
धनबाद : झारखंड के धनबाद जिले के नेरो गांव के नीमडीह टोला स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में आयोजित रात्रि चौपाल एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में सामने आई, जहां उपायुक्त आदित्य रंजन ने सीधे ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल ग्रामीणों की समस्याओं को समझना था, बल्कि विकास योजनाओं के प्रभाव का आकलन करना और स्थानीय स्तर पर सुधार की दिशा तय करना भी था।
रात्रि चौपाल के दौरान विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति देखने को मिली। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और किसान सभी वर्गों के लोग अपने-अपने मुद्दों के साथ पहुंचे। उपायुक्त ने सभी की बातों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाएगा।
उपायुक्त आदित्य रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि नेरो गांव के लोग जागरूक, मेहनती और विकास के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले हैं। उन्होंने विशेष रूप से यहां के विद्यालयों की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में यह गांव एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं स्कूलों का निरीक्षण करने के लिए यहां पहुंचे हैं ताकि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझा जा सके।
उन्होंने ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कृषि, पशुपालन, स्वरोजगार और महिला समूहों के माध्यम से आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, आजीविका मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
रात्रि चौपाल के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा गांव की खराब सड़कों का रहा। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के समय आवागमन बेहद कठिन हो जाता है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, किसानों और मरीजों को काफी परेशानी होती है। इस पर उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि सड़क सुधार को प्राथमिकता दी जाएगी और संबंधित विभाग को निर्देश दिए जाएंगे।

उपायुक्त ने यह भी कहा कि प्रशासन कुछ गांवों को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेरो गांव में जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे सराहनीय हैं और इसे एक मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरे का उद्देश्य केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों को समझना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन तभी सफल हो सकता है जब वह जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़कर उनकी समस्याओं का समाधान करे।
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी। इस पर उपायुक्त ने कहा कि जल्द ही एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें क्षेत्र के विधायक, मुखिया और पंचायत समिति के सदस्यों को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय आवश्यक है।
दर्जनों ग्रामीणों ने इस मौके पर अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। कुछ ने राशन वितरण में अनियमितता की शिकायत की, तो कुछ ने बिजली आपूर्ति की समस्या उठाई। कई महिलाओं ने पेयजल की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जताई। युवाओं ने रोजगार के अवसरों की मांग की।
उपायुक्त ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान समयबद्ध तरीके से किया जाएगा और इसकी निगरानी भी की जाएगी।
रात्रि चौपाल का यह आयोजन प्रशासन और जनता के बीच संवाद का एक सशक्त माध्यम साबित हुआ। इससे न केवल लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिला, बल्कि प्रशासन को भी जमीनी हकीकत समझने का मौका मिला।
इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी सीधे जनता के बीच जाकर संवाद करें, तो विकास कार्यों में तेजी लाई जा सकती है। नेरो गांव की यह रात्रि चौपाल आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है।
अंततः, उपायुक्त आदित्य रंजन का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक गंभीर प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस चौपाल में उठाए गए मुद्दों पर प्रशासन कितनी तेजी और प्रभावशीलता से काम करता है।














