गरीबी पर मेहनत की जीत: दिहाड़ी मजदूर की बेटी पूनम ने NEET-2026 में रचा इतिहास
क्षेत्रीय संवाददाता

धनबाद DC ने डॉक्टर बनने तक की पूरी पढ़ाई का उठाया जिम्मा
धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है जिसने यह साबित कर दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो, मेहनत ईमानदार हो और सपनों पर विश्वास हो, तो आर्थिक तंगी भी सफलता की राह नहीं रोक सकती। दिहाड़ी मजदूर की बेटी पूनम कुमारी ने NEET-2026 परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे धनबाद जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि के बाद धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने जो घोषणा की, उसकी हर ओर सराहना हो रही है।
पूनम ने 582 अंक, 99.1375 परसेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 16,972 प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। उनकी सफलता आज उन लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।
भूदा बस्ती से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर
धनबाद की भूदा बस्ती में रहने वाली पूनम का बचपन सामान्य सुविधाओं के बीच नहीं बीता। उनके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और परिवार की आय इतनी नहीं थी कि महंगी कोचिंग या निजी शिक्षा का खर्च आसानी से उठा सकें। इसके बावजूद माता-पिता ने अपनी बेटी की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया।
पूनम ने बचपन से ही यह समझ लिया था कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाया और निरंतर मेहनत करती रहीं।
सरकारी विद्यालय से शुरू हुई सफलता की कहानी
पूनम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से प्राप्त की। सरकारी विद्यालय में पढ़ते हुए उन्होंने यह सिद्ध किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल महंगे निजी विद्यालयों तक सीमित नहीं है।
इससे पहले उन्होंने सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में 97.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर धनबाद जिला टॉपर बनने का गौरव हासिल किया था। उनकी यह उपलब्धि पहले ही यह संकेत दे चुकी थी कि वह आगे भी बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं।
NEET-2026 में शानदार प्रदर्शन
देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में सफलता हासिल करना आसान नहीं माना जाता। लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन बहुत कम उम्मीदवार उत्कृष्ट रैंक प्राप्त कर पाते हैं।
ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में पूनम ने 582 अंक प्राप्त कर 99.1375 परसेंटाइल हासिल किया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
उपायुक्त आदित्य रंजन की प्रेरणादायक पहल
पूनम की सफलता की जानकारी मिलने के बाद धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने उन्हें सम्मानित किया। सम्मान समारोह के दौरान उन्होंने एक ऐसी घोषणा की जिसने पूरे जिले का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
उपायुक्त ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए जिला प्रशासन पूनम की एमबीबीएस में प्रवेश से लेकर डॉक्टर बनने तक की पूरी पढ़ाई का खर्च वहन करेगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली छात्र या छात्रा के सपनों के बीच बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। यदि सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी मेहनत और प्रतिभा के आधार पर आगे बढ़ते हैं, तो प्रशासन उनका हर संभव सहयोग करेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक संदेश
जिला प्रशासन की इस पहल को शिक्षा जगत में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अक्सर आर्थिक कारणों से कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी मेडिकल या इंजीनियरिंग जैसी उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
यदि प्रशासन और समाज ऐसे छात्रों के साथ खड़ा हो, तो अनेक प्रतिभाएं आगे आ सकती हैं। पूनम का उदाहरण इस दिशा में एक प्रेरक मॉडल बन सकता है।
कार्डियोलॉजिस्ट बनने का सपना
पूनम का लक्ष्य केवल डॉक्टर बनना नहीं है। उनका सपना कार्डियोलॉजिस्ट बनकर हृदय रोगियों की सेवा करना है।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे अनेक लोग हैं जिन्हें आर्थिक तंगी के कारण समय पर बेहतर चिकित्सा नहीं मिल पाती। भविष्य में वह ऐसे जरूरतमंद मरीजों की सेवा करना चाहती हैं ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।
सफलता का श्रेय परिवार और शिक्षकों को
पूनम ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और विद्यालय के सकारात्मक वातावरण को दिया।
उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कभी उन्हें पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया। वहीं शिक्षकों ने लगातार मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया।
उनका मानना है कि यदि विद्यार्थियों को सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास मिले, तो वे किसी भी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

गरीब परिवारों के लिए नई उम्मीद
पूनम की सफलता उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों की उच्च शिक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।
यह कहानी बताती है कि यदि परिवार का सहयोग, विद्यार्थी की मेहनत और प्रशासन का समर्थन मिल जाए, तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सफलता हासिल की जा सकती है।
समाज में सकारात्मक प्रतिक्रिया
जैसे ही जिला प्रशासन की घोषणा सामने आई, भूदा बस्ती सहित पूरे धनबाद जिले में खुशी की लहर दौड़ गई।
स्थानीय लोगों ने कहा कि यह केवल एक छात्रा का सम्मान नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। लोगों का मानना है कि प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य विद्यार्थियों को भी मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
शिक्षा से बदलती है जिंदगी
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है।
जब किसी गरीब परिवार का बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी बनता है, तो केवल उसका जीवन ही नहीं बदलता, बल्कि पूरे परिवार और समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।
पूनम की कहानी इसी परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है।
सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा
अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि केवल निजी विद्यालयों के विद्यार्थी ही बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
पूनम ने इस सोच को गलत साबित करते हुए दिखाया कि सरकारी विद्यालय के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
युवा पीढ़ी के लिए संदेश
पूनम का संदेश स्पष्ट है—
- परिस्थितियों से हार मत मानिए।
- मेहनत को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाइए।
- लक्ष्य तय कीजिए और लगातार प्रयास करते रहिए।
- सफलता देर से मिलेगी, लेकिन जरूर मिलेगी।
प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की सहायता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को भी आगे आकर ऐसे छात्रों को सहयोग देना चाहिए।
यदि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को समय पर सहायता मिल जाए, तो देश को हजारों उत्कृष्ट डॉक्टर, वैज्ञानिक और शोधकर्ता मिल सकते हैं।
धनबाद की पूनम कुमारी की सफलता केवल एक परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, आत्मविश्वास और शिक्षा की शक्ति का जीवंत उदाहरण है। दिहाड़ी मजदूर की बेटी से लेकर NEET-2026 में शानदार सफलता हासिल करने तक का उनका सफर हर उस विद्यार्थी के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है।
धनबाद जिला प्रशासन द्वारा उनकी पूरी मेडिकल शिक्षा का खर्च उठाने की घोषणा यह संदेश देती है कि यदि प्रतिभा और परिश्रम साथ हों, तो समाज और प्रशासन भी ऐसे युवाओं के साथ खड़े हो सकते हैं। आज पूनम कुमारी न केवल अपने परिवार का गर्व हैं, बल्कि झारखंड और पूरे देश के लाखों विद्यार्थियों के लिए उम्मीद, प्रेरणा और संघर्ष की नई पहचान बन चुकी हैं।













