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झारखण्ड

राँची में विश्व मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

संपादकीय

राँची: विश्व मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन दिवस के अवसर पर राँची जिला प्रशासन द्वारा समाहरणालय ब्लॉक-बी सभागार में एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो” रखी गई, जिसका उद्देश्य मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक वर्जनाओं को समाप्त करना तथा किशोरियों एवं बालिकाओं में स्वच्छता, स्वास्थ्य और जागरूकता को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त राँची संजय भगत, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती सुरभि सिंह, कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की छात्राएं एवं शिक्षिकाएं, महिला पर्यवेक्षिकाएं, सीडीपीओ तथा अन्य संबंधित जिला पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि मासिक धर्म महिलाओं के जीवन की एक स्वाभाविक एवं प्राकृतिक प्रक्रिया है। इससे जुड़ी भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान पहली बार मासिक धर्म का अनुभव करने वाली किशोरियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया तथा उन्हें हाइजीन एवं पोषण किट प्रदान की गई।

महिलाओं और किशोरियों की स्वच्छता संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले के सभी कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों के लिए 16 सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, कांके को एक सैनिटरी नैपकिन डिस्पोजर मशीन भी प्रदान की गई।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी छात्राओं और बालिकाओं को महावारी स्वच्छता की शपथ दिलाई गई। साथ ही उन्हें सैनिटरी नैपकिन पैड वितरित कर मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।

मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से कस्तुरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं के बीच स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

जिला प्रशासन ने कहा कि महिलाओं एवं बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले की प्रत्येक किशोरी को मासिक धर्म से संबंधित सही जानकारी, स्वच्छता संबंधी सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों, ताकि वे स्वस्थ एवं आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जी सकें।

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