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बिहार

राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने का अंतिम नोटिस

क्षेत्रीय संवाददाता

पटना: बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को पटना स्थित सरकारी आवास 10, सर्कुलर रोड खाली करने के लिए भवन निर्माण विभाग ने अंतिम नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नोटिस प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर सरकारी आवास खाली करना होगा। निर्धारित समय-सीमा के बाद भी आवास खाली नहीं करने की स्थिति में बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली एवं बेदखली) (संशोधन) अधिनियम, 2024 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

नए आवास के आवंटन के बावजूद पुराना बंगला नहीं छोड़ा

भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, राबड़ी देवी को 25 नवंबर 2025 को बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आवास संख्या-39, हार्डिंग रोड आवंटित किया गया था। विभाग का कहना है कि नए सरकारी आवास के आवंटन के बावजूद वह अब भी पूर्व में आवंटित 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले में रह रही हैं, जिससे सरकारी आवास आवंटन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

अब मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित हो चुका है बंगला

विभाग ने अपने नोटिस में बताया है कि 27 मई 2026 के आदेश के तहत 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है। हालांकि, बंगला अब तक खाली नहीं होने के कारण मंत्री को उसका वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका है। इससे प्रशासनिक कार्यों में भी असुविधा उत्पन्न हो रही है।

पहले भी भेजे जा चुके हैं कई नोटिस

भवन निर्माण विभाग ने बताया कि यह पहला नोटिस नहीं है। राबड़ी देवी को इससे पहले भी कई बार सरकारी आवास खाली करने के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं।

विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार—

  • 15 दिसंबर 2025 को पहला नोटिस जारी किया गया।
  • 17 अप्रैल 2026 को दोबारा सूचना भेजी गई।
  • 29 मई 2026 को उनके आप्त सचिव के माध्यम से पुनः पत्र भेजा गया।
  • 3 जून 2026 को सात दिनों के भीतर आवास खाली करने का निर्देश दिया गया।

इसके बावजूद अब तक आवास खाली नहीं किए जाने पर विभाग ने इसे अंतिम नोटिस बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

अधिनियम के तहत बेदखली की चेतावनी

भवन निर्माण विभाग ने बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली एवं बेदखली) (संशोधन) अधिनियम, 2024 की धारा 4(ख) का उल्लेख करते हुए कहा है कि यदि सात दिनों के भीतर सरकारी बंगला खाली नहीं किया जाता है, तो विभाग नियमानुसार बेदखली की प्रक्रिया शुरू करेगा। साथ ही अन्य प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा

राबड़ी देवी को जारी अंतिम नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में सरकारी आवास का मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। सत्ता पक्ष इसे सरकारी नियमों के पालन का मामला बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनावों से पहले इस प्रकार के प्रशासनिक फैसले राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राबड़ी देवी निर्धारित समय-सीमा के भीतर सरकारी आवास खाली करती हैं या मामला कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के अगले चरण तक पहुंचता है।

सबकी निगाहें अगले कदम पर

भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी अंतिम नोटिस के बाद अब सभी की नजर राबड़ी देवी की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि निर्धारित सात दिनों के भीतर आवास खाली कर दिया जाता है तो विवाद समाप्त हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं होने पर राज्य सरकार को कानून के तहत आगे की कार्रवाई करनी पड़ सकती है। ऐसे में यह मामला केवल सरकारी आवास तक सीमित न रहकर बिहार की राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बनने की संभावना रखता है।

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