निरसा एलिवेटेड रोड परियोजना में पारदर्शिता की मांग तेज:
सरबजीत सिंह

चार सूत्री मांगपत्र के साथ समिति ने जनभागीदारी पर दिया जोर, कहा— वर्षों के जनसंघर्ष से मिली परियोजना में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो
निरसा : धनबाद जिले के निरसा में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर निरसा नागरिक समिति ने शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में परियोजना के क्रियान्वयन और सूचना के अभाव पर गंभीर सवाल उठाए। समिति ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा अन्य संबंधित विभागों से परियोजना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और स्थानीय जनता की सहभागिता बढ़ाने की मांग की।
समिति का कहना है कि निरसा एलिवेटेड रोड केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि लगभग डेढ़ दशक तक चले जनआंदोलन, कानूनी संघर्ष और स्थानीय नागरिकों की सामूहिक आवाज का परिणाम है। ऐसे में परियोजना से जुड़ी प्रत्येक महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
2008 में जनहित के उद्देश्य से हुआ था समिति का गठन
प्रेस वार्ता में समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2008 में निरसा क्षेत्र के समग्र विकास और जनहित के उद्देश्य से निरसा नागरिक समिति का गठन किया गया था।
गठन के बाद समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (वर्तमान NH-19) के प्रस्तावित छह लेन विस्तार का शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध किया। समिति का तर्क था कि निरसा क्षेत्र भूमिगत कोयला आग, खुली खदानों और भूमि धंसान जैसी गंभीर समस्याओं से प्रभावित है, इसलिए सामान्य सड़क निर्माण भविष्य में सुरक्षित और टिकाऊ समाधान नहीं हो सकता।
इसी कारण समिति लगातार सामान्य सड़क के स्थान पर एलिवेटेड रोड के निर्माण की मांग उठाती रही।
स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर तक उठाई गई आवाज
समिति के अनुसार, इस मांग को स्थानीय स्तर से लेकर राज्य सरकार, केंद्र सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, कोयला मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय तक लगातार पहुंचाया गया।
समिति ने बताया कि वर्षों के दौरान विभिन्न मंत्रालयों को ज्ञापन, तकनीकी रिपोर्ट, सुझाव और पत्र भेजे गए। संसद और राज्यसभा के माध्यम से भी इस विषय को उठाया गया, जिसके परिणामस्वरूप अंततः निरसा में एलिवेटेड रोड परियोजना को स्वीकृति मिली।
समिति ने इस उपलब्धि को पूरे निरसा क्षेत्र की जनता, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, जनप्रतिनिधियों और आंदोलन से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।
परियोजना के क्रियान्वयन पर उठे सवाल
हालांकि, समिति ने वर्तमान में परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर असंतोष भी व्यक्त किया।
प्रतिनिधियों का आरोप है कि जिस परियोजना के लिए वर्षों तक संघर्ष किया गया, उसी परियोजना के कार्यान्वयन में अब स्थानीय नागरिकों और समिति को पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है।
समिति का कहना है कि पहले परियोजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा नियमित पत्राचार किया जाता था, लेकिन अब परियोजना की प्रगति, तकनीकी स्वरूप और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की जा रही है।
जनता को जानने का है अधिकार
समिति ने कहा कि परियोजना का वास्तविक स्वरूप, निर्माण का दायरा, तकनीकी डिजाइन, भविष्य की योजना और संभावित प्रभावों की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से स्थानीय नागरिकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
समिति का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण जनहित परियोजना में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है ताकि नागरिकों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सके कि उनके क्षेत्र में किस प्रकार का निर्माण कार्य किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह नहीं होने पर जताई नाराजगी
प्रेस वार्ता में समिति ने यह भी आपत्ति जताई कि एलिवेटेड रोड परियोजना का निर्माण कार्य बिना किसी सार्वजनिक उद्घाटन समारोह और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता के शुरू कर दिया गया।
समिति ने इसे जनभावनाओं की अनदेखी बताते हुए कहा कि ऐसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत विधिवत उद्घाटन समारोह के माध्यम से होनी चाहिए थी, जिससे जनता को परियोजना की पूरी जानकारी भी मिलती।
NHAI और संबंधित मंत्रालयों के समक्ष रखीं चार प्रमुख मांगें
निरसा नागरिक समिति ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एवं संबंधित मंत्रालयों के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं—
- निरसा एलिवेटेड रोड परियोजना का विधिवत सार्वजनिक उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाए।
- प्रोटोकॉल के अनुसार क्षेत्र के सांसद, विधायक, जिला प्रशासन, संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा निरसा नागरिक समिति को उद्घाटन समारोह में आमंत्रित किया जाए।
- परियोजना का संपूर्ण तकनीकी एवं प्रशासनिक विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि नागरिकों को इसकी पूरी जानकारी मिल सके।
- निर्माण कार्य से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णयों एवं सूचनाओं को पारदर्शी तरीके से समय-समय पर जनता के समक्ष रखा जाए।
गोविंदपुर परियोजना का दिया उदाहरण
समिति ने गोविंदपुर एलिवेटेड रोड परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां परियोजना का विधिवत उद्घाटन किया गया था। समारोह में सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों को आमंत्रित किया गया था तथा स्थानीय सुझावों को भी महत्व दिया गया।
समिति का दावा है कि आज भी गोविंदपुर परियोजना से संबंधित समस्याओं के समाधान में प्रशासन स्थानीय सुझावों पर विचार कर निर्णय ले रहा है।
निरसा की उपेक्षा का आरोप
समिति ने सवाल उठाया कि जब गोविंदपुर जैसी परियोजना में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है, तो निरसा जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में ऐसा क्यों नहीं किया गया।
समिति का कहना है कि उद्घाटन समारोह का अभाव और स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नागरिक संगठनों को शामिल नहीं किए जाने से क्षेत्र की जनता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रही है।
लोकतांत्रिक परंपराओं के सम्मान की अपील
निरसा नागरिक समिति ने स्वयं को एक सामाजिक एवं गैर-राजनीतिक संगठन बताते हुए कहा कि उसका उद्देश्य केवल निरसा क्षेत्र का समग्र विकास और जनहित है।
समिति ने उम्मीद जताई कि NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा अन्य संबंधित विभाग लोकतांत्रिक परंपराओं, पारदर्शिता और जनभागीदारी की भावना का सम्मान करते हुए समिति की मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे।
समिति ने कहा कि यदि जनता की सहभागिता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाती है, तो निरसा एलिवेटेड रोड परियोजना न केवल क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगी, बल्कि सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास को भी मजबूत करेगी।













