टूर फॉर टस्क्स 2026: हाथियों के शोषण के खिलाफ ऐतिहासिक अभियान
समीर सिंह 'भारत' : मुख्य संपादक

विशेष रिपोर्ट : वाइल्डलाइफ SOS, एक ग्लोबल वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन और वेलफेयर ऑर्गनाइज़ेशन है जो खास जानवरों की देखभाल देने और इंसान-जानवरों के बीच टकराव को कम करने के लिए काम करता है। इसने आज अपने 2026 टूर फॉर टस्क्स के लॉन्च की घोषणा की। यह फ्लोरिडा में एक स्पीकिंग टूर है जिसे भारत के हाथियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य बनाने में मदद करने के लिए दर्शकों को एजुकेट करने, प्रेरित करने और इकट्ठा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
टूर फॉर टस्क्स: हाथियों के शोषण के खिलाफ वैश्विक आवाज
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस ने हाथियों के शोषण के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अपने दूसरे वार्षिक “टूर फॉर टस्क्स” अभियान की घोषणा की है। इस अभियान का नेतृत्व संस्था के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यानारायण और गीता सेशमणि कर रहे हैं। इस वर्ष का यह विशेष दौरा हाथियों के भीख मंगवाने, पर्यटन उद्योग और मनोरंजन गतिविधियों में हो रहे शोषण को केंद्र में रखेगा और यह दिखाएगा कि किस तरह निरंतर प्रयासों से इन संवेदनशील जीवों के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है।
वाइल्डलाइफ एसओएस लंबे समय से भारत में घायल, परित्यक्त और प्रताड़ित वन्यजीवों के पुनर्वास के लिए काम कर रहा है। संस्था का एलीफेंट कंज़र्वेशन एंड केयर सेंटर (हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र) तथा ‘बेगिंग एलीफेंट कैंपेन’ जैसे अभियान हाथियों को अमानवीय परिस्थितियों से मुक्त कर सुरक्षित जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे हैं। “टूर फॉर टस्क्स” के माध्यम से संस्था न केवल अपने इन प्रयासों को वैश्विक समुदाय के सामने रखेगी, बल्कि लोगों को सीधे जुड़ने और सहयोग देने का अवसर भी प्रदान करेगी।
कार्तिक सत्यानारायण और गीता सेशमणि इस दौरे के दौरान विस्तार से बताएंगे कि किस प्रकार हाथियों को अक्सर सड़कों पर भीख मंगवाने, शादी-ब्याह या धार्मिक आयोजनों में इस्तेमाल करने, और पर्यटन स्थलों पर सवारी कराने के लिए मजबूर किया जाता है। कई मामलों में इन जानवरों को कम उम्र में ही जंगलों से अलग कर दिया जाता है, जंजीरों में बांधा जाता है और कठोर प्रशिक्षण के नाम पर शारीरिक तथा मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। यह दौरा इन सच्चाइयों को सामने लाकर लोगों को सोचने और कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करेगा।
वाइल्डलाइफ एसओएस यूएसए की कार्यकारी निदेशक निकी शार्प ने कहा, “हाथी अत्यंत बुद्धिमान और भावनात्मक प्राणी हैं, जो कैद और निरंतर श्रम के जीवन में अपार पीड़ा सहते हैं। ‘टूर फॉर टस्क्स’ का उद्देश्य इस संकट को चेहरा, आवाज़ और वास्तविक कहानियां देना है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। जब लोग समझते हैं कि हाथी किन परिस्थितियों से गुजरते हैं और यह भी कि बदलाव संभव है, तो वे समाधान का हिस्सा बनना चाहते हैं।”
इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्म “माय स्वीट पारो” की विशेष स्क्रीनिंग होगी। यह मार्मिक फिल्म सुज़ी नामक एक वृद्ध और दृष्टिहीन मादा हाथी तथा उसके समर्पित देखभालकर्ता बाबूराम के बीच गहरे और स्थायी संबंध को दर्शाती है। फिल्म दर्शाती है कि करुणा, धैर्य और समर्पण किस तरह एक घायल और उपेक्षित जीवन में आशा की नई किरण जगा सकते हैं। हर कार्यक्रम में फिल्म प्रदर्शन के बाद उपस्थित दर्शकों को कार्तिक सत्यानारायण और गीता सेशमणि से सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा।
दौरे के दौरान संस्था यह भी बताएगी कि एलीफेंट कंज़र्वेशन एंड केयर सेंटर में हाथियों को किस प्रकार जीवनभर की देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। यहां उन्हें चिकित्सकीय उपचार, पौष्टिक आहार, खुला प्राकृतिक वातावरण और सामाजिक संपर्क की सुविधा दी जाती है। कई हाथी वर्षों की प्रताड़ना के कारण शारीरिक बीमारियों, पैरों की गंभीर समस्याओं, कुपोषण और मानसिक आघात से पीड़ित होते हैं। विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों और प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की टीम उनके उपचार और पुनर्वास के लिए निरंतर कार्य करती है।
