
धनबाद-सिंदरी: झारखंड सरकार के कल्याण विभाग के निर्देशानुसार बलियापुर प्रखंड सभागार में आदिवासी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जाहेर थान एवं सरना स्थलों के लिए पूजन सामग्री वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो मुख्य रूप से उपस्थित रहे और लाभुकों के बीच पूजन सामग्री का वितरण किया।
इस अवसर पर बलियापुर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न ग्राम पंचायतों के जाहेर थानों से जुड़े मांझी हड़ामों को धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाली आवश्यक सामग्रियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायत परसबनियां-बालिचिरका जाहेर थान के नंदलाल टुडू, कुसमाटांड़ के सुरेश बास्की, आमझर के लोगन मांझी तथा रांगामाटी के चांद बास्की सहित कुल चार जाहेर थानों के प्रतिनिधियों को वस्त्र, बर्तन एवं अन्य आवश्यक पूजन सामग्री उपलब्ध कराई गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक चंद्रदेव महतो ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की सांस्कृतिक, धार्मिक और पारंपरिक विरासत को संरक्षित एवं सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि जाहेर थान और सरना स्थल केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं हैं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, आस्था और सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक भी हैं। ऐसे स्थलों के संरक्षण और धार्मिक आयोजनों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की परंपराओं और रीति-रिवाजों को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार द्वारा पूजन सामग्री उपलब्ध कराने की यह पहल सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य विभिन्न जाहेर थानों और सरना स्थलों पर आयोजित होने वाले पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों को सुचारू रूप से संचालित करने में सहयोग प्रदान करना है। इसके माध्यम से स्थानीय समुदायों को अपनी धार्मिक गतिविधियों के संचालन में आवश्यक सहायता मिल सकेगी।
इस अवसर पर अपर समाहर्ता विनोद कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बलियापुर) प्रभास चंद्र दास, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी (बीपीआरओ) मो. आलम, क्षेत्र के विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
ग्रामीणों ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी। स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस प्रकार की योजनाओं के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास और संरक्षण के लिए सहयोग जारी रहेगा।
कार्यक्रम का समापन लाभुकों के बीच सामग्री वितरण तथा आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ हुआ। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।













