
नई दिल्ली: देश में महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के उद्यमियों को स्वरोजगार और उद्योग स्थापना के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई स्टैंडअप इंडिया योजना कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे चर्चित उद्यमिता योजनाओं में से एक मानी जाती थी। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना ने लाखों नए उद्यमियों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने और उन्हें ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन वर्ष 2025 के बाद योजना की स्थिति को लेकर अनेक सवाल उठने लगे हैं। विशेष रूप से 1 मार्च 2025 के बाद पोर्टल और प्रक्रिया में आए बदलावों तथा 31 मार्च 2025 के आसपास योजना की सक्रियता में कमी ने लाभार्थियों और उद्यमिता क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी।
हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी सरकारी अधिसूचना के आधार पर योजना को औपचारिक रूप से बंद किए जाने की सार्वजनिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन कई आवेदकों का दावा है कि पोर्टल पर पहले जैसी गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही हैं और सहायता तंत्र भी पहले की तुलना में कम सक्रिय नजर आ रहा है।
स्टैंडअप इंडिया योजना की शुरुआत: आत्मनिर्भर भारत का एक बड़ा सपना
5 अप्रैल 2016 को शुरू की गई स्टैंडअप इंडिया योजना का मुख्य उद्देश्य था कि देश की प्रत्येक बैंक शाखा कम से कम एक SC/ST उद्यमी और एक महिला उद्यमी को नया व्यवसाय स्थापित करने के लिए ऋण उपलब्ध कराए।
योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता था। इसके साथ ही SIDBI (Small Industries Development Bank of India) द्वारा संचालित Udyamimitra Portal और Standup Mitra Portal के माध्यम से आवेदकों को हैंडहोल्डिंग सपोर्ट, परियोजना रिपोर्ट, प्रशिक्षण और बैंक से संपर्क जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती थीं।
उस समय इसे सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना गया था।
सफलता की कहानी
पिछले वर्षों में लाखों महिलाओं और SC/ST उद्यमियों ने इस योजना के माध्यम से छोटे और मध्यम उद्योग स्थापित किए। ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, ब्यूटी एवं वेलनेस, सेवा क्षेत्र, निर्माण इकाइयों और खुदरा व्यवसायों को विशेष लाभ मिला।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार योजना के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए। इससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला। विशेष रूप से उन लोगों को लाभ मिला जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था में ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती थी।
वर्तमान स्थिति: सवालों के घेरे में पोर्टल और प्रक्रिया
वर्ष 2025 के बाद कई उद्यमियों ने शिकायत की कि स्टैंडअप मित्रा पोर्टल की सक्रियता कम हो गई है। कुछ लोगों का कहना है कि पोर्टल पर पहले की तरह आवेदन प्रक्रिया स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती।
कई संभावित लाभार्थियों का आरोप है कि हेल्पलाइन पर संपर्क करने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि आवेदन की स्थिति, नई स्वीकृतियों और योजना के भविष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही।
यदि कोई नागरिक वर्तमान में Standup Mitra Portal खोलता है, तो उसे सीमित जानकारी दिखाई देने की शिकायतें भी सामने आई हैं। हालांकि तकनीकी उन्नयन, पोर्टल रखरखाव या नीति परिवर्तन जैसी संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
बैंकों का बदलता रुख?
उद्यमिता जगत में यह चर्चा भी है कि कई बैंकों ने समय के साथ जोखिम मूल्यांकन को अधिक कठोर बना दिया। कुछ उद्यमियों का मानना है कि शुरुआती वर्षों की तुलना में ऋण स्वीकृति प्रक्रिया कठिन हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक किसी भी ऋण योजना में वित्तीय व्यवहार्यता और पुनर्भुगतान क्षमता को प्राथमिकता देते हैं। यदि आर्थिक परिस्थितियां बदलती हैं, तो बैंकिंग क्षेत्र की कार्यप्रणाली पर भी उसका प्रभाव पड़ता है।
हालांकि इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है कि बैंकों के रुख में बदलाव के कारण योजना की गति प्रभावित हुई हो।
जनता का बड़ा सवाल: सूचना क्यों नहीं?
किसी भी सरकारी योजना की सबसे बड़ी ताकत उसकी पारदर्शिता होती है। यदि किसी योजना में बदलाव किया जाता है, उसका विस्तार किया जाता है, उसे पुनर्गठित किया जाता है या उसकी प्रक्रिया बदली जाती है, तो लाभार्थियों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
यही वह बिंदु है जहां कई उद्यमी प्रश्न उठा रहे हैं।
उनका कहना है कि यदि योजना पहले जैसी सक्रिय नहीं है, तो सरकार, SIDBI या संबंधित एजेंसियों को इसकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि योजना चालू है तो पोर्टल और हेल्पलाइन को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। यदि किसी प्रकार का पुनर्गठन चल रहा है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
हेल्पलाइन संस्कृति पर भी उठ रहे सवाल
स्टैंडअप इंडिया का मुद्दा केवल एक योजना तक सीमित नहीं है। देश में कई सरकारी और निजी हेल्पलाइन सेवाओं को लेकर भी नागरिकों की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
कई बार लोग बताते हैं कि कॉल रिस्पॉन्स नहीं मिलता, ईमेल का जवाब देर से आता है या शिकायतों का समाधान समय पर नहीं होता।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में नागरिकों की अपेक्षा है कि सरकारी पोर्टल और हेल्पलाइन अधिक जवाबदेह और पारदर्शी हों।
भविष्य की संभावनाएं
भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया, मुद्रा योजना और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के बीच महिलाओं और SC/ST उद्यमियों को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्टैंडअप इंडिया जैसी योजनाओं को और अधिक आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सहायता और बैंकिंग सुधारों के साथ जोड़ा जाए तो लाखों नए उद्यमी तैयार किए जा सकते हैं।
विश्लेषण
स्टैंडअप इंडिया योजना ने अपने शुरुआती वर्षों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की एक नई कहानी लिखी। इसने हजारों महिलाओं और SC/ST उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। लेकिन वर्तमान समय में योजना की स्थिति, पोर्टल की कार्यप्रणाली और भविष्य की दिशा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है स्पष्टता, पारदर्शिता और संवाद की।
यदि योजना जारी है तो उसकी जानकारी जनता तक प्रभावी रूप से पहुंचनी चाहिए। यदि किसी प्रकार का पुनर्गठन हो रहा है तो उसका रोडमैप सार्वजनिक होना चाहिए। और यदि लाभार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो हेल्पलाइन और सहायता तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए।
क्योंकि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी योजनाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास पर चलती हैं। और विश्वास तभी मजबूत होता है जब सवालों के जवाब समय पर और स्पष्ट रूप से दिए जाएं।











