Advertisement
विश्व युध्द

रूस और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग 2026

समीर सिंह 'भारत' : मुख्य संपादक

युध्द-रिपोर्ट : रूस और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग तथा दक्षिणी यूक्रेन में यूक्रेनी सेनाओं के लगातार सफल पलटवार, वर्ष 2026 के युद्ध परिदृश्य को निर्णायक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। एक ओर रूस, ईरान को सैन्य और तकनीकी सहायता देकर मध्य पूर्व में अमेरिकी और इज़राइली प्रभाव को चुनौती देने की रणनीति अपना रहा है, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन अपने दक्षिणी मोर्चे पर प्रभावशाली जवाबी कार्रवाई कर रूसी सैन्य योजनाओं को बाधित कर रहा है। इन दोनों समानांतर घटनाक्रमों ने वैश्विक भू-राजनीति और युद्ध की दिशा को जटिल और बहुआयामी बना दिया है।

रूस-ईरान सैन्य सहयोग: रणनीतिक विस्तार

रूस ने हाल के महीनों में ईरान के साथ अपने सैन्य सहयोग को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की 25 मार्च की रिपोर्ट, जो पश्चिमी खुफिया स्रोतों पर आधारित है, के अनुसार रूस एक चरणबद्ध योजना के तहत ईरान को ड्रोन, दवाइयाँ और खाद्य सामग्री भेजने के अंतिम चरण में है। यह आपूर्ति केवल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका स्पष्ट सैन्य महत्व भी है।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका-इज़राइल अभियान शुरू होने के तुरंत बाद रूस और ईरान के बीच ड्रोन आपूर्ति पर चर्चा शुरू हो गई थी। मार्च के प्रारंभ में इन आपूर्तियों की प्रक्रिया शुरू हुई और उम्मीद है कि मार्च के अंत तक यह पूरी हो जाएगी। हालांकि, रूस द्वारा भेजे जा रहे ड्रोन के प्रकार को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों का अनुमान है कि रूस Geran-2 जैसे मॉडलों की आपूर्ति कर सकता है, जो कि ईरान के Shahed ड्रोन का संशोधित संस्करण माना जाता है।

ड्रोन और तकनीकी सहायता: युद्ध की नई दिशा

रूस पहले से ही ईरान को संशोधित Shahed ड्रोन के पुर्जे और उपग्रह चित्र उपलब्ध करा रहा है। इन संसाधनों का उपयोग ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगियों पर हमलों में किया है। यह सहयोग केवल उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें खुफिया जानकारी और लक्ष्य निर्धारण में सहायता भी शामिल है।

यह स्पष्ट है कि रूस इस सहयोग को एक व्यापक रणनीतिक उद्देश्य के तहत देख रहा है—अमेरिका को कमजोर करना। रूस लंबे समय से अमेरिका को अपने प्रमुख भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखता रहा है, और ईरान के साथ साझेदारी इस प्रतिस्पर्धा को और तेज करती है।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि रूस ने ईरान के S-400 वायु रक्षा प्रणाली की मांग को अस्वीकार कर दिया। यह निर्णय दर्शाता है कि रूस अपनी तकनीकी क्षमताओं को सीमित रूप से साझा कर रहा है, ताकि वह अपने रणनीतिक लाभ को बनाए रख सके।

दक्षिणी यूक्रेन में यूक्रेनी पलटवार: रणनीतिक सफलता

जहाँ एक ओर रूस मध्य पूर्व में सक्रिय है, वहीं दूसरी ओर उसे यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दक्षिणी यूक्रेन में यूक्रेनी सेनाओं ने लगातार सफल पलटवार कर रूसी सेना की स्थिति को कमजोर किया है।

26 मार्च को यूक्रेनी एयर असॉल्ट फोर्सेज कमांड ने घोषणा की कि उन्होंने बेरेज़ोवे (ओलेक्सांद्रिव्का के दक्षिण-पूर्व में स्थित) क्षेत्र को मुक्त कर लिया है। इस कार्रवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण रूसी सैन्य उभार (salient) को समाप्त कर दिया गया, जिससे यूक्रेन को सामरिक लाभ मिला।

जनवरी 2026 के अंत से लेकर मार्च के मध्य तक, यूक्रेनी सेनाओं ने ओलेक्सांद्रिव्का और हुल्याइपोल दिशा में 400 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को मुक्त कराया है। हालांकि, विश्लेषण के अनुसार वास्तविक क्षेत्र इससे भी अधिक हो सकता है, क्योंकि मापन की पद्धति अक्सर रूढ़िवादी होती है।

रूसी सैन्य रणनीति पर प्रभाव

यूक्रेनी पलटवारों का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे युद्धक्षेत्र पर पड़ रहा है। रूसी सेना को अब यह तय करना पड़ रहा है कि वह अपने संसाधनों को कहाँ केंद्रित करे—रक्षा में या आक्रामक अभियानों में।

