प्राप्त जानकारी के अनुसार, 18 जून 2026 की सुबह करीब 2:30 बजे रामकनाली फीडर से जयपुर कोलियरी जाने वाली 33 केवी विद्युत लाइन के अंतर्गत स्थापित चार पीएससी पोल क्षतिग्रस्त पाए गए। विभागीय जांच में यह आशंका व्यक्त की गई है कि M/s STD-SVEC (JV) के कार्य में लगे भारी वाहनों एवं मशीनरी के संचालन के दौरान हुई लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई।
घटना की सूचना मिलते ही विद्युत विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षतिग्रस्त पोलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई पोल झुक गए हैं तथा कुछ संरचनाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसके कारण रामकनाली विद्युत शक्ति उपकेंद्र से संचालित 11 केवी परासी फीडर की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बिजली संकट उत्पन्न हो गया।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस घटना से झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड को लगभग 5 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। साथ ही विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों और श्रमबल की भी आवश्यकता पड़ी।
अपने आवेदन में सहायक विद्युत अभियंता ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों एवं संबंधित एजेंसी के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। आवेदन में M/s STD-SVEC (JV), H. No. 8-2-293/82/He/78-79, Flat No. 302, Block-A, Fortune Exotic Apartments, Road No. 69, Jubilee Hills, Shaikpet, Hyderabad, Telangana का उल्लेख करते हुए मामले की जांच और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक और निर्माण कार्यों के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही से पहले सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि समय रहते उचित सावधानी बरती जाती तो विद्युत ढांचे को नुकसान से बचाया जा सकता था।
विशेषज्ञों का भी कहना है कि बिजली के पोल और उच्च वोल्टेज लाइनें सार्वजनिक संपत्ति होने के साथ-साथ जनसुरक्षा से भी जुड़ी होती हैं। ऐसी घटनाएं न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि बड़े हादसों का कारण भी बन सकती हैं।
फिलहाल मामले को लेकर विभाग द्वारा पुलिस प्रशासन से आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस द्वारा आवेदन के आधार पर जांच शुरू किए जाने की संभावना है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर विकास परियोजनाओं और सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय तथा सुरक्षा मानकों के सख्ती से पालन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों और विभागीय अधिकारियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है।
