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पश्चिम बंगाल

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने ईसीएल का किया दौरा,

सरबजीत सिंह

पश्चिम बंगाल/सांकतोरिया : पश्चिम बंगाल के सांकतोरिया स्थित Eastern Coalfields Limited (ईसीएल) में 13 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और औद्योगिक गतिविधि देखने को मिली, जब भारत सरकार के कोयला एवं खान राज्य मंत्री Satish Chandra Dubey ने ईसीएल मुख्यालय एवं कुनुस्तोरिया क्षेत्र का दौरा किया। इस अवसर पर मंत्री का भव्य स्वागत ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक Shri Satish Jha द्वारा किया गया। उनके साथ कंपनी के कार्यात्मक निदेशक, वरिष्ठ अधिकारी एवं विभिन्न विभागों के प्रमुख भी उपस्थित रहे।

यह दौरा ईसीएल की उपलब्धियों, उत्पादन क्षमता, खनन सुरक्षा, पर्यावरणीय पहलों तथा भविष्य की विकास योजनाओं की समीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्री के दौरे के दौरान कंपनी के संचालन, कोयला उत्पादन, डिस्पैच व्यवस्था, सुरक्षा मानकों तथा सतत विकास परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मंत्री के आगमन पर ईसीएल परिसर में औपचारिक “गार्ड ऑफ ऑनर” प्रस्तुत किया गया। इस दौरान ईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों में निदेशक (वित्त) मोहम्मद अंजार आलम, निदेशक (मानव संसाधन) गुंजन कुमार सिन्हा, निदेशक (तकनीकी) गिरीश गोपीनाथन नायर सहित कई महाप्रबंधक और विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने स्पष्ट कहा कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयला उत्पादन आवश्यक है, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खनन तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया। मंत्री ने कहा कि भविष्य का खनन केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के संतुलित उपयोग और श्रमिक सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उन्होंने ईसीएल को तकनीकी उन्नयन, डिजिटलीकरण, बेहतर संसाधन प्रबंधन और खदान सुरक्षा मानकों में निरंतर सुधार की दिशा में कार्य करने की सलाह दी। मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि दुर्घटनाओं में कमी आएगी और पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होगा।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में ईसीएल के प्रदर्शन की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई परिचालन और बाहरी चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने “टीम ईसीएल” को बधाई देते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी कंपनी ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है।

विशेष रूप से मंत्री ने ईसीएल द्वारा शुरू की गई कई नवाचार परियोजनाओं की सराहना की। इनमें भूमिगत कोयला गैसीकरण (Underground Coal Gasification) परियोजना प्रमुख रही, जिसके माध्यम से गहरी खदानों में उपलब्ध कोयले का प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह तकनीक भविष्य में भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

इसके अलावा वैज्ञानिक ढंग से खदान बंदी (Scientific Mine Closure) की दिशा में ईसीएल के प्रयासों को भी मंत्री ने सराहा। उन्होंने कहा कि खनन के बाद छोड़ी गई भूमि का पुनः उपयोग और पर्यावरणीय पुनर्स्थापन अत्यंत आवश्यक है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा बल्कि स्थानीय समुदायों के विकास के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।

मंत्री ने “फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी” (FMC) परियोजनाओं की भी प्रशंसा की। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कोयले के परिवहन को अधिक तेज, सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि कोयले के खुले परिवहन से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए ऐसी परियोजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इससे परिवहन लागत में कमी आएगी और पर्यावरणीय प्रभाव भी घटेगा।

ईसीएल द्वारा सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार को भी मंत्री ने सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। सौर ऊर्जा परियोजनाओं से कंपनी की ऊर्जा लागत कम होगी और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

बैठक के दौरान मंत्री ने कोयला भंडार के सत्यापन पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि घोषित कोयला स्टॉक की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए नियमित और व्यवस्थित सत्यापन प्रणाली लागू की जाए। उनका मानना था कि पारदर्शी और सटीक स्टॉक प्रबंधन से उत्पादन योजना और आपूर्ति व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और दुनिया भर में बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में ईसीएल जैसी कंपनियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए कोयला कंपनियों को उत्पादन और आपूर्ति में निरंतर स्थिरता बनाए रखनी होगी।

उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाए रखने में कोयला उद्योग की अहम भूमिका है। ईसीएल को संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए उत्पादन क्षमता बनाए रखने और परिचालन दक्षता में सुधार की दिशा में लगातार कार्य करना होगा।

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगली बार उनके दौरे तक ईसीएल विभिन्न विकासात्मक और परिचालन क्षेत्रों में और अधिक उन्नत स्थिति प्राप्त कर लेगा। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास अनुभव, संसाधन और मानव क्षमता की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की है।

बैठक में मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि मंत्रालय स्तर पर जिन समस्याओं के समाधान की आवश्यकता है, उन्हें एक समेकित और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों को यदि सुव्यवस्थित तरीके से मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा तो उनके समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।

उन्होंने मंत्रालय और ईसीएल के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया ताकि विकास परियोजनाओं में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को समय रहते दूर किया जा सके। मंत्री ने कहा कि सरकार कोयला क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

इस अवसर पर मंत्री ने कंपनी प्रबंधन को कई महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव भी दिए। उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने, लागत नियंत्रण, सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को बेहतर तरीके से लागू करने की दिशा में ठोस रणनीति अपनाने की सलाह दी।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में ईसीएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने ईसीएल को Coal India Limited की सबसे पुरानी और प्रमुख सहायक कंपनियों में से एक बताते हुए कहा कि कंपनी ने वर्षों से देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

मंत्री ने टीम ईसीएल की मेहनत, समर्पण और सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि देश के विकास में कोयला क्षेत्र की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब तक देश में ऊर्जा की मांग बनी रहेगी, तब तक कोयला उद्योग की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी।

ईसीएल प्रबंधन ने भी मंत्री को कंपनी की वर्तमान परियोजनाओं, उत्पादन क्षमता, सुरक्षा उपायों, सामाजिक दायित्व कार्यक्रमों और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। कंपनी अधिकारियों ने बताया कि ईसीएल आधुनिक तकनीक के उपयोग, डिजिटलीकरण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई नई पहल कर रहा है।

दौरे के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ईसीएल के पास देश के ऊर्जा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने की क्षमता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कंपनी आने वाले वर्षों में उत्पादन, सुरक्षा, तकनीकी विकास और पर्यावरणीय संतुलन के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगी।

सांकतोरिया में हुआ यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह भारत के कोयला उद्योग की भविष्य की दिशा, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है।

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