पश्चिम बंगाल की सेवानिवृत्त बुज़ुर्ग सेक्स वर्कर्स: सामाजिक–आर्थिक संघर्ष और INSIGHT की मदद
संपादकीय

पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल के महानगरों और छोटे कस्बों की संकरी गलियों में आज भी कई ऐसी महिलाएँ रहती हैं, जिन्होंने अपना अधिकांश जीवन देह व्यापार में बिताया। उम्र ढलने के साथ ये महिलाएँ न केवल नियमित आय से वंचित हो गई हैं, बल्कि सामाजिक बहिष्कार, स्वास्थ्य समस्याओं और पहचान से जुड़ी जटिलताओं से भी जूझ रही हैं। इन्हें न तो परिवार का सहारा है और न ही पर्याप्त सरकारी सहायता।
इन बुज़ुर्ग महिलाओं की सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक असुरक्षा है। अधिकांश के पास न बचत है, न पेंशन और न ही कोई स्थायी आजीविका। पहचान पत्र, बैंक खाता या राशन कार्ड जैसे मूल दस्तावेज़ों के अभाव में वे कई सरकारी योजनाओं से भी बाहर रह जाती हैं। बढ़ती उम्र के साथ गठिया, मधुमेह, हृदय रोग और मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ आम हैं, परंतु इलाज करवा पाना इनके लिए बेहद कठिन हो जाता है।
सामाजिक कलंक भी इनके जीवन को और मुश्किल बना देता है। समाज से अलग-थलग पड़ी ये महिलाएँ अकेलेपन और मानसिक तनाव का सामना करती हैं। कई बार स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी कार्यालयों में भी उन्हें भेदभाव का अनुभव करना पड़ता है, जिससे वे सहायता लेने से हिचकती हैं।
इन चुनौतियों के बीच Indian Socio Income and Grievance Helping Trust (INSIGHT) ने एक मानवीय पहल करते हुए इन बुज़ुर्ग महिलाओं की मदद के लिए कदम बढ़ाया। INSIGHT ने हाल ही में आयोजित एक सहयोग कार्यक्रम के दौरान 30 बुज़ुर्ग महिलाओं को साड़ी वितरित की और उन्हें हाथों-हाथ कुछ आर्थिक सहायता भी प्रदान की। इस पहल का उद्देश्य केवल वस्त्र या धन देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान और अपनापन महसूस कराना था।
INSIGHT के प्रतिनिधियों ने बताया कि संगठन का प्रयास है कि इन महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद की जाए—दस्तावेज़ बनवाने, सरकारी योजनाओं से जोड़ने, स्वास्थ्य सहायता और परामर्श सेवाओं तक उनकी पहुँच सुनिश्चित करने के माध्यम से।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और एनजीओ का मानना है कि यदि सरकार, नागरिक समाज और स्थानीय संस्थाएँ मिलकर काम करें, तो इन महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार लाया जा सकता है। दस्तावेज़ीकरण, विशेष पेंशन योजनाएँ, स्वास्थ्य बीमा और सामुदायिक पुनर्वास केंद्र जैसी पहलें उन्हें सम्मानजनक जीवन दे सकती हैं।
एक बुज़ुर्ग महिला के शब्दों में—
“हमें सिर्फ इज़्ज़त चाहिए। खाना, इलाज और साथ — बस यही चाहिए।”
इन शब्दों में छिपी सच्चाई यह याद दिलाती है कि समाज की यह उपेक्षित आबादी भी गरिमा और सुरक्षा की हक़दार है। INSIGHT की यह पहल एक छोटी शुरुआत है, जो यह दर्शाती है कि सही दिशा में उठाया गया कदम कई ज़िंदगियों में उम्मीद जगा सकता है।












