कोयलांचल में CISF का बड़ा एक्शन, 53.91 टन अवैध कोयला जब्त
16 ठिकानों पर संयुक्त छापेमारी, अवैध मुहाना बंद; कोयला चोरी और अवैध खनन के खिलाफ अभियान जारी

धनबाद। क्षेत्रीय संवाददाता : कोयलांचल में कोयला चोरी, अवैध खनन, अवैध भंडारण और गैरकानूनी परिवहन के खिलाफ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने कार्रवाई तेज कर दी है। भारत सरकार की “Zero Coal Leakage Tolerance Policy” के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत CISF यूनिट, BCCL धनबाद ने बीसीसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर व्यापक संयुक्त अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान अलग-अलग इलाकों में 16 स्थानों पर छापेमारी की गई और दो स्थानों से कुल 53.91 टन अवैध रूप से संग्रहित कोयला बरामद किया गया।
CISF की ओर से 26 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण, विधिसम्मत और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप की गई। बरामद कोयले को नियमानुसार जब्त करते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कार्रवाई के दौरान एक अवैध मुहाना (Rat Hole) भी मिला, जिसे डोजिंग के माध्यम से पूरी तरह बंद कर दिया गया।
16 जगहों पर एक साथ कार्रवाई
कोयला क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए चलाए गए इस अभियान में CISF, BCCL प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय देखने को मिला। अभियान का उद्देश्य केवल अवैध रूप से जमा कोयले को जब्त करना नहीं था, बल्कि उन स्थानों की पहचान करना भी था जहां से कोयला चोरी या अवैध खनन की गतिविधियों को संचालित किए जाने की आशंका थी।
अभियान के दौरान कुल 16 स्थानों पर छापेमारी की गई। तलाशी के दौरान दो अलग-अलग स्थानों से बड़ी मात्रा में अवैध कोयला बरामद हुआ। अधिकारियों के अनुसार, बरामद कोयले को नियमानुसार जब्त कर लिया गया है और संबंधित मामलों में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इस कार्रवाई से कोयला चोरी और अवैध खनन से जुड़े लोगों के बीच चिंता बढ़ने की संभावना है। वहीं सुरक्षा एजेंसियों का संदेश स्पष्ट है कि राष्ट्रीय संपत्ति से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महुदियारा फॉरेस्ट में करीब 53 टन कोयला बरामद
CISF के अनुसार, अभियान के तहत एरिया-02 के महुदियारा फॉरेस्ट क्षेत्र में विश्वसनीय सूचना के आधार पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान यहां से लगभग 53 टन अवैध कोयला बरामद किया गया।
इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की बरामदगी को अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों ने बरामद कोयले को कब्जे में लेकर नियमानुसार आगे की प्रक्रिया शुरू की। इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध रूप से संग्रहित कोयले को हटाने के साथ-साथ ऐसे नेटवर्क पर दबाव बनाना भी है जो कथित तौर पर कोयले की चोरी, अवैध भंडारण या परिवहन से जुड़े हो सकते हैं।
कोयलांचल में कोयला चोरी लंबे समय से सुरक्षा और प्रशासन के लिए चुनौती रही है। ऐसे में बड़ी मात्रा में अवैध कोयले की बरामदगी यह भी दर्शाती है कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और प्रवर्तन अभियान लगातार आवश्यक हैं।
सेलेक्टर बस्ती के पास भी कार्रवाई
अभियान के दौरान एरिया-03 के सेलेक्टर बस्ती के समीप भी छापेमारी की गई। यहां से लगभग 0.91 टन अवैध कोयला बरामद किया गया। इसे भी नियमानुसार जब्त कर लिया गया।
एक ही अभियान के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से अवैध कोयले की बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा एजेंसियां कोयला चोरी के संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ा रही हैं। हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम जिम्मेदारी और कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच एवं विधिक प्रक्रिया के आधार पर ही निर्धारित होंगे।
अवैध Rat Hole को डोजिंग कर किया गया बंद
अभियान की एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई में एक अवैध मुहाना या Rat Hole को डोजिंग के माध्यम से बंद कर दिया गया। अवैध मुहाने अक्सर गैरकानूनी खनन गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रास्तों के रूप में सामने आते हैं। ऐसे स्थानों को बंद करना अवैध खनन की संभावित गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
CISF और संबंधित एजेंसियों का उद्देश्य ऐसे अवैध रास्तों को बंद करना है ताकि भविष्य में वहां से कोयला निकालने की गैरकानूनी कोशिशों को रोका जा सके। इसके साथ ही क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखना भी आवश्यक है, क्योंकि किसी स्थान को बंद किए जाने के बाद दोबारा अवैध गतिविधि शुरू होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
Zero Coal Leakage Tolerance Policy पर जोर
पूरे अभियान को भारत सरकार की “Zero Coal Leakage Tolerance Policy” के प्रभावी क्रियान्वयन से जोड़कर देखा जा रहा है। कोयला देश की महत्वपूर्ण प्राकृतिक और औद्योगिक संपत्तियों में शामिल है। इसलिए कोयला चोरी, अवैध खनन, अवैध भंडारण और गैरकानूनी परिवहन से होने वाले नुकसान को रोकना सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित कंपनियों की प्राथमिकता में रहता है।
नीति के तहत कोयला उत्पादन क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है। CISF, BCCL और स्थानीय प्रशासन के बीच संयुक्त अभियान इसी समन्वित रणनीति का हिस्सा बताया गया है।
नियमित गश्त से लेकर ड्रोन निगरानी तक
