ईसीएल मुख्यालय में राजस्व कार्मिकों के लिए तीन दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण
सरबजीत सिंह

सांकतोरिया-आसनसोल : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के मुख्यालय में 22 जून 2026 से राजस्व कार्मिकों के लिए तीन दिवसीय तकनीकी एवं पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। भूमि राजस्व एवं संपदा (एलआरई) विभाग द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य भूमि प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण तथा राजस्व संबंधी कार्यों में लगे कर्मचारियों के तकनीकी ज्ञान, कानूनी समझ और कार्यकुशलता को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन ईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाप्रबंधक (एचआरडी) एवं महाप्रबंधक (एलआरई) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने अपने संबोधन में खनन परियोजनाओं के सफल संचालन, वैधानिक अनुपालन और विभिन्न हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में राजस्व कार्मिकों की अहम भूमिका को रेखांकित किया।
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Toggleभूमि अधिग्रहण नीतियों पर विस्तृत चर्चा
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में महाप्रबंधक (एलआरई) सरोज कांती साहाना ने ईसीएल की भूमि अधिग्रहण एवं भूमि कब्जा संबंधी नीतियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि संगठन की भूमि संबंधी गतिविधियों के प्रभावी संचालन में राजस्व कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भूमि प्रबंधन से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं तथा कर्मचारियों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
दूसरे सत्र में श्री साहाना ने कोल माइन्स (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1973 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अधिनियम की पृष्ठभूमि, क्रियान्वयन प्रक्रिया, खदान एवं स्वामित्व की परिभाषा तथा अधिनियम के अंतर्गत आने वाली संपत्तियों के प्रबंधन में राजस्व कार्मिकों की जिम्मेदारियों को विस्तार से समझाया।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी
भोजनोपरांत आयोजित सत्र में वरिष्ठ प्रबंधक (एलआरई) दीपक कुमार हलदार ने ईसीएल द्वारा अपनाई जाने वाली भूमि अधिग्रहण एवं कब्जा प्राप्ति की विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने देवोत्तर, पीरोत्तर एवं पट्टा भूमि जैसी विभिन्न श्रेणियों की भूमि की अवधारणाओं को स्पष्ट करते हुए उनके अधिग्रहण एवं प्रबंधन से जुड़ी कंपनी की नीतियों और प्रक्रियाओं की विस्तृत व्याख्या की।
उन्होंने प्रतिभागियों को भूमि संबंधी मामलों के समाधान, दस्तावेजीकरण तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया।
सर्वेक्षण एवं राजस्व प्रबंधन पर विशेष सत्र
दिन के अंतिम तकनीकी सत्र में वरिष्ठ प्रबंधक (सर्वेक्षण) के. सी. सामंता ने राजस्व एवं सर्वेक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की। उन्होंने लीजहोल्ड क्षेत्र, खनन पट्टों, परियोजना सीमाओं, सुरक्षा क्षेत्रों तथा सर्वेक्षण संबंधी विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की।
उन्होंने यह भी बताया कि एक समग्र एवं व्यवस्थित राजस्व योजना का रखरखाव परिचालन दक्षता बढ़ाने और वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को राजस्व अभिलेखों के व्यवस्थित संधारण और नियमित अद्यतन की आवश्यकता पर भी बल दिया।
24 जून तक जारी रहेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 24 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान भूमि, राजस्व, खनन कानूनों एवं वैधानिक प्रावधानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य राजस्व कर्मियों को नवीनतम नियमों, प्रक्रियाओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं से अवगत कराना तथा उनकी व्यावसायिक क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाना है।
ईसीएल प्रबंधन का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्मचारियों के कौशल विकास, ज्ञानवर्धन और परिचालन उत्कृष्टता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह पहल संगठन की क्षमता निर्माण और सतत सुधार के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
आगामी सत्रों में विशेषज्ञों का मिलेगा मार्गदर्शन
प्रशिक्षण कार्यक्रम के आगामी सत्र 23 और 24 जून को आयोजित किए जाएंगे, जिनमें भूमि प्रबंधन, भूमि सुधार कानून, राजस्व प्रशासन तथा कानूनी प्रक्रियाओं पर प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए जाएंगे।
इन विशेषज्ञों में उत्पल साहा (उप मंडलीय भूमि एवं भूमि सुधार अधिकारी, बोंगांव, पश्चिम बंगाल), अब्दुल मन्नान (पूर्व उप जिला भूमि एवं भूमि सुधार अधिकारी, बीरभूम, पश्चिम बंगाल), तपन चटर्जी (वरिष्ठ अधिवक्ता, आसनसोल जिला न्यायालय) तथा इंद्रनील मुखर्जी (उप प्रबंधक, एलआरई, ईसीएल) शामिल हैं।
ईसीएल का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राजस्व प्रबंधन और भूमि प्रशासन से जुड़े कर्मियों की दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में संगठन की परियोजनाओं के बेहतर संचालन और वैधानिक अनुपालन को और मजबूती मिलेगी।













