विश्लेषण
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महानायक की सदी: जब बंगाल ने भारतीय सिनेमा को दिया अपना “उत्तम कुमार”
विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट | भारतीय सिनेमा केवल हिन्दी फिल्मों का नाम नहीं है। यह देश की अनेक भाषाओं, संस्कृतियों, बोलियों, परंपराओं,…
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धर्म बदला तो आरक्षण की कुर्सी भी बदलेगी? सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने छेड़ी नई बहस
विश्लेषणात्मक विशेष रिपोर्ट I भारत में धर्म, जाति और आरक्षण—ये तीन शब्द एक साथ आ जाएं तो बहस का तापमान…
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IAS बनाम मंत्री: सत्ता के दो पहिए टकराए तो लोकतंत्र की गाड़ी कौन संभालेगा?
विश्लेषण : मंत्री जनता के जनादेश से आते हैं, अधिकारी प्रशासनिक व्यवस्था चलाते हैं—लेकिन जब दोनों के बीच अधिकार, अहंकार…
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घरेलू गैस की कतार में खड़ा भारत: सुविधा के नाम पर फिर शुरू हुई ‘पर्ची और लाइन’ की कहानी
विशेष व्यंग्यात्मक विश्लेषण : देश में डिजिटल इंडिया की तस्वीर जितनी चमकदार दिखाई जाती है, जमीन पर उसकी परीक्षा अक्सर…
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हिमालय की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
विश्लेषण I काठमांडू: नेपाल इन दिनों अपनी सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। 26…
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पुलिस बनाम जनता: क्या लोकतंत्र में सुरक्षा की संस्था ही डर का कारण बनती जा रही है?
विश्लेषणात्मक विशेष रिपोर्ट : भारत में पुलिस व्यवस्था का मूल उद्देश्य बेहद स्पष्ट है—कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध रोकना, नागरिकों की…
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जयराम महतो बनाम बरवाअड्डा थाना और पुलिस एसोसिएशन: टकराव से बड़ा सवाल
विश्लेषण I धनबाद-रांची: झारखंड की राजनीति में डुमरी विधायक जयराम महतो और धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बीच कथित…
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अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचीं बेटियां, वीडियो कॉल पर देखी पिता की विदाई
तीन शिक्षिका बेटियों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से किया इंकार, कफन और संस्कार के लिए भेजे पैसे; समाज…
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फेरी वाला बनाम फाइलों वाला भारत
विश्लेषण: कभी भारत की पहचान उसकी मंडियों, हाट-बाजारों और गली-गली घूमकर सामान बेचने वाले फेरीवालों से होती थी। सुबह होते…
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श्रवण कुमार की मिसाल बने शिवभक्त यशवीर, कांवड़ पर मां और मामा को बैठाकर हरिद्वार से लाए गंगाजल
70 वर्षीय मां और 65 वर्षीय मामा को कंधों पर बैठाकर पूरी की कांवड़ यात्रा, माता-पिता एवं बुजुर्गों की सेवा…
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