अन्य संबंधित विभाग संयुक्त रूप से सर्वेक्षण कर दुकानदारों की वास्तविक संख्या एवं आवश्यकता का आकलन करें तथा उसी आधार पर पुनर्वास योजना तैयार करें।

कई अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि

ज्ञापन की प्रतिलिपि अपर समाहर्ता (भू-राजस्व), अनुमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, जिला परिषद अध्यक्ष तथा अंचल अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है, ताकि मामले पर समन्वित स्तर पर कार्रवाई हो सके।

स्थायी समाधान की उम्मीद

दुकानदारों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते पुनर्वास की दिशा में सकारात्मक पहल करता है तो वर्षों पुरानी समस्या का समाधान निकल सकता है। इससे विकास कार्य भी बिना किसी विवाद के पूरे होंगे और छोटे व्यापारियों की आजीविका भी सुरक्षित रह सकेगी।

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि शहर के विकास और गरीब दुकानदारों के हितों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि योजनाबद्ध तरीके से बाजार विकसित किया जाता है तो यातायात व्यवस्था, सौंदर्यीकरण और व्यापार—तीनों को लाभ मिलेगा।

फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। फुटपाथ दुकानदारों को उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी पुनर्वास की मांग पर इस बार गंभीरता से विचार किया जाएगा और उन्हें सम्मानजनक एवं स्थायी व्यापारिक स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

बैठक में रहे मौजूद

इस अवसर पर फुटपाथ दुकानदार संघ के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से मोहम्मद हुसैन, ब्रह्मदेव वर्मा, सुरेश राम, राम केवल साव, दीपक वर्मन, मोहन गिरी, देवाशीष भारती, राजा राम, मंजूर आलम, विनोद गुप्ता, कृष्ण राम, लाला गिरी, मित्तू कुमार यादव, उत्तम बनर्जी, अशोक पासवान, शिवाशिष भारती, भगत (बुक हाउस), विकास मंडल, मोहम्मद मन्नान, सुदेश बर्मन तथा अशोक साव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय फुटपाथ दुकानदार उपस्थित रहे।

सभी ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की कि किसी भी प्रकार की हटाने की कार्रवाई से पूर्व सभी प्रभावित दुकानदारों का सम्मानजनक एवं स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी परिवार की आजीविका प्रभावित न हो।

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