₹76 करोड़ की न्यूरोसाइंस परियोजना का मंत्री डॉ. अजय कुमार पोद्दार ने किया निरीक्षण
सरबजीत सिंह

कुल्टी-आसनसोल: पश्चिम बंगाल सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) एवं लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के मंत्री डॉ. अजय कुमार पोद्दार ने कोलकाता स्थित 17, कॉन्वेंट रोड में निर्माणाधीन इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस परियोजना का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी मानकों तथा निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल यह संस्थान लगभग ₹76 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद पश्चिम बंगाल में न्यूरोसाइंस चिकित्सा, अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
निरीक्षण के दौरान विभागीय अधिकारियों और अभियंताओं ने मंत्री को परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों की प्रगति, तकनीकी चुनौतियों तथा आगामी कार्ययोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बहुस्तरीय संरचना का निर्माण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार और अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
परियोजना के तहत लगभग 11,970 वर्गमीटर क्षेत्रफल में अत्याधुनिक सात मंजिला आरसीसी फ्रेम संरचना का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त दो मंजिला विद्युत उपकेंद्र भवन, एक मंजिला कैंटीन भवन, सीमावर्ती दीवार, आंतरिक सड़क, भूमिगत सीवर नेटवर्क, केबल ट्रेंच, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) तथा अन्य सहायक अवसंरचनात्मक सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान डॉ. पोद्दार ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किए जाएं तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त न किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं में गुणवत्ता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
मंत्री ने परियोजना परिसर में फायर सेफ्टी व्यवस्था, जल संरक्षण उपायों, हरित पर्यावरण के लिए पौधारोपण, तथा आधुनिक सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्थान को केवल एक अस्पताल या चिकित्सा केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक समग्र स्वास्थ्य एवं अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

डॉ. अजय कुमार पोद्दार ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में आधुनिक और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस परियोजना पूर्ण होने के बाद न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और संबंधित चिकित्सा क्षेत्रों में मरीजों को अत्याधुनिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे राज्य के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास को देखते हुए आधुनिक स्वास्थ्य संस्थानों की आवश्यकता बढ़ गई है। यह परियोजना राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ-साथ चिकित्सा अनुसंधान को भी प्रोत्साहित करेगी।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए और निर्माण कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि जनहित से जुड़ी सभी विकास परियोजनाएं समय पर पूरी हों और जनता को उनका लाभ शीघ्र प्राप्त हो।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। बेहतर अस्पताल, उन्नत चिकित्सा उपकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन और आधुनिक अनुसंधान सुविधाएं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान राज्य मंत्री नदियां चंद बाउरी, मुख्य अभियंता बेनॉय मजूमदार, मुख्य अभियंता तापस मैती, अधीक्षण अभियंता राजीव बिस्वास, मुख्य अभियंता (विद्युत) सुभाशीष बिस्वास, वरिष्ठ अधीक्षण अभियंता (विद्युत) पंकज गायेन, कार्यपालक अभियंता संदीपन सांत्रा, सहायक अभियंता अविजीत चौधुरी सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं अभियंता उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना के पूरा होने के बाद यह संस्थान पूर्वी भारत में न्यूरोसाइंस उपचार और अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस यह केंद्र जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को भी नई दिशा प्रदान करेगा।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगी बल्कि पश्चिम बंगाल को उन्नत चिकित्सा अवसंरचना के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में भी स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।