मार्च 2026 की शुरुआत में रूस को अपने प्रतिष्ठित एयरबोर्न (VDV) और नौसैनिक पैदल सेना (Naval Infantry) इकाइयों को डोनेट्स्क क्षेत्र से हटाकर दक्षिणी यूक्रेन में तैनात करना पड़ा। यह पुनःतैनाती यूक्रेनी दबाव का सीधा परिणाम थी और इससे रूस की वसंत-ग्रीष्मकालीन आक्रामक योजना प्रभावित हुई।

इतिहास बताता है कि रूसी सेना एक साथ कई मोर्चों पर प्रभावी आक्रमण करने में असफल रही है। वर्तमान परिस्थितियों में, जब दक्षिणी मोर्चे पर यूक्रेन बढ़त बना रहा है, रूस के लिए “फोर्ट्रेस बेल्ट” क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आक्रमण करना और भी कठिन हो गया है।

फोर्ट्रेस बेल्ट: एक कठिन लक्ष्य

यूक्रेन का “फोर्ट्रेस बेल्ट” डोनेट्स्क क्षेत्र में स्थित चार बड़े और अत्यधिक किलेबंद शहरों का समूह है, जो उत्तर से दक्षिण तक H-20 राजमार्ग के साथ फैले हुए हैं। युद्ध से पहले इन शहरों की कुल जनसंख्या 3.8 लाख से अधिक थी।

रूस ने 2014 और 2022 में भी इस क्षेत्र पर कब्जा करने का प्रयास किया था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। वर्तमान में, 2026 के युद्ध के पाँचवें वर्ष में, इस क्षेत्र को जीतना एक दीर्घकालिक और संसाधन-गहन अभियान साबित हो सकता है।

रूसी सेना ने अब तक बड़े शहरों पर तेजी से कब्जा करने की क्षमता नहीं दिखाई है। उदाहरण के लिए, पोक्रोव्स्क जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहर (जिसकी जनसंख्या लगभग 60,000 थी) को कब्जे में लेने में भी रूस को लगभग दो वर्ष लग गए।

रूसी नेतृत्व की स्वीकारोक्ति

रूसी नेतृत्व अब धीरे-धीरे इस कठिनाई को स्वीकार करता दिखाई दे रहा है। 26 मार्च को रूसी संसद की रक्षा समिति के अध्यक्ष आंद्रेई कार्तापोलोव ने कहा कि “विजयी वसंत आक्रमण” की बात करना अभी जल्दबाज़ी होगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कोस्त्यांतिनिव्का जैसे शहरों में लड़ाई बेहद कठिन है, क्योंकि वहाँ मजबूत रक्षा संरचनाएँ मौजूद हैं।

यह बयान दर्शाता है कि रूस अपने नागरिकों को युद्ध की वास्तविकता के लिए तैयार कर रहा है—धीमी प्रगति और भारी हताहतों की संभावना।

क्रेमलिन की रणनीति: राजनीतिक दबाव

सैन्य कठिनाइयों के बीच, क्रेमलिन एक वैकल्पिक रणनीति भी अपना रहा है। वह यूक्रेन पर दबाव डाल रहा है कि वह डोनेट्स्क क्षेत्र के उन हिस्सों को भी छोड़ दे, जो अभी रूसी नियंत्रण में नहीं हैं।

इसका उद्देश्य स्पष्ट है—बिना भारी सैन्य लागत के क्षेत्रीय लाभ प्राप्त करना। यदि यूक्रेन ऐसा करता है, तो रूस अपने संसाधनों को बचा सकता है और भविष्य में फिर से आक्रमण करने के लिए बेहतर स्थिति में आ सकता है।

वैश्विक प्रभाव 

रूस-ईरान सहयोग और यूक्रेन में बदलता युद्ध संतुलन, दोनों ही वैश्विक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। एक ओर रूस मध्य पूर्व में अपनी पकड़ मजबूत कर अमेरिका और उसके सहयोगियों को चुनौती दे रहा है, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन में उसकी सैन्य सीमाएँ स्पष्ट होती जा रही हैं।

यूक्रेनी पलटवारों ने यह साबित किया है कि आधुनिक युद्ध केवल संख्या और संसाधनों पर निर्भर नहीं होता, बल्कि रणनीति, गति और समन्वय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। दूसरी तरफ, रूस का ईरान के साथ सहयोग यह दिखाता है कि वह वैश्विक स्तर पर अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए नए गठबंधन बना रहा है।

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या रूस “फोर्ट्रेस बेल्ट” में कोई महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर पाता है, या यूक्रेन अपनी वर्तमान गति को बनाए रखते हुए युद्ध की दिशा को और बदल देता है। साथ ही, मध्य पूर्व में रूस-ईरान साझेदारी का विस्तार अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को और जटिल बना सकता है।

इस प्रकार, 2026 का यह चरण न केवल यूक्रेन युद्ध के लिए बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए भी एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जहाँ सैन्य, राजनीतिक और कूटनीतिक सभी मोर्चों पर गहन परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
.site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}