ईरानी शासन के भीतर नरमी के संकेतों का लीक, अमेरिकी कार्रवाई रोकने की कोशिश
समीर सिंह 'भारत' : मुख्य संपादक

युध्द रिपोर्ट : ईरानी शासन के भीतर कुछ तत्वों ने हाल ही में ऐसी जानकारी लीक की है, जिनमें यह दावा किया गया है कि सरकार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने व्यवहार में नरमी लाने की योजना बना रही है। यह लीक संभवतः अमेरिका को ईरान पर सैन्य कार्रवाई से रोकने के उद्देश्य से किया गया है, विशेषकर हालिया विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी शासन की कठोर और हिंसक कार्रवाई के बाद।
सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी के करीबी एक पूर्व सरकारी अधिकारी ने एक अंग्रेज़ी-भाषी प्रवासी मीडिया संस्थान को बताया कि लारीजानी शासन की नीतियों में नरमी लाने और व्यापक आर्थिक व सामाजिक सुधारों को आगे बढ़ाने के पक्षधर हैं। स्रोत के अनुसार, इस प्रयास को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का भी समर्थन प्राप्त है।
सूत्र ने यह भी कहा कि लारीजानी की इस पहल की सफलता काफी हद तक अमेरिका और इज़राइल के रुख पर निर्भर करती है, यह संकेत देते हुए कि यदि ईरान पर कोई सैन्य हमला हुआ, तो सुधार और नरमी की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। इन लीक का उद्देश्य संभवतः अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष ईरानी शासन की छवि को “सुधारोन्मुख” दिखाना और यह संदेश देना है कि शासन पर हमला करना उलटा प्रभाव डाल सकता है।

खामेनेई की भूमिका पर संदेह बरकरार
हालाँकि, शासन में किसी भी वास्तविक नरमी की कुंजी पूरी तरह से सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के हाथ में है, और उनके हालिया बयानों से उनके दशकों पुराने कठोर रुख में किसी बदलाव के संकेत नहीं मिलते।
17 जनवरी को दिए गए एक भाषण में खामेनेई ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी सख्त नीति दोहराई और प्रदर्शनकारियों को विदेशी एजेंट और आतंकवादी करार दिया। उन्होंने आर्थिक सुधार की आवश्यकता पर तो ज़ोर दिया, लेकिन इसे लागू करने के लिए कोई नया या ठोस दृष्टिकोण प्रस्तुत नहीं किया।
यदि खामेनेई वास्तव में बड़े सुधारों पर गंभीरता से विचार कर रहे होते, तो वे इस अवसर पर इसकी स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत कर सकते थे। ऐसा न करना इस बात पर संदेह को और गहरा करता है कि वे सुधारों का वास्तविक समर्थन करते हैं या फिर अपने पारंपरिक कठोर विचारों पर ही कायम रहेंगे।
सीरियाई संघर्ष: एसडीएफ को भारी नुकसान, सरकार से युद्धविराम पर मजबूर
इस बीच, सीरिया में सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) और सरकार के बीच 18 जनवरी को हस्ताक्षरित युद्धविराम समझौता पिछले एक वर्ष से एसडीएफ द्वारा उठाए गए कई प्रमुख मुद्दों पर व्यापक रियायतों को दर्शाता है।
17 और 18 जनवरी को सीरियाई सरकार ने एक तेज़ सैन्य अभियान के तहत रक्का और दीर एज़ ज़ोर प्रांतों में एसडीएफ के नियंत्रण वाले बड़े इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया। सरकारी बल दक्षिणी रक्का ग्रामीण क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए तबका शहर, रक्का रेगिस्तान के तेल क्षेत्र, और यूफ्रेट्स नदी के दक्षिणी तट पर स्थित कई कस्बों पर नियंत्रण स्थापित करने में सफल रहे, इसके बाद उन्होंने रक्का शहर में प्रवेश किया।

साथ ही, सरकारी सेनाएँ दीर एज़ ज़ोर प्रांत में यूफ्रेट्स नदी को पार कर एसडीएफ के नियंत्रण वाले गाँवों और तेल क्षेत्रों पर भी काबिज़ हो गईं। इस अचानक हुए क्षेत्रीय नुकसान ने एसडीएफ को लंबे समय से चली आ रही सरकारी मांगों को स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया।
इन परिस्थितियों में, सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा और एसडीएफ कमांडर मज़लूम अब्दी ने 18 जनवरी को युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे एसडीएफ के लिए एक रणनीतिक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।












