
धनबाद: झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग (पंचायती राज) द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सुनियोजित विकास और भवन निर्माण गतिविधियों को विनियमित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लागू किया गया है। सरकार के संकल्प के अनुरूप ‘झारखंड पंचायत भूमि विकास (नक्शा एवं भवन निर्माण) नियमावली, 2017’ के अंतर्गत ‘झारखंड बिल्डिंग बायलॉज-2016’ को संशोधित करते हुए पंचायती राज संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र वाले ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्ण रूप से लागू कर दिया गया है।
नए प्रावधानों के अनुसार अब ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के भवन निर्माण कार्य के लिए नक्शा स्वीकृत करने की शक्ति जिला परिषद को प्रदान की गई है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले सभी आवासीय, व्यावसायिक एवं अन्य भवनों के निर्माण से पूर्व जिला परिषद से विधिवत नक्शा स्वीकृत कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 5000 वर्गफीट अथवा उससे अधिक क्षेत्रफल पर प्रस्तावित किसी भी मकान, दुकान, शोरूम, व्यावसायिक प्रतिष्ठान या कॉम्प्लेक्स के निर्माण कार्य को प्रारंभ करने से पहले संबंधित व्यक्ति, संस्था अथवा डेवलपर को जिला परिषद, धनबाद से नक्शा स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिना स्वीकृत नक्शे के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नियमों के विरुद्ध माना जाएगा। यदि जांच के दौरान कोई व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति निर्माण कार्य करते हुए पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित निर्माणकर्ता पर आर्थिक दंड (जुर्माना) भी लगाया जा सकता है।
जिला प्रशासन ने कहा है कि यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण को रोकने, आधारभूत संरचनाओं के सुव्यवस्थित विकास को बढ़ावा देने तथा भविष्य में उत्पन्न होने वाले कानूनी विवादों को कम करने के उद्देश्य से लागू की गई है।
सभी नागरिकों, भूमि स्वामियों, बिल्डरों एवं डेवलपर्स से अपील की गई है कि वे किसी भी निर्माण कार्य की शुरुआत करने से पहले जिला परिषद, धनबाद कार्यालय से संपर्क कर आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कर लें। इससे वे कानूनी जटिलताओं, आर्थिक दंड और प्रशासनिक कार्रवाई से बच सकेंगे।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि भवन निर्माण से संबंधित सभी मामलों में निर्धारित नियमों और मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित, व्यवस्थित और टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिल सके।













