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झारखण्ड

अनुकंपा नौकरी के लालच में बेटे ने रची पिता की हत्या की साजिश

संपादकीय

धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाले एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बीसीसीएल (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) के कर्मचारी तुलेश्वर नोनीयां की हत्या के मामले में पुलिस ने मृतक के बेटे सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने हर किसी को हैरान कर दिया है। पुलिस के अनुसार बेटे ने अपने पिता की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर बीसीसीएल में नौकरी पाने के लालच में यह पूरी साजिश रची थी और हत्या के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी।

तकनीकी जांच से खुला हत्या का राज

धनबाद पुलिस ने बताया कि मामले की जांच आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल कॉल डिटेल, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस तथा अन्य वैज्ञानिक जांच के आधार पर की गई। इसी दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर हत्या की पूरी साजिश का खुलासा संभव हो सका। गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

20 जून को झाड़ियों में मिला था शव

घटना का खुलासा उस समय हुआ जब 20 जून की सुबह चिटाही-बरोरा पीसीसी सड़क के किनारे झाड़ियों में एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।

पहचान होने पर मृतक बीसीसीएल कर्मी तुलेश्वर नोनीयां निकले। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। बाघमारा एसडीपीओ अजीत कुमार विमल के नेतृत्व में गठित टीम ने विभिन्न पहलुओं पर गहन जांच शुरू की।

अनुकंपा नौकरी बना हत्या का कारण

जांच के दौरान पुलिस को जो तथ्य मिले, वे बेहद चौंकाने वाले थे। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सामने आया कि मृतक के बेटे विजय नोनीयां ने अपने पिता की मृत्यु के बाद बीसीसीएल में अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से हत्या की पूरी योजना तैयार की थी।

पुलिस के अनुसार विजय ने अपने परिचित अखिलेश मल्लाह और अमित कुमार सिंह को हत्या की सुपारी दी थी। इसके लिए लगभग 10 लाख रुपये देने का सौदा तय किया गया था।

पत्थर से हमला कर की गई हत्या

पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से तुलेश्वर नोनीयां को निशाना बनाया। उन पर भारी पत्थर से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद अपराधियों ने शव को सड़क किनारे झाड़ियों में फेंक दिया ताकि घटना सामान्य हत्या या दुर्घटना जैसी दिखाई दे और पुलिस की जांच भटक जाए।

हालांकि पुलिस ने वैज्ञानिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।

महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद

गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त कई महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं। इनमें शामिल हैं—

  • हत्या में इस्तेमाल किया गया खून से सना पत्थर।
  • घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल।
  • आरोपियों के रक्तरंजित कपड़े।
  • मृतक का गमछा।
  • मोबाइल फोन एवं अन्य डिजिटल साक्ष्य।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद साक्ष्यों और आरोपियों के बयान से स्पष्ट हो गया है कि यह हत्या पूरी तरह पूर्व नियोजित थी।

रिश्तों पर लालच भारी पड़ा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले ने यह साबित कर दिया कि आर्थिक लाभ और नौकरी की चाहत ने एक बेटे को इस हद तक पहुंचा दिया कि उसने अपने ही पिता की हत्या की साजिश रच डाली। जिस पिता ने अपने परिवार के लिए जीवनभर मेहनत की, उसी की मौत की योजना उसके बेटे ने बनाई।

तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में

मामले में मुख्य आरोपी विजय नोनीयां, सुपारी किलर अखिलेश मल्लाह तथा अमित कुमार सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की जांच की हो रही सराहना

धनबाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी जांच के माध्यम से मामले का शीघ्र खुलासा होने की सराहना की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और टीमवर्क की बदौलत इस जघन्य अपराध का पर्दाफाश संभव हो पाया।

समाज के लिए गंभीर चेतावनी

यह घटना केवल एक हत्या नहीं बल्कि सामाजिक मूल्यों के क्षरण का भी संकेत देती है। अनुकंपा नियुक्ति जैसी मानवीय व्यवस्था का उद्देश्य परिवार को आर्थिक सहारा देना होता है, लेकिन यदि इसी व्यवस्था का दुरुपयोग करने के लिए हत्या जैसी साजिश रची जाए तो यह पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

धनबाद का यह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, आधुनिक जांच तकनीकों और पुलिस की सतर्कता के सामने अपराधियों का बच पाना आसान नहीं है।

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