चारू मजुमदार की शहादत दिवस पर संकल्प दिवस आयोजित
एग्यारकुण्ड में भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि, उनके विचारों और संघर्षों को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प

मुगमा-धनबाद। रिपोर्ट-सरबजीत सिंह : भाकपा माले के संस्थापक नेता एवं प्रथम महासचिव कॉमरेड चारू मजुमदार के शहादत दिवस के अवसर पर 28 जुलाई को एग्यारकुण्ड प्रखंड कमेटी की ओर से मुगमा मोड़ स्थित कार्यालय में संकल्प दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने चारू मजुमदार के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा दो मिनट का मौन रखकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन एग्यारकुण्ड प्रखंड सचिव कॉमरेड बादल चंद्र बाउरी ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय कमेटी के संकल्प आह्वान पाठ का वाचन नागेंद्र कुमार ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने चारू मजुमदार के राजनीतिक जीवन, किसान-मजदूर आंदोलनों में उनकी भूमिका और उनके संघर्षों पर विस्तार से चर्चा की।
संघर्षपूर्ण जीवन को किया याद
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कॉमरेड चारू मजुमदार का जन्म 15 मई 1918 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक संपन्न जमींदार परिवार में हुआ था। वक्ताओं के अनुसार, उन्होंने सुविधापूर्ण जीवन का रास्ता छोड़कर गरीब किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता चुना।
उनके राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में वे वामपंथी राजनीति की ओर आकर्षित हुए और दार्जिलिंग क्षेत्र के चाय बागान मजदूरों के बीच काम किया। इस दौरान उन्होंने मजदूरों और किसानों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।
वक्ताओं ने कहा कि उनके जीवन का बड़ा हिस्सा राजनीतिक संघर्ष और दमन के दौर से गुजरा। 1948 में कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उन्हें कई वर्षों तक जेल में रहना पड़ा। जेल से बाहर आने के बाद भी उन्होंने किसान और मजदूर आंदोलनों से जुड़े राजनीतिक कार्यों को जारी रखा।

नक्सलबाड़ी आंदोलन का किया उल्लेख
कार्यक्रम में चारू मजुमदार के राजनीतिक जीवन की चर्चा के दौरान 1967 के नक्सलबाड़ी किसान आंदोलन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कॉमरेड चारू मजुमदार ने कॉमरेड कानू सान्याल और जंगल संथाल के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र में किसान आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया।
वक्ताओं के अनुसार, नक्सलबाड़ी आंदोलन ने देश की वामपंथी राजनीति पर व्यापक प्रभाव डाला और इसके बाद भारतीय राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हुई। इसी राजनीतिक धारा से आगे चलकर भाकपा माले के गठन का रास्ता तैयार हुआ।
1969 में भाकपा माले का गठन
कार्यक्रम में बताया गया कि 1969 में भाकपा माले का गठन हुआ और चारू मजुमदार को पार्टी का प्रथम महासचिव चुना गया। इसके बाद उन्होंने संगठन के विस्तार और राजनीतिक आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया।
वक्ताओं ने कहा कि उस दौर में सरकार की ओर से चलाए गए व्यापक दमनात्मक अभियानों के कारण चारू मजुमदार को लंबे समय तक भूमिगत रहना पड़ा। इसके बावजूद उनके समर्थकों और संगठन ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखीं।
गिरफ्तारी और अंतिम समय की चर्चा
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने चारू मजुमदार की गिरफ्तारी और मृत्यु से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 16 जुलाई 1972 को उन्हें कोलकाता में एक गुप्त ठिकाने से गिरफ्तार किया गया था।
वक्ताओं ने दावा किया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें पुलिस हिरासत में रखा गया और लालबाजार लॉक-अप में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उनके अनुसार, 28 जुलाई 1972 को पुलिस हिरासत में उनकी मृत्यु हुई।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि उनके शव को परिवार को नहीं सौंपा गया और कड़े पुलिस पहरे के बीच अंतिम संस्कार किया गया। कार्यक्रम में उनके जीवन के अंतिम दिनों को संघर्ष और राजनीतिक दमन के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया गया।
शहादत दिवस को संकल्प दिवस के रूप में मनाया
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 28 जुलाई केवल चारू मजुमदार की शहादत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए अपने राजनीतिक विचारों और संगठनात्मक संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन भी है।
वक्ताओं ने कहा कि गरीबों, मजदूरों, किसानों और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना तथा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना पार्टी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सामाजिक और आर्थिक असमानता से जुड़े मुद्दों पर जनता के बीच संवाद और संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
श्रद्धांजलि के बाद सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम की शुरुआत श्रद्धांजलि से हुई और इसके बाद उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से पार्टी के संकल्पों को दोहराया। केंद्रीय कमेटी के संकल्प आह्वान पाठ के माध्यम से कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने तथा जनता से जुड़े सवालों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया गया।
कार्यकर्ताओं ने चारू मजुमदार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि ऐतिहासिक आंदोलनों और उनसे जुड़े राजनीतिक संघर्षों का मूल्यांकन वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच सक्रिय रहने और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को समझने का आह्वान किया।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
एग्यारकुण्ड प्रखंड कमेटी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रखंड सचिव बादल चंद्र बाउरी, नागेंद्र कुमार, पी.एल. मुर्मू, रोशन मिश्रा, विनय सिंह, अभय प्रसाद, असीम घोष, प्रदीप बाउरी, ज्योति श्रीवास्तव, मंटू पटवार, धर्मेंद्र साव, राजेंद्र यादव, दिलीप कुमार, खोखन रविदास, नवीन अम्बस्ट, सुरेश मरांडी, सुभाष मोची, बापी तंतुबाई, पप्पू रहमान, सुरेश ठाकुर, इंदु देवी, मालती देवी, रिंकू देवी, अंजू चटर्जी, संतोष सिंह और राजकुमार सिंह सहित अन्य लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने चारू मजुमदार के राजनीतिक जीवन और आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। साथ ही संगठन को मजबूत करने और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प व्यक्त किया।
विचारों को आगे बढ़ाने का आह्वान
समापन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि चारू मजुमदार की शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित संकल्प दिवस का उद्देश्य उनके राजनीतिक विचारों और संघर्ष की विरासत को याद करना तथा संगठन के भविष्य की दिशा पर चर्चा करना है।
उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों और समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में प्रमुखता से उठाने की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और लोकतांत्रिक माध्यमों से उनके समाधान के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।
एग्यारकुण्ड में आयोजित कार्यक्रम इसी संकल्प के साथ संपन्न हुआ कि पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत किया जाएगा तथा सामाजिक-आर्थिक मुद्दों से जुड़े सवालों को लेकर लगातार जनसंपर्क और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।





