विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर धनबाद में “चुप्पी तोड़ो स्वस्थ रहो” अभियान की शुरुआत,
सरबजीत सिंह

धनबाद-तोपचांची : विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” कार्यक्रम के अंतर्गत “चुप्पी तोड़ो स्वस्थ रहो” अभियान की विधिवत शुरुआत तोपचांची प्रखंड कार्यालय सभागार में की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रखंड प्रमुख आनंद महतो, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती स्नेह कश्यप, अंचल अधिकारी, यूनिसेफ की सहयोगी संस्था लीड्स के प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, किशोरियां एवं आंगनवाड़ी कर्मी उपस्थित थीं।
कार्यक्रम के दौरान विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि राज्य सरकार एवं यूनिसेफ के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और महिला स्वास्थ्य को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और स्वच्छता को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार गांव-गांव तक इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, ताकि माहवारी से जुड़े भ्रम और झिझक को खत्म किया जा सके।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती स्नेह कश्यप ने बताया कि धनबाद, झारखंड का पहला जिला बन गया है जहां किशोरियों की पहली माहवारी की शुरुआत को एक उत्सव के रूप में मनाने की पहल की गई है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य किशोरियों में माहवारी स्वच्छता, सुरक्षित निपटान और बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने जानकारी दी कि अब प्रत्येक माह की 28 तारीख को जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में माहवारी स्वच्छता दिवस को उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य विषय “बाहा-जोआक संस्कार” यानी पहली माहवारी की शुरुआत को सकारात्मक रूप से स्वीकार करना था। इसके माध्यम से किशोरियों को यह संदेश दिया गया कि माहवारी कोई शर्म या डर की बात नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन की एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। कार्यक्रम में माहवारी स्वच्छता, सेनेटरी उत्पादों के सुरक्षित उपयोग, साफ-सफाई, पोषणयुक्त भोजन और सुरक्षित निपटान पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रखंड प्रमुख आनंद महतो ने कहा कि माहवारी के दौरान स्वच्छता के साथ-साथ उपयोग किए गए सेनेटरी उत्पादों का सुरक्षित निपटान भी बेहद आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में इस विषय पर और अधिक जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में अंचल अधिकारी ने भी माहवारी से जुड़े सामाजिक भ्रम और भ्रांतियों पर चर्चा करते हुए किशोरियों को खुलकर अपनी स्वास्थ्य समस्याओं पर बात करने के लिए प्रेरित किया। वहीं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने “चुप्पी तोड़ो स्वस्थ रहो” अभियान के उद्देश्यों और इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का सबसे विशेष और भावुक क्षण तब आया जब तीन किशोरियों, जिनकी हाल ही में पहली माहवारी शुरू हुई थी, का पारंपरिक “बाहा-जोआक संस्कार” कराया गया। इस पहल को उपस्थित लोगों ने काफी सराहा। झारखंड में पहली बार इस तरह का आयोजन होने से यह कार्यक्रम महिला स्वास्थ्य और सम्मान की दिशा में एक नई सोच के रूप में सामने आया।

आयोजन के दौरान यह संदेश दिया गया कि माहवारी को लेकर समाज में फैली चुप्पी और झिझक को खत्म करना बेहद जरूरी है। महिलाओं और किशोरियों को उनके स्वास्थ्य अधिकारों के प्रति जागरूक करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के माध्यम से यह भी बताया गया कि सही जानकारी और स्वच्छता अपनाकर कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।
कार्यक्रम में जिले के सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, महिला पर्यवेक्षिकाएं, आंगनवाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं, ग्रामीण महिलाएं तथा बड़ी संख्या में किशोरियां मौजूद थीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान महिला स्वास्थ्य, सम्मान और स्वच्छता को लेकर सकारात्मक संवाद देखने को मिला, जिसने समाज में एक नई जागरूकता का संदेश दिया।













