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प्रेरणा/बधाईयां

लोहरदगा- ग्राम कुटमू वासियों ने मनाया भगवान बिरसा मुंडा शहादत दिवस !!!

नूतन कश्यप

लोहरदगा : शुक्रवार को सदर प्रखंड के ग्राम कुटमू के ग्राम प्रधान बन्धन मुण्डा, कुटमू मुखिया राजू उरांव, पंचायत समिति गणेश मुण्डा, सामाजिक कार्यकर्ता सहदेव उरांव, राहुल उरांव एवं बुद्धिजीवियों महिला/पुरुष ग्रामवासियों की अगुवाई में भगवान बिरसा मुंडा सहदात दिवस पर बमन्डीहा दुपट्टा और कचहरी मोड़ स्थित भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर ग्राम प्रधान बन्धन मुण्डा द्वारा प्रकृति पूजा आदिवासी परम्परा रिती रिवाज के साथ पूजा पाठ करके किया गया।

पूजा पाठ के बाद बिरसा मुंडा को माल्यार्पण किया गया। मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता सहदेव तिग्गा ने कहा कि आदिवासियों के महानायक बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के आदिवासी दम्पति सुगना और करमी के घर हुआ था।

भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया।

बिरसा मुंडा ने साहस की स्याही से पुरुषार्थ के पृष्ठों पर शौर्य की शब्दावली रची। उन्होंने हिन्दू धर्म और ईसाई धर्म का बारीकी से अध्ययन किया तथा इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आदिवासी समाज मिशनरियों से तो भ्रमित है ही हिन्दू धर्म को भी ठीक से न तो समझ पा रहा है, न ग्रहण कर पा रहा है।

बिरसा मुंडा ने महसूस किया कि आचरण के धरातल पर आदिवासी समाज अंधविश्वासों की आंधियों में तिनके-सा उड़ रहा है तथा आस्था के मामले में भटका हुआ है। उन्होंने यह भी अनुभव किया कि सामाजिक कुरीतियों के कोहरे ने आदिवासी समाज को ज्ञान के प्रकाश से वंचित कर दिया है।

धर्म के बिंदु पर आदिवासी कभी मिशनरियों के प्रलोभन में आ जाते हैं, तो कभी ढकोसलों को ही ईश्वर मान लेते हैं।
भारतीय जमींदारों और जागीरदारों तथा ब्रिटिश शासकों के शोषण की भट्टी में आदिवासी समाज झुलस रहा था।

बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को शोषण की नाटकीय यातना से मुक्ति दिलाने के लिए उन्हें तीन स्तरों पर संगठित करना आवश्यक समझा। और उनके बताए हुए मार्ग पर चलने का संकल्प लें।

मौके पर सुरजमनी उरांव, नौरी उरांव,पुष्पा उरांव,रंजनी उरांव, बुधमनिया उरांव,सुनिता उरांव,मनियारो उरांव मामता उरांव, पार्वती उरांव चुनू उरांव, शनिया उरांव, बिरसु उरांव, तिवारी उरांव,रमिया उरांव, धनिया उरांव, लक्ष्मण उरांव, रितेश उरांव, बुधूवा उरांव, रूखमणी उरांव सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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