-
विश्लेषण
अतीक अहमद: जनता ने जिताया, जेल ने रोका और कैमरे के सामने गोली ने कहानी खत्म कर दी?
विश्लेषण : अतीक अहमद की कहानी केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र के उस आईने की…
Read More » -
देश
ऊर्जा और सिंचाई व्यवस्था को भविष्य के अनुरूप बनाने पर मंथन, पोंग-देहर पावर हाउस के आधुनिकीकरण से लेकर जलाशयों की गाद तक हुई चर्चा
नई दिल्ली। देश की ऊर्जा सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था को अधिक मजबूत, प्रभावी तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने…
Read More » -
विश्लेषण
ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट की नई पिच खोल रही उम्मीद : अब पहचान नहीं, प्रतिभा बोलेगी
विशेष विश्लेषणात्मक I कभी समाज किसी व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर एक सीमित दायरे में देखने लगता है।…
Read More » -
विश्लेषण
‘आप’ से ‘तुम’ और ‘जी’ से सिर्फ नाम तक—क्या बदल रही है हमारी भाषा की मर्यादा?
विश्लेषण | भाषा, पीढ़ी और बदलते सामाजिक संस्कार : भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं होती। भाषा में समाज की…
Read More » -
विश्लेषण
महानायक की सदी: जब बंगाल ने भारतीय सिनेमा को दिया अपना “उत्तम कुमार”
विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट | भारतीय सिनेमा केवल हिन्दी फिल्मों का नाम नहीं है। यह देश की अनेक भाषाओं, संस्कृतियों, बोलियों, परंपराओं,…
Read More » -
विश्लेषण
धर्म बदला तो आरक्षण की कुर्सी भी बदलेगी? सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने छेड़ी नई बहस
विश्लेषणात्मक विशेष रिपोर्ट I भारत में धर्म, जाति और आरक्षण—ये तीन शब्द एक साथ आ जाएं तो बहस का तापमान…
Read More » -
विश्लेषण
IAS बनाम मंत्री: सत्ता के दो पहिए टकराए तो लोकतंत्र की गाड़ी कौन संभालेगा?
विश्लेषण : मंत्री जनता के जनादेश से आते हैं, अधिकारी प्रशासनिक व्यवस्था चलाते हैं—लेकिन जब दोनों के बीच अधिकार, अहंकार…
Read More » -
विश्लेषण
घरेलू गैस की कतार में खड़ा भारत: सुविधा के नाम पर फिर शुरू हुई ‘पर्ची और लाइन’ की कहानी
विशेष व्यंग्यात्मक विश्लेषण : देश में डिजिटल इंडिया की तस्वीर जितनी चमकदार दिखाई जाती है, जमीन पर उसकी परीक्षा अक्सर…
Read More » -
विश्लेषण
हिमालय की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
विश्लेषण I काठमांडू: नेपाल इन दिनों अपनी सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। 26…
Read More » -
विश्लेषण
पुलिस बनाम जनता: क्या लोकतंत्र में सुरक्षा की संस्था ही डर का कारण बनती जा रही है?
विश्लेषणात्मक विशेष रिपोर्ट : भारत में पुलिस व्यवस्था का मूल उद्देश्य बेहद स्पष्ट है—कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध रोकना, नागरिकों की…
Read More »