कटाव की चपेट में सेमरडीह-बिरहोर कॉलोनी सड़क, गार्डवाल नहीं बनने से हर दिन हादसे का खतरा
नूतन कच्छप

किस्को-लोहरदगा: लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खरकी स्थित सेमरडीह-बिरहोर कॉलोनी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इन दिनों नदी के तेज कटाव की चपेट में है। लगातार हो रहे कटाव के कारण सड़क का किनारा नदी में समाता जा रहा है, जिससे यह मार्ग राहगीरों, स्कूली बच्चों और मवेशियों के लिए जोखिमभरा बन गया है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से इस स्थान पर गार्डवाल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क के किनारे सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण अब तक कई मवेशी नदी में गिरकर अपनी जान गंवा चुके हैं। पशुपालकों में हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और बरसात के मौसम में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या से सांसद, विधायक और जिला प्रशासन को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन वर्षों बाद भी गार्डवाल निर्माण की दिशा में कोई पहल नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
यह सड़क सेमरडीह बिरहोर कॉलोनी सहित आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण, किसान और मवेशी इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। सड़क के किनारे लगातार बढ़ते कटाव के कारण हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

सबसे अधिक चिंता स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय सेमरडीह तथा किस्को प्रखंड मुख्यालय के आसपास स्थित विभिन्न विद्यालयों में पढ़ने वाले दर्जनों छात्र-छात्राएं प्रतिदिन इसी कटावग्रस्त सड़क से होकर स्कूल आते-जाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजते समय हर दिन किसी अनहोनी की चिंता बनी रहती है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बरसात के मौसम को देखते हुए इस सड़क का तत्काल निरीक्षण कराया जाए तथा सड़क किनारे मजबूत गार्डवाल एवं अन्य सुरक्षा उपायों का निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब लोगों की सुरक्षा से जुड़ी बुनियादी समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित किया जाए।












