
मुंबई: देश में तेजी से बढ़ती क्रेडिट संस्कृति और बदलती जीवनशैली के बीच टाटा Capital ने एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जन-जागरूकता अभियान ‘सवाल करो, फिर लोन लो’ की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य देशभर में बढ़ती ऋण सुविधा के बीच जिम्मेदार और समझदारी भरा उधार लेने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
भारत में आज लोन केवल जरूरत नहीं, बल्कि सपनों और आकांक्षाओं का साधन बन चुका है। घर खरीदना हो, कार लेना हो, बच्चों की पढ़ाई, व्यवसाय शुरू करना या फिर व्यक्तिगत जरूरतें—हर बड़े निर्णय में ऋण की भूमिका बढ़ती जा रही है। डिजिटल तकनीक और सरल प्रक्रियाओं ने क्रेडिट को पहले से कहीं अधिक सुलभ बना दिया है। कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन आवेदन, न्यूनतम दस्तावेज़ और त्वरित स्वीकृति—इन सुविधाओं ने ऋण को आम नागरिक के लिए बेहद आसान बना दिया है।
लेकिन इसी आसानी के बीच एक जोखिम भी छिपा है—बिना पूरी जानकारी और समझ के लिया गया लोन भविष्य में वित्तीय दबाव का कारण बन सकता है। इसी संदर्भ में ‘सवाल करो, फिर लोन लो’ पहल उपभोक्ताओं को प्रेरित करती है कि वे किसी भी ऋण को स्वीकार करने से पहले ठहरें, सोचें और सही प्रश्न पूछें।
जिम्मेदार उधारी की जरूरत क्यों?
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। मध्यम वर्ग का विस्तार हो रहा है और लोगों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आकांक्षाएं भी बढ़ रही हैं। औपचारिक बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो चुकी है।
आज मोबाइल फोन पर एक क्लिक से पर्सनल लोन उपलब्ध है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने कागजी कार्यवाही कम कर दी है। लेकिन क्या हर उधार लेने वाला व्यक्ति ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, छिपे हुए शुल्क, ईएमआई संरचना और चुकौती की शर्तों को पूरी तरह समझता है?
यही वह बिंदु है जहां यह अभियान उपभोक्ताओं को जागरूक करने की कोशिश करता है। पहल का संदेश स्पष्ट है—
लोन लेने से पहले सवाल पूछिए:
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ब्याज दर क्या है और क्या वह फिक्स्ड है या फ्लोटिंग?
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कुल भुगतान कितने समय में और कितनी राशि का होगा?
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किसी भी प्रकार का प्री-पेमेंट चार्ज है या नहीं?
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देर से भुगतान पर क्या दंड लगेगा?
जब उपभोक्ता इन प्रश्नों के उत्तर समझकर निर्णय लेते हैं, तो वे वित्तीय रूप से अधिक सुरक्षित और आत्मविश्वासी बनते हैं।
नेतृत्व का दृष्टिकोण
पहल के शुभारंभ पर Rajiv Sabharwal, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ने कहा कि भारत की विकास गाथा में बढ़ती आकांक्षाएं और औपचारिक क्रेडिट तक व्यापक पहुंच महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
उन्होंने कहा,
“टाटा कैपिटल में हम टाटा समूह के मूल्यों—पारदर्शिता, जिम्मेदारी और नैतिक आचरण—के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध हैं। ‘सवाल करो, फिर लोन लो’ एक जन-प्रथम आह्वान है, जो लोगों को सूचित और समझदारीपूर्ण उधार निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाता है। इस पहल के माध्यम से हम वित्तीय जागरूकता को बढ़ावा देना चाहते हैं और भारत में एक अधिक जिम्मेदार और मजबूत क्रेडिट पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में योगदान देना चाहते हैं।”
यह बयान केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि उपभोक्ता सशक्तिकरण की दिशा में ठोस प्रतिबद्धता का संकेत है।
टाटा समूह की परंपरा और नैतिक आधार
Tata Group लंबे समय से अपनी पारदर्शिता और नैतिक व्यवसायिक मूल्यों के लिए जाना जाता है। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए टाटा कैपिटल इस पहल के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उधार लेने की प्रक्रिया केवल आसान ही नहीं, बल्कि समझदारीपूर्ण भी हो।
टाटा समूह की पहचान केवल व्यापारिक सफलता तक सीमित नहीं रही है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और विश्वास भी उसके मूल में है। ‘सवाल करो, फिर लोन लो’ उसी विश्वास-आधारित मॉडल को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
