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जागरूकता-विकास

बांग्ला भाषा और मातृभाषा में शिक्षा के मुद्दे पर विधायक राज सिन्हा को सौंपा गया ज्ञापन

झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति ने विधानसभा में बांग्ला भाषियों के संवैधानिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की आवाज बुलंद करने की अपील की

धनबाद I क्षेत्रीय संवाददाता: झारखंड विधानसभा के आगामी सत्र से पहले झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति ने बांग्ला भाषी समाज के अधिकारों को लेकर अपनी पहल तेज कर दी है। समिति की कार्यकारी सभापति रीना मंडल ने सोमवार को धनबाद विधानसभा क्षेत्र के विधायक राज सिन्हा से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में झारखंड में बांग्ला भाषा, मातृभाषा में शिक्षा, बांग्ला अकादमी की स्थापना तथा बांग्ला भाषी समाज के संवैधानिक एवं शैक्षणिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया गया।

समिति की ओर से कहा गया कि 5 अगस्त से झारखंड विधानसभा का सत्र प्रारंभ होने जा रहा है, ऐसे में यह उपयुक्त समय है जब बांग्ला भाषी समाज की लंबे समय से लंबित मांगों को सदन में प्रभावी ढंग से रखा जाए। ज्ञापन में उम्मीद जताई गई कि विधायक राज सिन्हा इन मुद्दों को गंभीरता से उठाकर उनके समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल करेंगे।

मातृभाषा में शिक्षा पर दिया गया विशेष जोर

समिति ने अपने ज्ञापन में कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। बांग्ला भाषी विद्यार्थियों के लिए विद्यालयों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता तथा शिक्षकों की नियुक्ति जैसे विषयों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने की मांग की गई।

समिति का मानना है कि मातृभाषा में शिक्षा न केवल विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास को बढ़ावा देती है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और भाषाई विरासत को भी सुरक्षित रखने का माध्यम बनती है।

बांग्ला अकादमी की स्थापना की मांग

ज्ञापन में झारखंड में बांग्ला अकादमी की स्थापना की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। समिति का कहना है कि अकादमी के गठन से बांग्ला भाषा, साहित्य, संस्कृति, कला और शोध कार्यों को संस्थागत प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही राज्य के बांग्ला साहित्यकारों, कलाकारों और शोधकर्ताओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का एक सशक्त मंच प्राप्त होगा।

संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर बल

श्रीमती रीना मंडल ने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में बांग्ला भाषी परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं और राज्य के सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उनके संवैधानिक एवं शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विधायक राज सिन्हा विधानसभा में बांग्ला भाषी समाज की समस्याओं, मांगों और अधिकारों को मजबूती से उठाएंगे तथा उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास करेंगे।

लोकतांत्रिक तरीके से अधिकारों की लड़ाई जारी

समिति ने स्पष्ट किया कि वह लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखती है और बांग्ला भाषा, संस्कृति तथा मातृभाषा में शिक्षा के अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं वैधानिक तरीके से निरंतर प्रयास करती रहेगी।

समिति के अनुसार, भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का आधार होती है। इसलिए भाषाई विविधता का संरक्षण राज्य और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

आगामी विधानसभा सत्र से उम्मीदें

समिति ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र बांग्ला भाषी समाज की समस्याओं और मांगों को सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। यदि इन मुद्दों पर सदन में सकारात्मक चर्चा होती है तो राज्य के लाखों बांग्ला भाषी नागरिकों को इसका लाभ मिल सकता है।

समिति ने यह भी उम्मीद जताई कि राज्य सरकार भाषाई विविधता के संरक्षण और मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

ये रहीं प्रमुख मांगें

  • झारखंड में बांग्ला भाषा को उचित संस्थागत संरक्षण प्रदान किया जाए।
  • मातृभाषा में शिक्षा की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  • राज्य में बांग्ला अकादमी की स्थापना की जाए।
  • बांग्ला भाषी समाज के संवैधानिक एवं शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
  • विधानसभा में इन सभी मुद्दों पर व्यापक चर्चा कर आवश्यक नीतिगत निर्णय लिए जाएं।

बैठक में ये सदस्य रहे उपस्थित

इस अवसर पर झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति की सदस्य जॉली मुखर्जी, आरती साह एवं शिल्पी घोष भी उपस्थित रहीं। सभी ने संयुक्त रूप से विधायक राज सिन्हा से बांग्ला भाषी समाज की समस्याओं को विधानसभा में मजबूती के साथ उठाने और उनके समाधान के लिए पहल करने का अनुरोध किया।

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