धनबाद के बरमुरी खटाल में सरकारी जमीन पर 180 मकान और मैरिज हॉल, प्रशासन जारी करेगा नोटिस
बरमुरी खटाल में 20 एकड़ सरकारी जमीन पर 180 मकान और एक मैरिज हॉल की पहचान, प्रशासन ने नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने की तैयारी की; स्थानीय लोगों ने मांगा वैकल्पिक पुनर्वास।

धनबाद | क्षेत्रीय संवाददाता :जिले के बरमुरी खटाल इलाके में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन की ओर से कराए गए जमीन सर्वेक्षण में करीब 20 एकड़ सरकारी जमीन पर बने 180 मकान और एक मैरिज हॉल की पहचान की गई है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
धनबाद के अंचल अधिकारी राम प्रवेश ने बताया कि उपायुक्त आदित्य रंजन के निर्देश पर सरकारी जमीन की पहचान, सीमांकन और उसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए दो दिवसीय अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि इसी तरह का सीमांकन अभियान आगे पंपू तालाब और लोको टैंक क्षेत्र में भी चलाया जाएगा।
2005 में पशुशेड के लिए आवंटित हुई थी जमीन
उपायुक्त आदित्य रंजन के अनुसार, बरमुरी की सरकारी जमीन वर्ष 2005 में अस्थायी रूप से पशुशेड बनाने के लिए आवंटित की गई थी। प्रशासन की जांच में सामने आया कि कई लोगों ने बिना अनुमति वहां आवासीय मकान बना लिए।
उपायुक्त ने कहा कि सरकारी जमीन पर बने सभी अनधिकृत निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी और वहां रह रहे लोगों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा।
स्थानीय लोगों ने वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की
इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय निवासियों ने चिंता जताई है। क्षेत्र के निवासी आदित्य यादव ने कहा कि त्योहार के समय प्रशासनिक अधिकारी बिना पूर्व सूचना के सर्वेक्षण के लिए पहुंचे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2005 में बेकारबांध झील क्षेत्र से कई परिवारों को बरमुरी खटाल में बसाया गया था और वे तब से वहीं रह रहे हैं। निवासियों ने बताया कि वे उपायुक्त से मिलकर किसी भी बेदखली की कार्रवाई से पहले वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने की मांग करेंगे।
अवैध गतिविधियों की शिकायतें भी आईं सामने
प्रशासन के अनुसार, बरमुरी इलाके में कथित अवैध गतिविधियों से जुड़ी शिकायतें भी मिली हैं। हाल ही में पुलिस ने एक मकान में छापेमारी के दौरान अवैध हथियार बरामद किए थे। उपायुक्त ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में सरकारी जमीन की स्थिति और अवैध गतिविधियों से जुड़े मामलों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
सरकारी जमीन के सीमांकन के बाद अब प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। वहीं, स्थानीय निवासी वैकल्पिक पुनर्वास की मांग उठा रहे हैं।













