धनबाद में पशु चिकित्सक से मारपीट का मामला गरमाया,
सरबजीत सिंह

सरकारी ड्यूटी के दौरान बलियापुर के प्रभारी पशु चिकित्सा पदाधिकारी के साथ मारपीट एवं धमकी का आरोप, अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की उठी मांग
धनबाद : धनबाद जिले के बलियापुर में सरकारी कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान एक पशु चिकित्सा पदाधिकारी के साथ कथित मारपीट, अभद्र व्यवहार और जान से मारने की धमकी दिए जाने की घटना को लेकर झारखंड पशु चिकित्सा सेवा संघ, जिला शाखा, धनबाद ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मामले को गंभीर बताते हुए संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन से मुलाकात कर दोषियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार के नेतृत्व में संघ का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त कार्यालय पहुंचा। इस दौरान संघ के पदाधिकारियों ने बलियापुर के प्रभारी पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रेमचंद साव के साथ हुई घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
संघ ने बताया कि डॉ. प्रेमचंद साव के साथ सरकारी दायित्वों का निर्वहन करते समय कथित रूप से मारपीट की गई, अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जान से मारने की धमकी दी गई तथा सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की गई।
दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से मांग की कि घटना में शामिल सभी आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए तथा उनके विरुद्ध लागू कानूनी धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
संघ का कहना है कि सरकारी सेवकों के साथ ड्यूटी के दौरान हिंसा और दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि इससे सरकारी कर्मचारियों का मनोबल भी प्रभावित होता है।
निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच पर जोर
संघ ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की भी मांग की। प्रतिनिधियों ने कहा कि दोषियों को शीघ्र कानून के दायरे में लाकर उचित दंड दिलाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अधिकारियों पर ड्यूटी के दौरान हमले की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे सरकारी कार्यों के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कार्यस्थल सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग
झारखंड पशु चिकित्सा सेवा संघ ने इस अवसर पर पशुपालन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
संघ ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा स्पष्ट कार्यस्थल सुरक्षा प्रोटोकॉल (Workplace Safety Protocol) लागू किए जाएं, जिससे भविष्य में सरकारी कार्यों के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
सरकारी सेवकों की सुरक्षा पर दिया जोर
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पशुपालन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण अभियान, रोग नियंत्रण कार्यक्रम तथा अन्य महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा, तो वे अधिक प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से अनुरोध किया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि आरोपियों के विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए दोषियों को कानून के अनुसार दंडित करेगा तथा भविष्य में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।













