मैथन में 50 साल पुराना क्लेरिफ्लोकुलेटर ध्वस्त, हजारों लोगों पर पानी संकट का खतरा
सरबजीत सिंह

मैथन- कुमारधुबी ( धनबाद ) : मैथन क्षेत्र में आज सुबह एक बड़ी घटना सामने आई, जहां बीएसके कॉलेज के सामने स्थित करीब 50 वर्षों पुराना क्लेरिफ्लोकुलेटर अचानक ध्वस्त हो गया। इस घटना ने इलाके में पानी आपूर्ति व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इससे हजारों लोगों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह क्लेरिफ्लोकुलेटर लंबे समय से जर्जर अवस्था में था और इसके निर्माण के बाद से अब तक इसकी कोई समुचित देखरेख नहीं की गई थी। लापरवाही और रखरखाव की कमी के चलते आज सुबह लगभग 5 बजे इसकी 50 फीट ऊंची फिल्टर वॉटर पासिंग छत भरभराकर गिर गई।
घटना के समय फिल्टर ऑपरेटर आशीष मंडल मौके पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि वह रोज की तरह क्लेरिफ्लोकुलेटर में एलम डालने के लिए पहुंचे थे। जैसे ही वह अंदर गए, उसी समय छत गिर गई। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा हादसा बन सकता था, लेकिन सौभाग्य से वह सुरक्षित बच गए। उनकी इस आपबीती से साफ है कि यदि कुछ सेकंड का भी अंतर होता, तो गंभीर जनहानि हो सकती थी।
इस घटना के बाद एक और गंभीर चिंता सामने आई है। क्लेरिफ्लोकुलेटर से जुड़े फिल्टर वॉटर रिजर्ववायर की स्थिति भी अत्यंत जर्जर बताई जा रही है, जो कभी भी गिर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है।
इस हादसे का सीधा असर आसपास के कई पंचायतों पर पड़ने की संभावना है। शिवालीबाड़ी पूर्व, शिवालीबाड़ी उत्तर, मेढ़ा, कलिपहाड़ी दक्षिण और कालीमाटी (निमड़ंगा) पंचायत के हजारों लोग इस घटना से प्रभावित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में जल आपूर्ति बाधित होने की आशंका है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। मुखिया मनोज राउत और तनवीर आलम ने बताया कि उन्होंने पहले भी इस जर्जर संरचना के बारे में संबंधित विभाग को अवगत कराया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत या पुनर्निर्माण किया जाता, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।
घटना की सूचना विभाग को दे दी गई है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ गई है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि जल्द ही वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि, जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिरकार सरकारी संरचनाओं की समय-समय पर जांच और रखरखाव क्यों नहीं किया जाता। यदि इस दिशा में जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे हो सकते हैं।












