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पर्यावरण

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर भारतीय रेल का हरित संकल्प

सरबजीत सिंह

कोलकाता-आसनसोल : विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय रेल ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने तथा सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देशव्यापी कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस वर्ष का आयोजन मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment) के सिद्धांतों को केंद्र में रखते हुए किया गया, जिसमें रेलवे कर्मचारियों, यात्रियों और आम नागरिकों के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

भारतीय रेल ने इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए सभी कर्मचारियों और हितधारकों को हरित एवं स्वच्छ भविष्य के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सतीश कुमार ने नई दिल्ली स्थित रेलवे बोर्ड मुख्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शपथ दिलाई। इस कार्यक्रम में भारतीय रेल के सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों सहित हजारों रेलकर्मी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

अपने संबोधन में सतीश कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पूरी दुनिया महसूस कर रही है और ऐसे समय में भारतीय रेल जैसी विशाल सार्वजनिक संस्था की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने रेल कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाएं तथा समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएं।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, वृक्षारोपण तथा अपशिष्ट प्रबंधन जैसी गतिविधियों को भारतीय रेल के नियमित कार्यकलापों का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न रेलवे इकाइयों और कर्मचारियों को इस अवसर पर ‘स्वच्छता पखवाड़ा 2025 पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया।

पूर्व रेलवे मुख्यालय फेयरली प्लेस, कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर ने प्रधान विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया। इस दौरान सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की सामूहिक शपथ ली।

शपथ के दौरान प्रदूषण को कम करने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने, जैव विविधता को बचाने तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी नीतियों के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पूर्व रेलवे के सभी मंडलों—हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा—में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसके अलावा रेलवे के विभिन्न कारखानों, प्रशिक्षण संस्थानों तथा रेलवे अस्पतालों में भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इन कार्यक्रमों के अंतर्गत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें रेलवे कर्मचारियों, अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। रेलवे परिसरों, स्टेशन क्षेत्रों, कॉलोनियों और संस्थानों में पौधे लगाए गए तथा उनकी नियमित देखभाल का संकल्प लिया गया।

इसके साथ-साथ स्वच्छता अभियान भी चलाए गए, जिनका उद्देश्य रेलवे परिसरों को साफ-सुथरा बनाए रखना और कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। रेलवे स्टेशनों और कार्यालय परिसरों में सफाई अभियान चलाकर कर्मचारियों और यात्रियों को स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संदेश दिया गया।

जागरूकता कार्यक्रमों के दौरान जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण, जल संरक्षण, ऊर्जा बचत तथा सतत जीवनशैली के महत्व पर विशेष व्याख्यान और चर्चाएं आयोजित की गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि वर्तमान पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुई, तो भविष्य में जल, वायु और प्राकृतिक संसाधनों की गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

कार्यक्रमों में मिशन लाइफ के सिद्धांतों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। मिशन लाइफ का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इसके तहत कम संसाधनों का उपयोग, ऊर्जा बचत, जल संरक्षण, पुनर्चक्रण और पर्यावरण-अनुकूल उपभोग को बढ़ावा दिया जाता है।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि भारतीय रेल लगातार हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। रेलवे स्टेशनों और कार्यालयों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है तथा जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों को अपनाया जा रहा है।

पूर्व रेलवे ने भी पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है। रेलवे परिसरों में हरित क्षेत्र का विस्तार, वर्षा जल संचयन, प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी कई योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान रेलवे अस्पतालों में भी पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के संबंधों पर जागरूकता अभियान चलाया गया। चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि स्वच्छ पर्यावरण सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। प्रदूषित वातावरण कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जबकि स्वच्छ और हरित वातावरण बेहतर स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिब राम माझि ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य हितधारकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी भारतीय रेल की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

उन्होंने बताया कि पूर्व रेलवे आने वाले समय में भी पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएगा। रेलवे प्रशासन का लक्ष्य केवल स्वच्छ रेलवे परिसर बनाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरण उत्पन्न करना भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रेल जैसी विशाल संस्था द्वारा पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दिए जाने से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। लाखों कर्मचारियों और करोड़ों यात्रियों से जुड़े इस नेटवर्क के माध्यम से पर्यावरणीय जागरूकता को व्यापक स्तर पर फैलाया जा सकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित यह अभियान भारतीय रेल की उस दीर्घकालिक सोच को प्रतिबिंबित करता है, जिसके तहत विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। रेलवे प्रशासन का मानना है कि स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए सभी नागरिकों को मिलकर प्रयास करना होगा।

भारतीय रेल और पूर्व रेलवे द्वारा आयोजित ये कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक साबित हुए, बल्कि उन्होंने यह भी संदेश दिया कि यदि सरकार, संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर कार्य करें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ और हरित भारत का निर्माण संभव है।

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