राजनीति
तेल कंपनियों के घाटे पर गोदी मीडिया का शोर, जनता पूछ रही — 44 लाख करोड़ टैक्स का हिसाब कौन देगा?
संपादकीय

नई दिल्ली : पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार और तथाकथित “गोदी मीडिया” विपक्ष के निशाने पर हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि टीवी चैनलों और सरकार समर्थक विश्लेषकों द्वारा लगातार यह नैरेटिव बनाया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है, इसलिए जनता को महंगाई “चुपचाप सहनी” चाहिए।