CISF ने बताया कि कोयला चोरी और अवैध खनन को रोकने के लिए केवल छापेमारी पर निर्भर नहीं रहा जा रहा है। इसके लिए नियमित गश्त, ड्रोन निगरानी और Quick Response Team (QRT) की तैनाती जैसे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं।
ड्रोन निगरानी विशेष रूप से उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हर स्थान पर मानव गश्त करना मुश्किल होता है। जंगल, सुनसान क्षेत्र, पुराने खनन क्षेत्र और दूरस्थ इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
वहीं QRT को किसी भी आकस्मिक सूचना या संदिग्ध गतिविधि पर तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इन व्यवस्थाओं के साथ स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को भी मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
CISF-BCCL-प्रशासन के बीच समन्वय
कोयला क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कई एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक होता है। CISF की जिम्मेदारी औद्योगिक प्रतिष्ठानों और संबंधित परिसंपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ी है, जबकि BCCL प्रबंधन का सीधा संबंध खनन और कोयला उत्पादन क्षेत्रों से है। स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था और कानूनी कार्रवाई के स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे में संयुक्त अभियान के दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना, संवेदनशील स्थानों की पहचान करना और कार्रवाई को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
हालिया अभियान में भी इन एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार, आगे भी इस प्रकार की कार्रवाई जारी रखने की योजना है।
कोयला चोरी रोकना क्यों जरूरी?
कोयला चोरी को केवल आर्थिक नुकसान के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह खनन क्षेत्र की सुरक्षा, पर्यावरण, श्रमिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से भी जुड़ा विषय है। अवैध खनन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने से दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
इसके अलावा अनियंत्रित और गैरकानूनी खनन से भूमि की संरचना प्रभावित हो सकती है तथा पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बनी रहती है। इसलिए अवैध मुहानों को बंद करना और संदिग्ध खनन स्थलों की निगरानी करना सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
कोयले के अवैध परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने से राजस्व संबंधी नुकसान को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसी वजह से कोयला क्षेत्रों में प्रवर्तन अभियान नियमित रूप से चलाए जाते हैं।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
CISF की ओर से स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा और कोयला चोरी तथा अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से इस तरह के अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे।
इसका अर्थ है कि केवल एक-दो छापेमारी के बाद अभियान समाप्त नहीं होगा, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई को निरंतर बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। नियमित गश्त, तकनीकी निगरानी और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय इस रणनीति के प्रमुख हिस्से बने रहेंगे।
अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ ऐसे स्थानों की पहचान भी महत्वपूर्ण होगी जहां भविष्य में चोरी या अवैध खनन की संभावना हो सकती है।
आम लोगों से CISF की अपील
CISF ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। सुरक्षा बल ने कहा है कि कोयला क्षेत्र में अवैध खनन, कोयला चोरी, अवैध परिवहन अथवा अन्य संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर इसकी सूचना दी जा सकती है।
CISF के अनुसार, सूचना देने के लिए WhatsApp नंबर 9341528406 पर केवल संदेश के माध्यम से जानकारी भेजी जा सकती है, ताकि संबंधित एजेंसियां सूचना का सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई कर सकें।
आम नागरिकों की भूमिका ऐसे अभियानों में महत्वपूर्ण हो सकती है। स्थानीय लोग अपने आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी देकर अवैध गतिविधियों की रोकथाम में सहयोग कर सकते हैं। हालांकि, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देते समय नागरिकों को स्वयं जोखिम उठाने या संदिग्ध व्यक्तियों से सीधे सामना करने के बजाय संबंधित सुरक्षा अथवा प्रशासनिक एजेंसी को सूचना देने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
धनबाद और आसपास का कोयलांचल देश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां कोयला उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों के साथ सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की चुनौती भी बनी रहती है। ऐसे में CISF, BCCL प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
हालिया कार्रवाई में 16 स्थानों पर छापेमारी, 53.91 टन अवैध कोयले की बरामदगी और एक अवैध मुहाने को बंद किए जाने से यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा एजेंसियां अवैध खनन और कोयला चोरी के खिलाफ अभियान को गंभीरता से आगे बढ़ा रही हैं।
हालांकि, बरामदगी और कार्रवाई से जुड़े मामलों में अंतिम कानूनी स्थिति जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकरण की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल CISF का रुख साफ है—कोयला चोरी और अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।













