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प्रशिक्षण- शिक्षा

सोलापुर विश्वविद्यालय: कपड़ा उद्योग और शिक्षा का समन्वय

शहाजहान अत्तार - राज्य प्रमुख - महाराष्ट्र

सोलापुर:- सोलापुर एक महत्वपूर्ण और विविधतापूर्ण बहुभाषी जिला है। यहां का कपड़ा उद्योग क्षेत्र काफी विकसित है। पुण्यश्लोक अहिल्या देवी होल्कर विश्वविद्यालय को ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए, जो भविष्य में इस उद्योग को सहयोग प्रदान करें। यह विचार राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सी. पी. राधाकृष्णन ने व्यक्त किया।

पुण्यश्लोक अहिल्या देवी होल्कर विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर राज्यपाल राधाकृष्णन ने छात्रों का मार्गदर्शन किया। इस कार्यक्रम में पद्म भूषण प्रो. ज्येष्ठराज जोशी, कुलपति डॉ. प्रकाश महानवार, प्र-कुलपति डॉ. लक्ष्मीकांत दामा, रजिस्ट्रार योगिनी घरे, कलेक्टर कुमार आशीर्वाद, परीक्षा बोर्ड सचिव श्रीकांत अंधारे, अन्य गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।

राज्यपाल राधाकृष्णन ने कहा कि सोलापुर कपड़ा उद्योग का एक प्रमुख केंद्र है और यहां संचार के सभी साधन उपलब्ध हैं। चूंकि सोलापुर जल्द ही हवाई परिवहन से जुड़ जाएगा, इसलिए विश्वविद्यालय को कपड़ा उद्योग के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रम विकसित करने चाहिए, जिनमें फैशन डिजाइनिंग, बीटेक, बीएससी टेक्सटाइल और केमिकल इंजीनियरिंग जैसे कोर्स शामिल हों। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को स्थानीय बाजार की मांगों को समझकर व्यवसायियों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिए और उसके अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बने और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने। यह लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। छात्रों को मेहनत और शोध प्रवृत्ति को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोविड-19 के खिलाफ पहला टीका भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान मिशन ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को साबित किया।

राज्यपाल ने छात्रों से अपील की कि वे सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं, सख्त अनुशासन का पालन करें और शिक्षा को आजीवन प्रक्रिया के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि छात्रों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके आम लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।

इस अवसर पर पद्म भूषण प्रो. ज्येष्ठराज जोशी ने कहा कि छात्रों द्वारा प्राप्त नवीन ज्ञान से देश की आय में वृद्धि होगी और भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र बनेगा।

कुलपति डॉ. प्रकाश महानवार ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय कौशल शिक्षा पर जोर देता है। उन्होंने वारकरी संप्रदाय अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट के लिए 155 करोड़ रुपये के प्रस्ताव का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में विश्वविद्यालय को 100 करोड़ रुपये का फंड प्राप्त हुआ है, जिसे शैक्षणिक कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विकास में उपयोग किया जाएगा।

समारोह में राज्यपाल राधाकृष्णन ने त्रिशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पुण्यश्लोक अहिल्या देवी होल्कर के जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। दीक्षांत समारोह में 15,291 छात्रों को डिग्री, 71 शोध छात्रों को पीएचडी की उपाधि और 57 छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। यह समारोह अत्यंत उत्साह और ऊर्जा के वातावरण में संपन्न हुआ।

 

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