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पश्चिम बंगाल

शहीद आरपीएफ इंस्पेक्टर ओम प्रकाश मीणा को भावभीनी श्रद्धांजलि,

संपादकीय

कोलकाता-नई दिल्ली: देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के शहीद निरीक्षक ओम प्रकाश मीणा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 28 जून 2026 को नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक परिसर में एक गरिमामयी स्मृति समारोह आयोजित किया गया। यह समारोह न केवल एक वीर सपूत के अद्वितीय साहस को सम्मानित करने का अवसर बना, बल्कि पूरे रेलवे परिवार और देश की ओर से उनके सर्वोच्च बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भावनात्मक क्षण भी रहा।

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देउस्कर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों, आरपीएफ के वरिष्ठ पदाधिकारियों तथा शहीद के परिजनों ने भाग लिया। समारोह के दौरान पूरे वातावरण में सम्मान, गर्व और भावुकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

पूर्व रेलवे ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

पूर्व रेलवे की ओर से प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त ए.एन. सिन्हा ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद निरीक्षक ओम प्रकाश मीणा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि निरीक्षक मीणा ने अपने कर्तव्य के प्रति जिस साहस, निष्ठा और ईमानदारी का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

उन्होंने कहा कि आरपीएफ अपने इस वीर अधिकारी के योगदान को कभी नहीं भूलेगा। उनका बलिदान संगठन के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव अंकित रहेगा और प्रत्येक जवान को राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता रहेगा।

परिजनों को सौंपा गया राष्ट्रीय पुलिस स्मारक सम्मान

समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया जब शहीद निरीक्षक ओम प्रकाश मीणा के परिवार को पूरे सम्मान और गरिमा के साथ राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की स्मृति-चिन्ह भेंट की गई।

यह सम्मान उनकी पत्नी श्रीमती ललिता मीणा, उनके ससुर राम सुख मीणा तथा उनकी पुत्री दीक्षा मीणा ने प्राप्त किया। पूरे समारोह के दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। यह केवल एक स्मृति-चिन्ह नहीं था, बल्कि उस राष्ट्र की ओर से श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक था, जिसकी सुरक्षा के लिए एक वीर जवान ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया।

कर्तव्य निभाते हुए दिया सर्वोच्च बलिदान

दिवंगत निरीक्षक ओम प्रकाश मीणा ने 24 नवंबर 2025 को पश्चिम बंगाल के अजीमगंज क्षेत्र में आरपीएफ टीम के साथ एक महत्वपूर्ण छापेमारी एवं जांच अभियान का नेतृत्व करते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया। अभियान के दौरान उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

उनकी बहादुरी, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा को आरपीएफ के अधिकारी एवं सहकर्मी आज भी गर्व के साथ याद करते हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि राष्ट्रहित और नागरिकों की सुरक्षा के लिए समर्पित सुरक्षा बलों के जवान हर परिस्थिति में अपने दायित्व को सर्वोपरि मानते हैं।

बलिदान की अमर गाथा

समारोह में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि शहीद निरीक्षक मीणा ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि सच्चा कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी वही होता है जो संकट की घड़ी में पीछे हटने के बजाय राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर देता है।

उनका बलिदान केवल आरपीएफ के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का संदेश देती रहेगी।

परिवार के साथ सदैव खड़ा रहेगा रेलवे परिवार

समारोह के दौरान अधिकारियों ने शहीद के परिजनों को आश्वस्त किया कि पूर्व रेलवे और रेलवे सुरक्षा बल उनके परिवार के साथ हर परिस्थिति में खड़ा रहेगा। शहीद के परिवार का सम्मान और उनकी हर संभव सहायता संगठन की प्राथमिकता रहेगी।

अधिकारियों ने कहा कि देश अपने वीर सपूतों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता। ऐसे परिवारों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक और संस्था का नैतिक दायित्व है।

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने व्यक्त की श्रद्धांजलि

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि निरीक्षक ओम प्रकाश मीणा का बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा के पीछे अनेक वीर जवानों का त्याग और समर्पण छिपा होता है।

उन्होंने कहा कि शहीद की वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति सदैव प्रेरणा देती रहेगी। उनका नाम आरपीएफ के इतिहास में सम्मान और गौरव के साथ लिया जाएगा।

राष्ट्र सदैव रहेगा ऋणी

राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर आयोजित यह समारोह केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस अटूट संकल्प का प्रतीक भी था कि देश अपने शहीदों और उनके परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहेगा।

निरीक्षक ओम प्रकाश मीणा का जीवन और उनका सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, सेवा और समर्पण की अमर मिसाल रहेगा। उनका नाम सदैव उन वीर सपूतों की श्रेणी में सम्मानपूर्वक लिया जाएगा जिन्होंने राष्ट्रहित को अपने जीवन से भी ऊपर रखा।

“शहीद कभी मरते नहीं, वे अपने साहस, कर्तव्य और बलिदान के माध्यम से सदैव राष्ट्र की चेतना में जीवित रहते हैं।”

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