अभियान की व्यापक पहुंच
यह पहल केवल एक विज्ञापन अभियान नहीं है, बल्कि बहु-आयामी संचार रणनीति पर आधारित है। इसे देश के विभिन्न आयु वर्गों, आय समूहों और भौगोलिक क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए कई माध्यमों का उपयोग किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
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डिजिटल प्लेटफॉर्म
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सोशल मीडिया अभियान
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समर्पित माइक्रोसाइट्स
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ब्लॉग और लेख
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लघु फिल्में और वीडियो
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सरल और इंटरैक्टिव जानकारीपूर्ण सामग्री
इन माध्यमों के जरिए जटिल वित्तीय अवधारणाओं को आसान भाषा में समझाया जाएगा ताकि आम नागरिक भी उन्हें आसानी से समझ सके।
डिजिटल युग में वित्तीय साक्षरता की अहमियत
डिजिटल इंडिया के इस दौर में वित्तीय लेन-देन ऑनलाइन हो चुका है। लेकिन डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल जिम्मेदारी भी जरूरी है। कई बार आकर्षक ऑफर, त्वरित स्वीकृति और न्यूनतम दस्तावेज़ीकरण उपभोक्ताओं को बिना पूरी जानकारी के निर्णय लेने के लिए प्रेरित कर देते हैं।
वित्तीय साक्षरता का अर्थ केवल बैंक खाता खोलना नहीं, बल्कि यह समझना है कि उधार लेना एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है। सही योजना और बजटिंग के बिना लिया गया लोन भविष्य की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
‘सवाल करो, फिर लोन लो’ इसी वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देता है। यह अभियान उपभोक्ताओं को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वे वास्तव में उस ऋण को वहन करने की स्थिति में हैं।
जिम्मेदार क्रेडिट पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में कदम
भारत में क्रेडिट बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। फिनटेक कंपनियों, डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स और पारंपरिक वित्तीय संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। ऐसे में पारदर्शिता और उपभोक्ता शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
टाटा कैपिटल का यह अभियान केवल अपने उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक रूप से जिम्मेदार उधारी के संदेश को बढ़ावा देता है। इससे पूरे उद्योग में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और नैतिक व्यवहार को प्रोत्साहन मिल सकता है।
युवाओं और नए उधारकर्ताओं पर विशेष ध्यान
भारत की युवा आबादी बड़ी और महत्वाकांक्षी है। पहली नौकरी, पहला घर, पहला वाहन—इन सभी चरणों में ऋण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन कई युवा पहली बार लोन लेते समय शर्तों की गहराई को नहीं समझ पाते।
यह पहल युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करती है। सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से उन्हें सरल उदाहरणों और कहानियों के जरिए समझाया जाएगा कि सही सवाल पूछना क्यों जरूरी है।
भविष्य की दिशा
‘सवाल करो, फिर लोन लो’ केवल एक अल्पकालिक अभियान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सोच का परिणाम है। टाटा कैपिटल का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में वित्तीय साक्षरता को और अधिक व्यापक बनाया जाए।
यदि उपभोक्ता जागरूक होंगे, तो डिफॉल्ट की घटनाएं कम होंगी, वित्तीय तनाव घटेगा और संपूर्ण अर्थव्यवस्था अधिक स्थिर होगी। यह पहल इसी व्यापक लक्ष्य की ओर एक सकारात्मक कदम है।
तेजी से बदलती आर्थिक परिस्थितियों में जहां ऋण तक पहुंच आसान हो चुकी है, वहीं जिम्मेदार उधारी की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। Tata Capital की ‘सवाल करो, फिर लोन लो’ पहल इसी आवश्यकता को पहचानते हुए उपभोक्ताओं को जागरूक और सशक्त बनाने का प्रयास है।
यह अभियान केवल एक नारा नहीं, बल्कि वित्तीय निर्णय लेने की एक नई सोच है—
सोच-समझकर, जानकारी के साथ और जिम्मेदारी से उधार लें।












