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पश्चिम बंगाल

ईसीएल ने भूमिगत कोयला गैसीकरण तकनीक की दिशा में बढ़ाया बड़ा कदम

सरबजीत सिंह

सक्तोड़िया-आसनसोल: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कोयला संसाधनों के आधुनिक एवं सतत उपयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने भूमिगत कोयला गैसीकरण (Underground Coal Gasification – UCG) तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में ईसीएल मुख्यालय में यूसीजी एवं इसके डाउनस्ट्रीम उपयोगों पर आधारित एक अत्याधुनिक कार्यशील प्रदर्शन मॉडल का उद्घाटन ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) श्री सतीश झा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर ईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) श्री गुंजन कुमार सिन्हा, कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, विभागाध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। विकसित किया गया यह प्रदर्शन मॉडल भूमिगत कोयला गैसीकरण की वैज्ञानिक प्रक्रिया, इसकी कार्यप्रणाली तथा भविष्य में इसके औद्योगिक उपयोग की संभावनाओं को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएमडी श्री सतीश झा ने कहा कि भूमिगत कोयला गैसीकरण भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी तकनीक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी मात्रा में ऐसे कोयला भंडार मौजूद हैं जो अत्यधिक गहराई में स्थित होने के कारण पारंपरिक खनन तकनीकों से निकाले नहीं जा सकते। यूसीजी तकनीक इन अप्रयुक्त संसाधनों को ऊर्जा और औद्योगिक उपयोग के लिए मूल्यवान उत्पादों में बदलने की क्षमता रखती है।

उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में यूसीजी जैसी उन्नत तकनीकें भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यह तकनीक न केवल ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी बल्कि देश के विशाल कोयला भंडारों के स्वच्छ और कुशल उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।

श्री झा ने आगे कहा कि झारखंड के कास्ता वेस्ट कोल ब्लॉक में संचालित की जा रही यूसीजी पायलट परियोजना के सफल परिणाम भारत में कोयला उपयोग की नई संभावनाओं का द्वार खोल सकते हैं। इससे विद्युत उत्पादन, उर्वरक उद्योग, रसायन निर्माण, सिंथेटिक ईंधन उत्पादन और भविष्य की हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इसे भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

उद्घाटित मॉडल में भूमिगत कोयले को गैसीकृत कर सिंथेटिक गैस (सिंगैस) में परिवर्तित करने की पूरी प्रक्रिया का दृश्यात्मक प्रदर्शन किया गया है। साथ ही यह भी दिखाया गया है कि इस सिंगैस का उपयोग बिजली उत्पादन, रासायनिक उद्योगों तथा अन्य ऊर्जा आधारित क्षेत्रों में किस प्रकार किया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यूसीजी तकनीक के कई पर्यावरणीय और परिचालन लाभ हैं। इसमें सतह पर खनन गतिविधियों की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे भूमि क्षरण और पर्यावरणीय प्रभाव न्यूनतम रहता है। इसके अलावा, खदानों में कार्यरत श्रमिकों के लिए जोखिम भी कम हो जाता है तथा गहरे कोयला भंडारों का आर्थिक रूप से उपयोग संभव हो पाता है।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना कोल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पहल के अंतर्गत संचालित की जा रही है। इसका संयुक्त क्रियान्वयन ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) द्वारा किया जा रहा है। वहीं कनाडा की प्रतिष्ठित तकनीकी कंपनी ERGO Exergy Technologies Inc. इस परियोजना को तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों में यूसीजी तकनीक की तकनीकी एवं आर्थिक व्यवहार्यता को स्थापित करना है, ताकि भविष्य में इसके वाणिज्यिक उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत हो सकती है।

ईसीएल प्रबंधन का मानना है कि यह प्रदर्शन मॉडल केवल एक तकनीकी प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ज्ञान-साझाकरण और नवाचार को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। इससे कर्मचारियों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों को नई पीढ़ी की कोयला प्रौद्योगिकियों को समझने और उनके संभावित लाभों का आकलन करने का अवसर मिलेगा।

ईसीएल की यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि कंपनी केवल पारंपरिक कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि आधुनिक, स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा समाधानों के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। भूमिगत कोयला गैसीकरण परियोजना और उससे जुड़े प्रदर्शन मॉडल का उद्घाटन भारतीय कोयला उद्योग को भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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