निरसा में भाकपा माले की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न, लोकतंत्र और जनसंघर्ष के मुद्दों पर बनी व्यापक रणनीति
सरबजीत सिंह-संवाददाता

निरसा-झारखंड : निरसा स्थित भाकपा माले कार्यालय में 6 मई को पार्टी की निरसा विधानसभा स्तरीय जिला कमिटी सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों, हाल ही में सम्पन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम, संगठनात्मक विस्तार, जन आंदोलनों की दिशा तथा पार्टी नेताओं पर बढ़ते हमलों जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा जनसंगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया और आने वाले दिनों के लिए संघर्ष तथा संगठन को मजबूत करने की रणनीति तैयार की गई।
बैठक में मुख्य रूप से भाकपा माले के राज्य स्थायी समिति सदस्य कॉमरेड कार्तिक प्रसाद उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन निरसा विधानसभा संयोजक कॉमरेड आगम राम ने किया। बैठक के दौरान राजनीतिक हालात पर गहन विचार-विमर्श हुआ और देश की मौजूदा परिस्थितियों को लोकतंत्र एवं संविधान के लिए गंभीर चुनौती बताया गया।
बैठक में वक्ताओं ने हाल ही में बंगाल समेत पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों पर चर्चा करते हुए कहा कि चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर चुनावी जीत हासिल की है। नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर जैसे मुद्दों को बहाना बनाकर चुनाव आयोग सहित विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई है।
भाकपा माले नेताओं ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाओं पर दबाव डालकर सत्ता पक्ष अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाली ताकतों तथा सभी विपक्षी दलों के लिए यह समय गंभीर चिंतन का है।
बैठक में यह भी कहा गया कि देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों से जनता परेशान है, लेकिन सरकार इन मूलभूत समस्याओं से ध्यान हटाकर राजनीतिक ध्रुवीकरण करने में लगी हुई है। नेताओं ने आरोप लगाया कि जनहित के सवालों को दबाने के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमला किया जा रहा है।
संगठनात्मक विस्तार के मुद्दे पर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने निर्णय लिया कि सदस्यता नवीकरण अभियान को तेज गति से चलाया जाएगा और 15 मई तक शाखा तथा लोकल कमिटियों के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। नेताओं ने कहा कि मजबूत संगठन ही जनसंघर्षों की सबसे बड़ी ताकत होता है और जनता के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना आवश्यक है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पार्टी के शिक्षण-प्रशिक्षण शिविरों में छात्र, नौजवान और महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। नेताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को वैचारिक रूप से मजबूत बनाना समय की मांग है। इसके लिए युवाओं और महिलाओं को संगठन की गतिविधियों में अधिक से अधिक शामिल करने पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के सामने रोजगार का संकट सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। शिक्षित बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सरकार रोजगार सृजन में विफल साबित हो रही है। ऐसे में छात्र-नौजवानों को संगठित कर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करना जरूरी है। महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए नेताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही आंदोलन मजबूत होगा।
बैठक में जन मुद्दों पर व्यापक जन आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया। नेताओं ने कहा कि बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और मजदूर अधिकार जैसे सवालों पर जनता के बीच लगातार संघर्ष तेज किया जाएगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आम लोगों की समस्याओं को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
भाकपा माले नेताओं ने कहा कि झारखंड में खनन क्षेत्रों के मजदूरों, विस्थापित परिवारों, किसानों और गरीब तबकों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। सरकार और प्रशासन आम जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में जनसंघर्षों को और अधिक व्यापक बनाने की जरूरत है।
बैठक के दौरान हाल ही में माले जिला सचिव कॉमरेड बिन्दा पासवान के आवास पर हुए गोली-बम हमले और डकैती की घटना की कड़ी निंदा की गई। नेताओं ने इस घटना को लोकतांत्रिक ताकतों को डराने और जन आंदोलनों को कमजोर करने की साजिश बताया। बैठक में कहा गया कि बीती रात हुए इस हमले ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पार्टी नेताओं ने जिला प्रशासन से मांग की कि इस घटना में शामिल सभी अपराधियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन शीघ्र कार्रवाई नहीं करता है तो भाकपा माले व्यापक जन आंदोलन चलाने को मजबूर होगी और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी।
बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े लोगों पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक माहौल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अपराध और राजनीतिक संरक्षण के गठजोड़ के खिलाफ जनता को एकजुट करना आवश्यक है।
कॉमरेड कार्तिक प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को बचाने के लिए व्यापक जनएकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा केवल चुनावी राजनीति से संभव नहीं है, बल्कि जनता के बीच लगातार संघर्ष और संगठन निर्माण से ही यह लड़ाई मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि भाकपा माले हमेशा गरीबों, मजदूरों, किसानों, छात्रों और शोषित वर्गों की आवाज उठाती रही है और आने वाले समय में भी जनहित के सवालों पर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और मोहल्लों तक पहुंचकर लोगों की समस्याओं को समझने और उन्हें आंदोलन से जोड़ने की अपील की।
बैठक में यह भी कहा गया कि वर्तमान समय में विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की है। नेताओं ने कहा कि जनता के अधिकारों को बचाने के लिए सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।
भाकपा माले नेताओं ने कहा कि देश में बढ़ती आर्थिक असमानता और सामाजिक तनाव को लेकर जनता के बीच नाराजगी बढ़ रही है। महंगाई के कारण गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। खाद्य पदार्थों, गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम लोगों का जीवन कठिन होता जा रहा है।
बैठक में यह भी कहा गया कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं का निजीकरण गरीबों को और अधिक संकट में डाल रहा है। सरकारी संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है जबकि निजी कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे सामाजिक असमानता और बढ़ रही है।
नेताओं ने कहा कि मजदूरों और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक संघर्ष की जरूरत है। खनन क्षेत्रों में मजदूरों की स्थिति चिंताजनक बताई गई और कहा गया कि श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा, उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही है। विस्थापन और पर्यावरणीय समस्याओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई।
बैठक में पार्टी के विस्तार और संगठन को मजबूत करने के लिए विभिन्न समितियों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाने, युवाओं को जोड़ने और गांव स्तर तक पार्टी संरचना को सक्रिय करने पर सहमति बनी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर लोकतंत्र, संविधान और जन अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज को दबाने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।
बैठक में टुनटुन मुखर्जी, बादल चन्द्र बाउरी, श्रीकांत सिंह, संतू चटर्जी, नागेन्द्र कुमार, हरेंद्र सिंह, मनोरंजन मलिक, मन्नू सिंह, स्वप्न गोराई, बी के सिंह, अमरेश चक्रवर्ती, नामिता महतो, जगदीश शर्मा, बीपीन मंडल, इश्वरी सोरेन, सुरेश दास, रोशन मिश्रा सहित कई अन्य नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक का समापन संगठन को मजबूत बनाने, जनता के सवालों पर संघर्ष तेज करने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर आंदोलन चलाने के संकल्प के साथ हुआ।












