
श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इसरो के महत्वाकांक्षी मिशन प्रोबा-3 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह उपग्रह निर्धारित समय पर अपने कक्ष में प्रवेश कर गया है।
प्रोबा-3 मिशन का प्रक्षेपण आज सुबह 9:00 बजे पीएसएलवी (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) रॉकेट के जरिए किया गया। प्रक्षेपण के कुछ मिनटों बाद, इसरो ने पुष्टि की कि उपग्रह ने सही दिशा में अपने कक्ष में प्रवेश कर लिया है।
प्रोबा-3 इसरो और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष संगठनों के बीच सहयोग का प्रतीक है। यह उपग्रह सूर्य के वायुमंडलीय अध्ययन और अंतरिक्ष में सटीक तकनीकी प्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मिशन के तहत दो उपग्रह शामिल हैं, जो एक-दूसरे के साथ समन्वयित रहकर सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में परिक्रमा करेंगे। इस मिशन का उद्देश्य सूर्य के बाहरी वातावरण (कोरोना) का अध्ययन करना और अंतरिक्ष में सटीकता के नए मानक स्थापित करना है।
लॉन्च के बाद, इसरो के प्रमुख एस. सोमनाथ ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “प्रोबा-3 का सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान की बढ़ती ताकत और वैश्विक सहयोग को दर्शाता है। यह मिशन सौर अध्ययन और सटीक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में नई ऊंचाइयों को छूएगा।”
प्रोबा-3 से प्राप्त डेटा का उपयोग न केवल सूर्य के रहस्यों को समझने में किया जाएगा, बल्कि यह सौर गतिविधियों के पृथ्वी पर प्रभाव को समझने और अंतरिक्ष यान के लिए सटीक पथप्रदर्शक तकनीक विकसित करने में मदद करेगा।
इसरो ने घोषणा की है कि वह आने वाले महीनों में और भी महत्वपूर्ण मिशनों को अंजाम देने की तैयारी में है। प्रोबा-3 की सफलता इसरो की तकनीकी क्षमताओं और वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगी।
यह लॉन्च इसरो के लिए एक और मील का पत्थर साबित हुआ है, जो अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा को और ऊंचा करता है।