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सीमांकन पर दक्षिण भारत के नेताओं की बड़ी बैठक, कड़ी लड़ाई के संकेत

जावेद अत्तार : सहायक संपादक

पुणे: – चेन्नई, दक्षिण भारत में अब तक के राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं चरम इश्यू पर थीं, लेकिन अब इस मुद्दे पर कडी लड़ाई के संकेत हैं। आज चेन्नई में इस मुद्दे पर एक बैठक आयोजित की गई थी।

इसमे छह राज्यों में से मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री ने भाग लिया था। अन्य राज्यों के नेताओं ने भी बैठक में भाग लिया। बैठक में लोगों के सभी प्रतिनिधियों ने सीमांकन के कारण अपने राज्यों में परिणाम प्रस्तुत किए।

बैठक का आयोजन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व में किया गया था। केरल के मुख्यमंत्री पी.के. विजयन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवांत रेड्डी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्नाटक के उपमुखी डीके शिव कुमार ने भाग लिया। आंध्र प्रदेश में विरोधी पार्टी वाय इस आर काँग्रेस और ओडिशा के पार्टी में बिजु जनता दल के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया। सभी ने बैठक में सीमा पर बात की।

सीमाकन का उन राज्यों पर एक बुरा प्रभाव पड़ेगा जो परिवार नियोजन पर जोर देते हैं और आबादी को नियंत्रित करने में सफल होते हैं। हमें सीमांकन के विपरीत नहीं होना चाहिए, लेकिन एक निष्पक्ष सीमांकन होना चाहीए। यदि जनसंख्या के आधार पर कोई सीमांकन है, तो संसद में हमारा प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, और यदि ऐसा होता है, तो हमें केंद्र सरकार से धन के लिए संघर्ष करना पडेगा। किसान मुसीबत में होंगे। हमारी संस्कृति, विकास खतरे में होगा। तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने कहा कि हमारे लोग अपने देश में कमजोर होंगे, कोई भी उनकी बात नहीं सुनेंगे।

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