धनबाद में SIR प्रक्रिया पर सवाल: मतदान केंद्रों से गायब BLO
शिकायतों के बावजूद नहीं उठ रहे फोन, लोगों में बढ़ता आक्रोश

धनबाद : जिले में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। 23 मई से सभी मतदान केंद्रों पर “अनमैप्ड वोटरों” की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश जारी होने के बावजूद कई मतदान केंद्रों पर अब तक सूची नहीं लगाई गई है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी (DEO) के सख्त निर्देशों के बाद भी बड़ी संख्या में बीएलओ (Booth Level Officer) अपने-अपने मतदान केंद्रों से गायब बताए जा रहे हैं, जिससे आम मतदाताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि:
- कई मतदान केंद्रों पर न तो BLO मौजूद हैं,
- न ही मतदाता सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की गई है,
- और शिकायत करने पर भी जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं।
फोन नहीं उठा रहे BLO, कई छुट्टी पर होने की सूचना
मतदाताओं और स्थानीय लोगों के अनुसार जब संबंधित BLO से संपर्क करने की कोशिश की जाती है तो:
- कई अधिकारी फोन रिसीव नहीं करते,
- कई नंबर लगातार बंद मिलते हैं,
- जबकि कुछ के बारे में यह जानकारी मिल रही है कि वे छुट्टी पर चले गए हैं।
लोगों का कहना है कि चुनाव आयोग द्वारा बार-बार बैठकों के माध्यम से ERO और BLO को जिम्मेदारियों की जानकारी दी जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद कमजोर दिखाई दे रही है।

मतदाताओं का आरोप है कि मतदान केंद्रों पर जरूरी सूचनाएं नहीं मिलने के कारण:
- नाम सत्यापन,
- अनमैप्ड वोटरों की जांच,
- और मतदाता सूची संबंधी प्रक्रियाओं में बाधा आ रही है।
ERO और BDO पर भी उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब वे ERO (Electoral Registration Officer) से संपर्क करते हैं तो उन्हें BDO कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। वहीं BDO कार्यालय में फोन करने पर कई बार संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
कुछ लोगों का आरोप है कि:
- अधिकारियों का रवैया आम जनता के प्रति संवेदनशील नहीं है,
- शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा,
- और हेल्पलाइन व्यवस्था भी प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रही।
लोगों ने यह भी कहा कि सरकारी वेबसाइटों पर जारी कई संपर्क नंबरों पर फोन करने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं किए जाते, जिससे आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
प्रशासनिक कार्यशैली पर उठने लगे राजनीतिक सवाल
जिले में प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये को लेकर अब राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो रही है कि यदि सरकारी अधिकारियों का व्यवहार जनता के प्रति ऐसा ही बना रहा तो इसका असर सरकार की छवि पर भी पड़ सकता है।
कुछ लोगों ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि:
- जनता की समस्याओं की अनदेखी,
- प्रशासनिक उदासीनता,
- और अधिकारियों की जवाबदेही की कमी
किसी भी सरकार के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासनिक शिकायतों और चुनावी परिणामों को सीधे जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी, लेकिन जनता की नाराजगी को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।
चुनाव आयोग लगातार कर रहा निगरानी
सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। ERO और BLO को:
- मतदाता सूची अद्यतन,
- अनमैप्ड वोटरों की पहचान,
- और मतदान केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
इसके बावजूद कई इलाकों में जमीनी हकीकत अलग दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो मतदाताओं को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

हेल्पलाइन व्यवस्था पर भी सवाल
जनता का आरोप है कि:
- कई सरकारी हेल्पलाइन नंबर काम नहीं करते,
- अधिकारियों से सीधा संपर्क मुश्किल है,
- और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया जटिल बनी हुई है।
लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन:
- सभी BLO की उपस्थिति सुनिश्चित करे,
- मतदान केंद्रों पर सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कराए,
- हेल्पलाइन व्यवस्था को सक्रिय बनाए,
- और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे।
जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
- SIR प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए,
- मतदान केंद्रों पर नियमित मॉनिटरिंग हो,
- और जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए।
लोगों का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाता सूची सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है और यदि इसी स्तर पर लापरवाही होगी तो जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है।
फिलहाल धनबाद में SIR प्रक्रिया को लेकर बढ़ती शिकायतों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और चुनावी अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है कि वे इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं।













