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जन दर्शन- विकास

स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर डीडीसी सख्त

संपादकीय

धनबाद :  जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने कई प्रखंडों के एमओआईसी (मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज) के कार्यों पर भारी नाराजगी जताई और स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जो अधिकारी अपने कार्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में रुचि नहीं ले रहे हैं, वे कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

समीक्षा बैठक के दौरान डीडीसी ने स्वास्थ्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि अब कार्यशैली बदलने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों से पूरी लगन और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने को कहा।

स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार नहीं होने पर जताई नाराजगी

बैठक में डीडीसी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ बनाने के लिए हर संभव संसाधन और सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूचकांकों में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से:

  • संस्थागत प्रसव,
  • एनएसवी (पुरुष नसबंदी),
  • प्रथम ट्राइमेस्टर जांच,
  • और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की खराब प्रगति पर असंतोष जताया।

डीडीसी ने कहा कि यदि संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद स्वास्थ्य केंद्र बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, तो इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

माइक्रो लेवल प्लानिंग पर जोर

उप विकास आयुक्त ने सभी एमओआईसी को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने प्रखंडों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए माइक्रो लेवल प्लानिंग करें।

उन्होंने कहा कि:

  • प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी की जिम्मेदारी तय की जाए,
  • नियमित मॉनिटरिंग हो,
  • और ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं।

इसके साथ ही उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक कर स्वास्थ्य योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी साझा करने का निर्देश भी दिया।

निजी अस्पतालों की जांच के आदेश

बैठक में डीडीसी ने प्रखंड स्तर पर संचालित निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि:

  • यदि किसी निजी अस्पताल में अनियमितता पाई जाती है,
  • तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।

प्रशासन का उद्देश्य आम लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

कई स्वास्थ्य योजनाओं की हुई समीक्षा

समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की गई। इनमें प्रमुख रूप से:

  • हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर,
  • संस्थागत प्रसव,
  • कुपोषण उपचार केंद्र,
  • राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम,
  • परिवार नियोजन,
  • ई-संजीवनी,
  • राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम,
  • एनयूएचएम,
  • मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लिनिक,
  • और अटल मोहल्ला क्लीनिक शामिल रहे।

डीडीसी ने सभी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्य करने का निर्देश दिया।

सदर अस्पताल में तीन माह में 33 हजार से अधिक मरीजों का इलाज

बैठक में डॉ आलोक विश्वकर्मा ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

उन्होंने बताया कि:

  • फरवरी माह में सदर अस्पताल में 10,748 मरीजों का उपचार किया गया,
  • मार्च में 9,806 मरीजों का इलाज हुआ,
  • जबकि अप्रैल माह में 12,942 लोगों को चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई।

इस प्रकार तीन महीनों में कुल 33,496 मरीजों का उपचार किया गया।

सिविल सर्जन ने कहा कि गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर सदर अस्पताल रेफर किया जाएगा तथा प्रत्येक माह संबंधित आंकड़े सिविल सर्जन कार्यालय को उपलब्ध कराए जाएंगे।

एनीमिया मुक्त भारत अभियान में धनबाद राज्य में प्रथम

बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई। सिविल सर्जन ने बताया कि “एनीमिया मुक्त भारत” अभियान में धनबाद जिले ने पूरे झारखंड में पहला स्थान हासिल किया है।

उन्होंने जानकारी दी कि:

  • अब तक 102 विशेष स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए जा चुके हैं,
  • जिनके माध्यम से लोगों की जांच और उपचार किया गया।

इसके अलावा फाइलेरिया, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई।

अधिकारियों को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने का निर्देश

डीडीसी सन्नी राज ने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल बैठकों से नहीं बल्कि फील्ड स्तर पर सक्रिय कार्यशैली से संभव है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि:

  • अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित निरीक्षण करें,
  • समस्याओं की पहचान करें,
  • और समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सीधे आम जनता के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

समीक्षा बैठक में:

  • उप विकास आयुक्त सन्नी राज,
  • सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा,
  • उपाधीक्षक डॉ संजीव कुमार प्रसाद,
  • डीआरसीएचओ डॉ रोहित गौतम,
  • डीपीएम श्रीमती प्रतिमा कुमारी,
  • सभी प्रखंडों के एमओआईसी,
  • तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक के अंत में प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अब जवाबदेही तय की जाएगी और खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।

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