7 प्रेरणादायक पहल: INSIGHT ने महाशिवरात्रि पर रानीगंज के जोड़ा मंदिर में बच्चों को बांटा प्रसाद
संपादकीय

रानीगंज, पश्चिम बंगाल: आस्था, परंपरा और सामाजिक जिम्मेदारी का संगम तब और अर्थपूर्ण हो जाता है जब पूजा के साथ सेवा भी जुड़ जाए। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर Indian Socio Income and Grievance Helping Trust (INSIGHT) ने रानीसायर स्थित जोड़ा मंदिर परिसर में बच्चों के लिए विशेष सेवा कार्यक्रम आयोजित कर इसी भावना को जीवंत रूप दिया। इस पहल का लक्ष्य स्पष्ट था—दर्शन के लिए आने वाले छोटे-छोटे श्रद्धालुओं तक त्योहार की खुशी पहुँचाना और समाज को यह याद दिलाना कि धर्म का वास्तविक अर्थ करुणा और सहभागिता में बसता है।
सुबह से ही मंदिर क्षेत्र में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। घंटियों की ध्वनि, हर-हर महादेव के जयकारे और पूजा-अर्चना के बीच INSIGHT की टीम ने सुव्यवस्थित तरीके से अपना सेवा केंद्र तैयार किया। प्रसाद और ठंडा शरबत वितरण की व्यवस्था इस तरह की गई थी कि भीड़ के बावजूद बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। स्वयंसेवक कतार बनवाकर एक-एक बच्चे तक सामग्री पहुँचा रहे थे, जबकि अन्य सदस्य व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने में लगे थे।
बच्चों के चेहरे पर दिखी असली खुशी
जब प्रसाद और शरबत बच्चों के हाथों में पहुँचा, तो उनके चेहरों पर जो मुस्कान उभरी, वही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता थी। कई बच्चे अपने माता-पिता के साथ आए थे, तो कुछ आसपास के इलाकों से मित्रों के साथ पहुंचे थे। गर्मी और भीड़ के बीच ठंडा शरबत उनके लिए राहत जैसा था। प्रसाद पाकर वे न केवल प्रसन्न हुए, बल्कि कई बच्चों ने स्वयंसेवकों को धन्यवाद भी कहा।
मौजूद श्रद्धालुओं ने माना कि ऐसे अवसरों पर बच्चों पर विशेष ध्यान देना समाज की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि त्योहार तभी पूर्ण होते हैं जब उनमें साझेदारी और सेवा की भावना हो।
नेतृत्व की उपस्थिति ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम पूनम उपाध्याय, कार्यकारी निदेशक, की उपस्थिति में संपन्न हुआ। उन्होंने स्वयं वितरण व्यवस्था का जायजा लिया और यह सुनिश्चित किया कि हर बच्चे तक समान रूप से प्रसाद पहुँचे। उनके साथ अंजू उपाध्याय, कुसुम उपाध्याय, प्रीति तिवारी और संस्था के अन्य सदस्य सक्रिय रूप से जुटे रहे।
टीम के भीतर स्पष्ट जिम्मेदारी बंटी हुई थी—किसी ने लाइन मैनेज की, किसी ने सामग्री पैक की, तो कोई छोटे बच्चों को सुरक्षित स्थान तक ले जाने में मदद कर रहा था। इस समन्वय ने पूरे आयोजन को अनुशासित और प्रभावी बनाए रखा।
मार्गदर्शन और संगठन
INSIGHT के मुख्य सलाहकार निदेशक डोरुवु पॉल जगन बाबू के मार्गदर्शन को सदस्यों ने इस सफलता का प्रमुख आधार बताया। उनकी योजना के अनुसार पहले से तैयारी की गई थी—कितने लोगों के आने की संभावना है, कितनी मात्रा में प्रसाद चाहिए, वितरण का रास्ता कैसा रहेगा, भीड़ बढ़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी—इन सभी बिंदुओं पर पहले ही चर्चा हो चुकी थी।
परिणाम साफ दिखा। कहीं धक्का-मुक्की नहीं हुई, किसी को इंतजार में परेशानी नहीं हुई, और पूरा कार्यक्रम शांति से चलता रहा।
सेवा ही त्योहार की आत्मा
संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि पर्व केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि समाज का कमजोर या छोटा वर्ग पीछे रह जाए तो उत्सव अधूरा है। उनका मानना है कि धार्मिक अवसर लोगों को जोड़ने का माध्यम होते हैं, और इन्हीं मौकों पर सेवा के कार्य सबसे अधिक प्रभाव डालते हैं।
उनके अनुसार, बच्चों में खुशी बाँटना भविष्य में संवेदनशील समाज की नींव रखने जैसा है। जब छोटी उम्र में उन्हें दया, सहयोग और समानता का अनुभव होता है, तो वही मूल्य आगे चलकर उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बनते हैं।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
मंदिर पहुंचे कई लोगों ने पहल की खुलकर सराहना की। उनका कहना था कि ऐसी गतिविधियाँ धार्मिक आयोजनों को नई दिशा देती हैं। कुछ बुजुर्गों ने कहा कि पहले भी समाज में सामूहिक सेवा की परंपरा थी, और अब संस्थाएं उसे आधुनिक रूप में आगे बढ़ा रही हैं।
एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि उनके बच्चे हर साल महाशिवरात्रि पर मंदिर आते हैं, लेकिन इस बार उन्हें विशेष अनुभव मिला क्योंकि उन्हें सम्मानपूर्वक प्रसाद दिया गया।INSIGHT
सामुदायिक एकता का संदेश
कार्यक्रम ने यह भी दिखाया कि जब लोग एक उद्देश्य से साथ आते हैं, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा काम हो सकता है। स्थानीय सहयोग, स्वयंसेवकों की तत्परता और नेतृत्व की स्पष्टता ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया।
यह पहल केवल वितरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज में सकारात्मक संवाद भी छोड़ गई—कि मदद करना कठिन नहीं, बस इच्छाशक्ति चाहिए।INSIGHT
भविष्य की प्रतिबद्धता
INSIGHT ने स्पष्ट किया कि यह एक दिन की गतिविधि नहीं है। संस्था आगे भी धार्मिक, सामाजिक और मानवीय अवसरों पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी। जरूरतमंदों, बच्चों, बुजुर्गों और असहाय लोगों तक पहुँच बनाना उनकी प्राथमिकता में रहेगा।
उनका लक्ष्य है कि सेवा को नियमित अभ्यास बनाया जाए, न कि केवल विशेष अवसर का कार्य।INSIGHT
दूर तक जाने वाला प्रभाव
महाशिवरात्रि के दिन हुआ यह आयोजन बताता है कि भक्ति और सेवा का मेल समाज में भरोसा पैदा करता है। जब लोग देखते हैं कि कोई संस्था बिना भेदभाव के आगे आ रही है, तो दूसरों को भी प्रेरणा मिलती है।INSIGHT











