मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मीडिया एवं संचार अधिकारियों को दिए पारदर्शी चुनाव प्रबंधन के मंत्र
संपादकीय

IIIDEM में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बोले— लोकतंत्र की मजबूती के लिए सटीक सूचना और प्रभावी संवाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने देशभर से आए अधिकारियों को संबोधित करते हुए स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया में मीडिया और जनसंचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। यह सम्मेलन इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM), नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
सम्मेलन का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मीडिया एवं संचार अधिकारियों को बदलते डिजिटल परिवेश, सोशल मीडिया की चुनौतियों, फेक न्यूज की रोकथाम तथा मतदाता जागरूकता अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षित करना था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए वरिष्ठ मीडिया एवं जनसंपर्क अधिकारियों ने भाग लिया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र की सफलता केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाताओं तक सही, समयबद्ध और प्रमाणिक जानकारी पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मीडिया एवं संचार अधिकारी निर्वाचन आयोग और आम जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं। इसलिए प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह चुनाव संबंधी सूचनाओं का त्वरित, पारदर्शी और तथ्यात्मक प्रसार सुनिश्चित करे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सूचना प्रसार के सबसे प्रभावशाली माध्यम बन चुके हैं। ऐसे समय में गलत सूचना (Misinformation), दुष्प्रचार (Disinformation) और फर्जी खबरों (Fake News) से प्रभावी ढंग से निपटना निर्वाचन आयोग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए मीडिया अधिकारियों को तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।
निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता उसकी निष्पक्ष कार्यप्रणाली और पारदर्शी संवाद व्यवस्था पर आधारित है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान प्रत्येक सूचना की प्रमाणिकता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि मतदाताओं में किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न न हो।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे मतदाता जागरूकता अभियान (SVEEP) को और अधिक प्रभावी बनाएं तथा युवाओं, महिलाओं, दिव्यांग मतदाताओं एवं पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों तक आयोग की योजनाओं और संदेशों को सरल एवं प्रभावी भाषा में पहुंचाएं।
सम्मेलन के दौरान चुनावी संचार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत प्रस्तुतियां भी दी गईं। इनमें डिजिटल मीडिया प्रबंधन, सोशल मीडिया रणनीति, संकट के समय प्रभावी संचार, मीडिया समन्वय, प्रेस प्रबंधन, तथ्य आधारित सूचना प्रसार तथा चुनाव संबंधी अफवाहों की पहचान और रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भारत निर्वाचन आयोग लगातार तकनीक आधारित संचार प्रणाली को मजबूत कर रहा है ताकि चुनाव प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
सम्मेलन में अधिकारियों को चुनाव के दौरान मीडिया से बेहतर समन्वय स्थापित करने, प्रेस ब्रीफिंग को अधिक प्रभावी बनाने, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय उपस्थिति बनाए रखने तथा निर्वाचन आयोग की आधिकारिक सूचनाओं को प्राथमिकता के साथ प्रसारित करने के संबंध में भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए।
विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में सूचना का प्रसार पहले की तुलना में कई गुना तेज हो गया है। ऐसे में किसी भी गलत सूचना का समय रहते खंडन करना और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सम्मेलन के दौरान अधिकारियों के साथ संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा चुनावी संचार से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। अधिकारियों ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, मीडिया समन्वय और मतदाता जागरूकता अभियानों से जुड़े नवाचारों की जानकारी भी साझा की।
भारत निर्वाचन आयोग ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों को और अधिक पारदर्शी, सहभागी एवं तकनीक-सक्षम बनाने के लिए मीडिया एवं संचार तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। आयोग का लक्ष्य प्रत्येक मतदाता तक सही सूचना समय पर पहुंचाना तथा चुनाव प्रक्रिया के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत करना है।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों से अपील की गई कि वे निष्पक्षता, पारदर्शिता और पेशेवर आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करते हुए लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। सम्मेलन में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने चुनावी संचार व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, उत्तरदायी तथा आधुनिक बनाने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।













