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क्राइम-भ्रष्टाचार

झारखंड गैस सिलेंडर कालाबाज़ारी: 1500 रुपये तक वसूली, Big Scam Exposed

समीर सिंह 'भारत' : मुख्य संपादक

झारखंड: झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र झारखंड में घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की कालाबाज़ारी का मामला लगातार सामने आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के कई इलाकों में रसोई गैस सिलेंडर खुलेआम निर्धारित कीमत से कहीं अधिक दर पर बेचे जा रहे हैं। जहां एक ओर सरकार आम लोगों को रियायती दरों पर गैस उपलब्ध कराने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर कुछ एजेंसी कर्मियों और बिचौलियों की मिलीभगत से कालाबाज़ारी का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है।

झारखंड में गैस सिलेंडरों की कालाबाज़ारी से उपभोक्ता परेशान

सूत्रों का कहना है कि झारखंड के कई मोहल्लों में गैस सिलेंडर की आपूर्ति जानबूझकर कम कर दी जाती है, जिससे कृत्रिम संकट पैदा हो जाता है। इसके बाद वही सिलेंडर ब्लैक मार्केट में 1400 से 1500 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं। जबकि घरेलू गैस सिलेंडर की आधिकारिक कीमत इससे काफी कम है। मजबूरी में आम उपभोक्ताओं को अधिक पैसे देकर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि कुछ एजेंसियों के कर्मचारी और स्थानीय बिचौलिए मिलकर इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। जरूरतमंद लोगों को यह कहकर टाल दिया जाता है कि स्टॉक खत्म हो गया है, जबकि वही सिलेंडर कुछ समय बाद अधिक कीमत पर उपलब्ध हो जाता है।

शहर के कई इलाकों जैसे झरिया, कतरास और गोविंदपुर में भी गैस सिलेंडरों की कालाबाज़ारी की शिकायतें सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि त्योहारों और शादी के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है। उस समय सिलेंडर की मांग बढ़ने का फायदा उठाकर बिचौलिए मनमाने दाम वसूलते हैं।

स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इस मामले में जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आम जनता को और अधिक आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि गैस एजेंसियों की नियमित जांच हो और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब शहर में खुलेआम कालाबाज़ारी हो रही है तो संबंधित विभाग और पुलिस की चुप्पी समझ से परे है। यदि प्रशासन सख्ती से जांच करे तो इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश हो सकता है।

फिलहाल झारखंड में गैस सिलेंडरों की कालाबाज़ारी आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों के खिलाफ कब तक कार्रवाई होती है।

इधर स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कई जगहों पर गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी समय पर नहीं की जाती। उपभोक्ताओं को बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ बिचौलिये सक्रिय हो जाते हैं और वही सिलेंडर अधिक कीमत पर उपलब्ध कराने का लालच देते हैं। मजबूरी में कई परिवारों को तय कीमत से कहीं ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं।

सूत्रों के अनुसार कुछ छोटे दुकानदार भी इस धंधे में शामिल बताए जा रहे हैं, जो घरेलू सिलेंडरों को इकट्ठा कर बाद में अधिक दाम पर बेचते हैं। इससे आम लोगों को मिलने वाली गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार इस समस्या से सबसे ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि उनके लिए इतनी अधिक कीमत देना आसान नहीं है।

लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और आपूर्ति विभाग अचानक जांच अभियान चलाए तो इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली की जांच की जाए और कालाबाज़ारी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कब तक पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह से गैस सिलेंडरों की कालाबाज़ारी चलती रहेगी और आम जनता महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर होती रहेगी।

 

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