‘बेगिंग एलीफेंट कैंपेन’ विशेष रूप से उन हाथियों को बचाने के लिए चलाया जा रहा है जिन्हें शहरों और कस्बों में सड़कों पर भीख मंगवाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह अभियान स्थानीय प्रशासन और समुदायों के साथ मिलकर काम करता है, ताकि हाथियों को कानूनी संरक्षण दिलाया जा सके और उनके मालिकों को वैकल्पिक आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जा सकें। संस्था का मानना है कि केवल बचाव अभियान ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ-साथ समुदाय-आधारित शिक्षा और आर्थिक सहयोग भी जरूरी है।
इस वर्ष “टूर फॉर टस्क्स” का आयोजन अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के विभिन्न शहरों में किया जाएगा। 7 मार्च को जैक्सनविल में म्यूज़ियम ऑफ कंटेम्पररी आर्ट (MOCA) में कार्यक्रम आयोजित होगा। 13 मार्च को सेंट पीटर्सबर्ग में जेम्स म्यूज़ियम ऑफ वेस्टर्न एंड वाइल्डलाइफ आर्ट में अगला पड़ाव रहेगा। 15 मार्च को फोर्ट लॉडरडेल के सेवोर सिनेमा में विशेष प्रस्तुति होगी। इसके अतिरिक्त द विलेजेस में एक विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो आम जनता के लिए खुला नहीं होगा।
कार्तिक सत्यानारायण ने कहा, “हाथियों के सामने खड़ा संकट तेजी से बढ़ रहा है और हस्तक्षेप करने का समय सीमित होता जा रहा है। यह दौरा हमारे बचाव कार्यों की वास्तविकता को सीधे समुदायों तक पहुंचाता है और लोगों को ठोस तरीके बताता है, जिनके माध्यम से वे भारत के हाथियों की जान बचाने वाले समाधानों का समर्थन कर सकते हैं।”
संस्था का मानना है कि शिक्षा और जागरूकता ही स्थायी परिवर्तन की कुंजी है। जब लोग समझते हैं कि पर्यटन या मनोरंजन के नाम पर किसी हाथी की सवारी करना उसके लिए कितनी पीड़ा का कारण बन सकता है, तो वे जिम्मेदार विकल्प चुनने लगते हैं। “टूर फॉर टस्क्स” इसी सोच को बढ़ावा देने का प्रयास है, ताकि वैश्विक स्तर पर हाथियों के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना मजबूत हो सके।
वाइल्डलाइफ एसओएस वर्तमान में अपने संरक्षण केंद्र में 30 से अधिक बचाए गए हाथियों की देखभाल कर रहा है। इन हाथियों में कई ऐसे हैं जिन्हें दशकों तक जंजीरों में बांधकर रखा गया, कठोर श्रम कराया गया या उचित चिकित्सा सुविधा से वंचित रखा गया। संस्था उन्हें जीवनभर सुरक्षित आश्रय प्रदान करती है, जहां वे प्राकृतिक व्यवहार कर सकें, कीचड़ स्नान कर सकें और अन्य हाथियों के साथ सामाजिक संबंध बना सकें।
दौरे के दौरान एकत्रित की जाने वाली धनराशि हाथियों के बचाव, आपातकालीन पशु चिकित्सा सेवाओं और दीर्घकालिक पुनर्वास कार्यक्रमों में खर्च की जाएगी। इसके अतिरिक्त यह राशि समुदायों में जागरूकता कार्यक्रमों और वैकल्पिक रोजगार योजनाओं को भी समर्थन देगी, जिससे हाथियों पर निर्भर शोषणकारी गतिविधियों को कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि एशियाई हाथियों की संख्या लगातार घट रही है और मानवीय गतिविधियों के कारण उनके प्राकृतिक आवास सिकुड़ते जा रहे हैं। ऐसे में संरक्षण प्रयासों का महत्व और बढ़ जाता है। वाइल्डलाइफ एसओएस का यह अभियान न केवल प्रत्यक्ष बचाव कार्यों को मजबूती देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा देगा।
“माय स्वीट पारो” जैसी कहानियां यह दर्शाती हैं कि जब संवेदनशीलता और समर्पण के साथ काम किया जाए, तो गहरे आघात झेल चुके जीव भी फिर से भरोसा करना सीख सकते हैं। सुज़ी और बाबूराम का संबंध इस बात का प्रतीक है कि इंसान और पशु के बीच करुणा का बंधन कितना शक्तिशाली हो सकता है।
“टूर फॉर टस्क्स” के माध्यम से वाइल्डलाइफ एसओएस यह संदेश देना चाहता है कि हाथियों का शोषण कोई दूर की समस्या नहीं है, बल्कि एक ऐसा मुद्दा है जिसे वैश्विक समुदाय के सहयोग से हल किया जा सकता है। संस्था का विश्वास है कि जब लोग जागरूक होते हैं और जिम्मेदारी से कदम उठाते हैं, तो परिवर्तन संभव है।
इस पहल के जरिए न केवल हाथियों की पीड़ा पर प्रकाश डाला जा रहा है, बल्कि यह भी दिखाया जा रहा है कि संगठित प्रयास, वैज्ञानिक देखभाल, सामुदायिक भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलकर किस तरह एक बेहतर भविष्य की नींव रख सकते हैं। “टूर फॉर टस्क्स” इसी उम्मीद और प्रतिबद्धता का प्रतीक है—एक ऐसा अभियान जो हाथियों को सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्र जीवन दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है












