निजीकरण के खिलाफ मजदूरों की एकजुटता पर जोर, सदस्यता अभियान को सफल बनाने का आह्वान
सरबजीत सिंह

निरसा: कोल माइन्स वर्कर्स यूनियन (सीएमडब्ल्यूयू) की मुगमा एरिया कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को सेंट्रलपुर स्थित यूनियन कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता यूनियन के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने की, जबकि संचालन एरिया सचिव जगदीश शर्मा ने किया।
बैठक को संबोधित करते हुए यूनियन के महासचिव कृष्णा सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोयला उद्योग में निजीकरण की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और श्रमिकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए लेबर कोड लागू किए हैं, जिससे मजदूरों के कई पारंपरिक अधिकार प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कोयला क्षेत्र के श्रमिकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर संघर्ष को तेज करना होगा। विशेष रूप से मुगमा एरिया के मजदूरों से एकजुटता के साथ यूनियन गतिविधियों को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
बैठक में वर्ष 2026 के सदस्यता अभियान को सफल बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि जून से अगस्त तक चलने वाले सदस्यता अभियान के दौरान निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में पूरा किया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न कोलियरियों में शाखा स्तरीय कमेटियों के गठन की प्रक्रिया को भी तेज करने पर सहमति बनी।
बैठक में ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू) के पूर्व महासचिव दिवंगत कॉमरेड स्वप्न मुखर्जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आगामी 8 सितंबर को मुगमा एरिया सम्मेलन आयोजित करने के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित नेताओं ने सम्मेलन को व्यापक और सफल बनाने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर हरेंद्र सिंह, नागेंद्र कुमार, काशीनाथ कोयरी, बीपीन मंडल, संजीत राउत, रंजीत मोदी, सुनील गिरि, संजय सिंह, मुख्तार अंसारी, परेश माझी, इमरान अंसारी, महेंद्र यादव, हरेराम, विश्वजीत महतो, मनोज बाउरी, कृष्णदेव गोराई, सुजीत मोदी, उमाकांत सोरेन, बिमल मलिक, तसिमुदीन अंसारी, सोनू कुमार, अजीत मंडल, लखी कांत सिंह, मंगलू, कुर्मी, अर्जुन नोनिया, राजू मुंडा, दानवीर चौहान, गोपाल राय, गणेश, नील बाउरी, जोगिंदर सहित बड़ी संख्या में यूनियन सदस्य उपस्थित थे।
बैठक के अंत में मजदूर एकता को मजबूत करने तथा कोयला क्षेत्र में श्रमिक हितों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया।













