धुले में भव्य ‘जय शिवाजी जय भारत’ पदयात्रा का आयोजन
शहाजहान अत्तार - राज्य प्रमुख - महाराष्ट्र

धुले: छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती के पावन अवसर पर धुले जिला प्रशासन द्वारा एक भव्य ‘जय शिवाजी जय भारत’ पदयात्रा का आयोजन किया गया। यह पदयात्रा जिला प्रशासन, जिला खेल पदाधिकारी एवं जिला नेहरू युवा केंद्र के संयुक्त प्रयास से आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य महान मराठा योद्धा के जीवन और विचारों को जन-जन तक पहुँचाना था।
इस ऐतिहासिक पदयात्रा की शुरुआत शहर के प्रतिष्ठित गरुड़ मैदान से हुई, जहाँ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा, प्रशासनिक अधिकारी, खेल प्रेमी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य एकत्र हुए। इस दौरान सभी ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके गौरवशाली इतिहास को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
पदयात्रा का उद्देश्य और ऐतिहासिक महत्व
छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के उन महान योद्धाओं में से एक थे, जिन्होंने स्वराज की स्थापना कर जनकल्याणकारी शासन की नींव रखी। उनकी नीतियाँ और युद्धनीति आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इसी विरासत को आगे बढ़ाने और युवाओं को उनके आदर्शों से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इस पदयात्रा का आयोजन किया गया।
पदयात्रा के दौरान “जय शिवाजी, जय भारत” के नारों से वातावरण गूंज उठा। प्रतिभागियों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के अदम्य साहस, प्रशासनिक कुशलता और जनता के प्रति उनकी संवेदनशीलता को याद किया। कई वक्ताओं ने उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के समय में भी उनकी नीतियाँ प्रशासनिक व्यवस्था और राष्ट्रनिर्माण के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।
समाज में जागरूकता और प्रेरणा का संदेश
इस आयोजन के माध्यम से समाज में इतिहास के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को राष्ट्रप्रेम की भावना से ओतप्रोत करने का प्रयास किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं थे, बल्कि वे कुशल रणनीतिकार और जनता के प्रिय शासक भी थे। उनकी जीवनी से हमें अनुशासन, परिश्रम, नेतृत्व और साहस का महत्वपूर्ण पाठ मिलता है।
इस भव्य आयोजन ने शहर के नागरिकों को एकजुट करते हुए शिवाजी महाराज के विचारों को अपनाने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संदेश दिया। ‘जय शिवाजी जय भारत’ पदयात्रा न केवल एक श्रद्धांजलि थी, बल्कि एक ऐसा प्रेरणादायक आयोजन भी था, जिसने लोगों के मन में मराठा सम्राट के प्रति आदर और गौरव की भावना को और भी प्रबल कर दिया।