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शानदार उत्सव: भारत में होली 2026 के 7 रंगीन नज़ारे, देशभर में उमड़ा उत्साह

समीर सिंह 'भारत' : मुख्य संपादक

नई दिल्ली, 3 मार्च: आज पूरे देश में हर्षोल्लास, भाईचारे और परंपराओं के संगम के साथ होली का पर्व मनाया गया। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक हर शहर, कस्बे और गांव में रंगों की फुहार, ढोल-नगाड़ों की थाप और मिठाइयों की खुशबू ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। सड़कों पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोग रंगों में सराबोर नजर आए। इस वर्ष की होली कई मायनों में विशेष रही, क्योंकि लोगों ने न केवल पारंपरिक उत्साह दिखाया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सौहार्द का भी संदेश दिया।

राजधानी नई दिल्ली में सुबह से ही रंगों की बहार दिखाई दी। राष्ट्रपति भवन से लेकर चांदनी चौक और कनॉट प्लेस तक लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई देते नजर आए। विभिन्न सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक मंचों ने सामूहिक होली मिलन समारोहों का आयोजन किया, जहां लोकगीतों और नृत्य प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत कर दिया। सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

होली के पावन अवसर पर धार्मिक स्थलों में भी विशेष आयोजन हुए। वाराणसी में गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने रंग-अबीर के साथ पूजा-अर्चना की। काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। वहीं मथुरा और वृंदावन में परंपरागत लठमार और फूलों की होली ने देश-विदेश से आए पर्यटकों को आकर्षित किया। बांके बिहारी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु ‘राधे-राधे’ के जयकारों के साथ रंगों में डूबे दिखाई दिए।

पश्चिम भारत में मुंबई की होली भी खास रही। फिल्मी सितारों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों ने निजी और सार्वजनिक आयोजनों में भाग लिया। कई आवासीय सोसायटियों में डीजे, पारंपरिक ढोल और फाग गीतों के साथ रंगोत्सव मनाया गया। समुद्र तटों पर युवाओं की टोलियां रंग खेलते और नृत्य करते देखी गईं। प्रशासन ने जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ‘ड्राई होली’ मनाने की अपील की थी, जिसका व्यापक असर दिखाई दिया।

पूर्वी भारत में कोलकाता में होली को ‘डोल उत्सव’ के रूप में मनाया गया। शांतिनिकेतन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की परंपरा के अनुसार विद्यार्थियों ने पीले वस्त्र पहनकर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। रंगों के साथ-साथ शांति और सौहार्द का संदेश भी दिया गया। वहीं पटना और आसपास के इलाकों में पारंपरिक लोकगीतों की गूंज सुनाई दी।

दक्षिण भारत में भी होली का उत्साह बढ़ता दिखाई दे रहा है। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने रंगोत्सव आयोजित किए। आईटी कंपनियों और विश्वविद्यालय परिसरों में भी युवाओं ने होली मिलन समारोहों में भाग लिया। कई जगहों पर पारंपरिक उत्तर भारतीय व्यंजन जैसे गुजिया, दही भल्ला और ठंडाई का आनंद लिया गया।

इस वर्ष की होली में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विशेष रूप से देखने को मिली। कई स्कूलों और स्वयंसेवी संगठनों ने हर्बल और प्राकृतिक रंगों के उपयोग को बढ़ावा दिया। रासायनिक रंगों से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कई शहरों में पानी की बर्बादी रोकने के लिए अभियान चलाए गए। प्रशासन ने भी नागरिकों से अपील की कि वे सूखी होली खेलें और पर्यावरण का ध्यान रखें।

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। इस अवसर पर विभिन्न समुदायों के लोगों ने मिलकर त्योहार मनाया। कई स्थानों पर अंतरधार्मिक होली मिलन समारोह आयोजित किए गए, जहां सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते नजर आए। इससे सामाजिक समरसता का संदेश मजबूत हुआ।

त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही। पुलिस और प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया। आपातकालीन सेवाएं भी सक्रिय रहीं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सके। अधिकांश स्थानों पर होली शांतिपूर्ण और आनंदमय वातावरण में संपन्न हुई।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी होली का उत्साह कम नहीं रहा। गांवों में पारंपरिक फाग, ढोलक और मंजीरे की थाप पर लोग देर शाम तक नाचते-गाते रहे। बुजुर्गों ने पुरानी परंपराओं को याद करते हुए युवाओं को त्योहार के महत्व के बारे में बताया। खेत-खलिहानों में नई फसल की खुशी के साथ होली का जश्न मनाया गया।

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आर्थिक दृष्टि से भी होली का बाजार गुलजार रहा। मिठाई की दुकानों, रंग-अबीर और पिचकारी बेचने वाले व्यापारियों के यहां भीड़ उमड़ी। छोटे व्यापारियों को भी अच्छा कारोबार मिला। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी होली से जुड़े उत्पादों की बिक्री में वृद्धि देखी गई। पर्यटन स्थलों पर होली मनाने के लिए देश-विदेश से आए पर्यटकों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आंखों और त्वचा की सुरक्षा के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें और अज्ञात स्रोतों से रंग न खरीदें। चिकित्सालयों में आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध रहीं, हालांकि अधिकांश स्थानों पर गंभीर घटनाएं सामने नहीं आईं।

होली के अवसर पर राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संदेश दिया कि यह पर्व प्रेम, सौहार्द और एकता का प्रतीक है, और हमें इसे आपसी सद्भाव के साथ मनाना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने रंगों से सजी तस्वीरें और शुभकामना संदेश साझा किए।

कुल मिलाकर, इस वर्ष की होली ने देश को रंगों के सूत्र में बांध दिया। बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के बीच भी परंपराओं की जीवंतता स्पष्ट दिखाई दी। लोगों ने जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ त्योहार मनाकर यह साबित किया कि उत्सव और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकते हैं। रंगों की यह छटा आने वाले दिनों में भी लोगों के दिलों में खुशी और सकारात्मकता का संचार करती रहेगी।

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